
नागोया। एशियाई खेल 2026 में भारतीय तीरंदाजी टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए एक और स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया है। कंपाउंड मिक्स्ड टीम इवेंट में भारत की चिकिता तनिपार्थी और साहिल जाधव की जोड़ी ने फाइनल में दक्षिण कोरिया को हराकर गोल्ड मेडल जीता। रोमांचक मुकाबले में भारतीय जोड़ी ने दबाव के बावजूद संयम बनाए रखा और निर्णायक क्षणों में शानदार निशाने लगाकर देश को तीरंदाजी में एक और बड़ी सफलता दिलाई।
चिकिता और साहिल की जोड़ी पूरे टूर्नामेंट में बेहद संतुलित नजर आई। दोनों खिलाड़ियों ने क्वालिफिकेशन से लेकर नॉकआउट दौर तक लगातार उच्च स्तर का प्रदर्शन किया। भारत ने कंपाउंड मिक्स्ड टीम क्वालिफिकेशन में 1414 अंकों के साथ पहला स्थान हासिल किया था। इस प्रदर्शन ने शुरुआत से ही भारतीय जोड़ी को पदक की मजबूत दावेदारों में शामिल कर दिया था।
THIS IS HUGE RESULT FOLKS!!!! 🤩🥹
— The Khel India (@TheKhelIndia) September 30, 2026
Sahil & Chikitha wins the Compound Team Gold & earns LA 2028 Quota for India 🇮🇳🥇
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नॉकआउट दौर में भी भारतीय जोड़ी ने अपनी लय बनाए रखी। राउंड ऑफ 16 में भारत ने मंगोलिया को 160-146 से हराकर अगले दौर में प्रवेश किया। इसके बाद क्वार्टर फाइनल में चिकिता और साहिल ने कजाखस्तान को 159-154 से मात दी और सेमीफाइनल में जगह बनाई। इन मुकाबलों में दोनों भारतीय तीरंदाजों ने लगातार ऊंचे स्कोर बनाए और विपक्षी टीमों को दबाव में रखा।
सेमीफाइनल में भारत का सामना थाईलैंड से हुआ। यह मुकाबला बेहद करीबी रहा और अंतिम तीर तक परिणाम को लेकर रोमांच बना रहा। भारतीय जोड़ी ने आखिरकार 156-155 के अंतर से जीत हासिल की। सिर्फ एक अंक की बढ़त से मिली इस जीत ने चिकिता और साहिल को स्वर्ण पदक मुकाबले में पहुंचा दिया।
फाइनल में भारतीय जोड़ी के सामने दक्षिण कोरिया की मजबूत टीम थी। तीरंदाजी में दक्षिण कोरिया लंबे समय से विश्व की प्रमुख ताकतों में शामिल रहा है। ऐसे में भारतीय खिलाड़ियों के लिए मुकाबला आसान नहीं था। दोनों टीमों के बीच मुकाबला बेहद नजदीकी रहा और आखिरकार निर्णय शूट-ऑफ तक पहुंचा। यहां चिकिता और साहिल ने दबाव को बेहतर तरीके से संभाला और निर्णायक निशानों के दम पर भारत को स्वर्ण पदक दिलाया।
यह जीत भारत के लिए इसलिए भी खास रही क्योंकि इससे देश ने कंपाउंड मिक्स्ड टीम में अपना खिताब बरकरार रखा। भारतीय तीरंदाजों ने पिछले एशियाई खेलों में भी इस स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता था। इस बार नई भारतीय जोड़ी ने उसी सफलता को दोहराते हुए एशियाई स्तर पर देश की मजबूत स्थिति कायम रखी।
