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वैभव सूर्यवंशी के T20I डेब्यू को लेकर बड़ा दावा

Kavita2
16 July 2026 1:40 PM IST
वैभव सूर्यवंशी के T20I डेब्यू को लेकर बड़ा दावा
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नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट में सबसे कम उम्र में T20 इंटरनेशनल डेब्यू करने वाले वैभव सूर्यवंशी को लेकर एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। इंग्लैंड के खिलाफ T20I सीरीज में 15 वर्षीय वैभव को मौका मिलने के पीछे टीम प्रबंधन के फैसले और चयन प्रक्रिया को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वैभव सूर्यवंशी को इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज में खिलाने के लिए भारतीय क्रिकेट बोर्ड (BCCI) पर अप्रत्यक्ष दबाव था। हालांकि, टीम के हेड कोच गौतम गंभीर और चीफ सेलेक्टर अजीत अगरकर इस फैसले के पक्ष में शुरुआत से नहीं थे। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों का मानना था कि वैभव को तभी मौका दिया जाना चाहिए जब अनुभवी विकेटकीपर-बल्लेबाज संजू सैमसन शुरुआती मुकाबलों में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाएं।

15 साल की उम्र में बनाया रिकॉर्ड

वैभव सूर्यवंशी ने इंग्लैंड के खिलाफ दूसरे T20 इंटरनेशनल मुकाबले में भारत के लिए डेब्यू किया और इतिहास रच दिया। वह भारत की ओर से T20I क्रिकेट खेलने वाले सबसे युवा खिलाड़ी बन गए।

सिर्फ 15 साल की उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखने वाले वैभव ने अपनी प्रतिभा से पहले ही क्रिकेट जगत का ध्यान आकर्षित किया है। इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज में उन्हें तीन मुकाबलों में खेलने का मौका मिला।

उनके चयन को भारतीय क्रिकेट में युवा प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने की दिशा में एक बड़े कदम के तौर पर देखा गया।

संजू सैमसन की जगह मिला मौका

रिपोर्ट के अनुसार, वैभव को संजू सैमसन की जगह टीम में शामिल किया गया था। शुरुआती योजनाओं में चयनकर्ताओं और टीम प्रबंधन की प्राथमिकता संजू सैमसन को ही बनाए रखने की थी।

बताया जा रहा है कि चयनकर्ताओं का मानना था कि संजू को पर्याप्त मौके दिए जाने चाहिए, क्योंकि वह लंबे समय से टीम का हिस्सा रहे हैं और उनके अनुभव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

हालांकि, बाद में सीरीज के पांचवें और आखिरी T20I मुकाबले में संजू सैमसन की टीम में वापसी हुई।

गंभीर और अगरकर की भूमिका पर रिपोर्ट में दावा

सामने आई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वैभव सूर्यवंशी को मौका देने के फैसले में गौतम गंभीर की कोई विशेष भूमिका नहीं थी।

रिपोर्ट के मुताबिक, गंभीर और अजीत अगरकर दोनों इस बात पर सहमत थे कि वैभव को तभी मैदान पर उतारा जाना चाहिए जब संजू सैमसन शुरुआती मुकाबलों में प्रभावित करने में असफल रहें।

दोनों का मानना था कि युवा खिलाड़ी को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उतारने का फैसला जल्दबाजी में नहीं लिया जाना चाहिए और उसे सही समय पर मौका मिलना चाहिए।

शुरुआती मैचों के बाद बदला फैसला

रिपोर्ट में कहा गया है कि आयरलैंड के खिलाफ दो मैचों और इंग्लैंड के खिलाफ पहले T20I में संजू सैमसन के प्रदर्शन के बाद भी उन्हें दूसरा मुकाबला खेलने का मौका देने का फैसला किया गया था।

लेकिन रिपोर्ट के अनुसार, इसके बाद वैभव सूर्यवंशी को मौका देने के लिए अप्रत्यक्ष दबाव बना।

इसके बाद वैभव को प्लेइंग इलेवन में शामिल किया गया और उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर की।

युवा खिलाड़ियों को लेकर बढ़ी चर्चा

वैभव सूर्यवंशी के डेब्यू के बाद भारतीय क्रिकेट में युवा खिलाड़ियों को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है।

कम उम्र में घरेलू क्रिकेट और फ्रेंचाइजी क्रिकेट में अपनी पहचान बनाने वाले वैभव को भविष्य के बड़े खिलाड़ियों में गिना जा रहा है।

हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि युवा खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की चुनौती के लिए धीरे-धीरे तैयार करना जरूरी होता है।

चयन प्रक्रिया को लेकर उठे सवाल

इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद चयन प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। क्रिकेट प्रशंसक और विशेषज्ञ इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि क्या किसी खिलाड़ी को बाहरी दबाव के कारण मौका मिलना चाहिए या फिर चयन पूरी तरह प्रदर्शन और टीम की जरूरतों के आधार पर होना चाहिए।

हालांकि, भारतीय टीम प्रबंधन या BCCI की ओर से इस कथित दबाव को लेकर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

वैभव से बड़ी उम्मीदें

कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखने वाले वैभव सूर्यवंशी से अब भारतीय क्रिकेट को काफी उम्मीदें हैं। उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती लगातार अच्छा प्रदर्शन करना और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धा में खुद को साबित करना होगी।

उनका डेब्यू भले ही विवादों और चर्चाओं के बीच हुआ हो, लेकिन उनकी प्रतिभा और क्षमता ने क्रिकेट जगत का ध्यान जरूर खींचा है।

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