चिकिता तनिपार्थी के लिए यह प्रतियोगिता खास तौर पर शानदार रही है। उन्होंने महिला कंपाउंड क्वालिफिकेशन में 705 अंक हासिल कर पहला स्थान प्राप्त किया था। उनकी सटीकता और निरंतरता ने भारत को टीम स्पर्धाओं में भी मजबूत स्थिति में पहुंचाया। चिकिता महिला कंपाउंड टीम का भी हिस्सा रहीं, जिसने चीन को हराकर स्वर्ण पदक जीता। इस तरह उन्होंने एशियाई खेलों में एक से ज्यादा गोल्ड मेडल जीतकर भारत की पदक तालिका में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
साहिल जाधव ने भी पुरुष कंपाउंड स्पर्धाओं में लगातार अच्छा प्रदर्शन किया। क्वालिफिकेशन में उन्होंने 709 अंक हासिल किए और व्यक्तिगत वर्ग में भारत के प्रमुख तीरंदाजों में रहे। मिक्स्ड टीम में चिकिता के साथ उनकी तालमेल प्रतियोगिता की बड़ी ताकत साबित हुई। दबाव के क्षणों में दोनों खिलाड़ियों ने एक-दूसरे का साथ देते हुए लगातार सटीक निशाने लगाए।
भारत की इस जीत का महत्व केवल एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक तक सीमित नहीं है। कंपाउंड मिक्स्ड टीम इवेंट को लॉस एंजिलिस 2028 ओलंपिक में शामिल किया जा रहा है और एशियाई खेलों का यह मुकाबला ओलंपिक क्वालिफिकेशन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण था। रिपोर्टों के मुताबिक इस स्वर्ण पदक के साथ भारत ने LA28 के लिए कंपाउंड मिक्स्ड टीम कोटा भी हासिल किया है।
भारतीय तीरंदाजी के लिए एशियाई खेल 2026 अब तक बेहद सफल रहे हैं। महिला कंपाउंड टीम ने भी स्वर्ण पदक जीतकर अपना खिताब बचाया। ज्योति सुरेखा वेन्नम, पृथिका प्रदीप और चिकिता तनिपार्थी की भारतीय टीम ने फाइनल में चीन को हराया। इसके बाद चिकिता और साहिल ने मिक्स्ड टीम में स्वर्ण जीतकर तीरंदाजी में भारत को दिन का दूसरा गोल्ड दिलाया।
इस जीत ने भारत की कंपाउंड तीरंदाजी में बढ़ती ताकत को भी एक बार फिर साबित किया है। एशियाई स्तर पर चीन और दक्षिण कोरिया जैसी मजबूत टीमों के खिलाफ भारतीय तीरंदाज लगातार चुनौती पेश कर रहे हैं। क्वालिफिकेशन में शीर्ष स्थान और फिर नॉकआउट मुकाबलों में लगातार जीत ने भारतीय खिलाड़ियों की तैयारी और मानसिक मजबूती दोनों को दिखाया।
फाइनल में दक्षिण कोरिया के खिलाफ मिली जीत खास तौर पर महत्वपूर्ण रही, क्योंकि मैच का फैसला बेहद दबाव वाले शूट-ऑफ में हुआ। ऐसे मुकाबलों में तकनीक के साथ मानसिक नियंत्रण भी अहम होता है। चिकिता और साहिल ने निर्णायक समय पर संयम बनाए रखा और अपनी सटीकता से मुकाबला भारत के पक्ष में कर दिया।
एशियाई खेलों में इस गोल्ड के बाद भारतीय तीरंदाजी दल का आत्मविश्वास और बढ़ा है। कंपाउंड स्पर्धाओं में लगातार मिल रही सफलताओं ने भारत को महाद्वीपीय स्तर पर प्रमुख ताकत के रूप में स्थापित किया है।
चिकिता तनिपार्थी और साहिल जाधव की यह जीत भारतीय खेलों के लिए यादगार उपलब्धि बन गई है। थाईलैंड के खिलाफ एक अंक से सेमीफाइनल जीतने से लेकर दक्षिण कोरिया को रोमांचक फाइनल में हराने तक भारतीय जोड़ी ने पूरे अभियान में दबाव के बीच शानदार प्रदर्शन किया और आखिरकार स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया।





