
Bengaluru बेंगलुरु : बेंगलुरु में जन्मे लॉन्ग जम्पर लोकेश सत्यनाथन इस साल होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियन गेम्स में जगह बनाने के लक्ष्य के साथ भारत लौट आए हैं। 26 वर्षीय यह एथलीट वर्तमान में अमेरिका के टार्लेटन स्टेट यूनिवर्सिटी में कॉलेज एथलीट के रूप में प्रशिक्षण ले रहे हैं और प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले रहे थे।
लोकेश सत्यनाथन को एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (AFI) ने विशेष छूट देते हुए 22 मई से रांची में शुरू होने वाली नेशनल एथलेटिक्स फेडरेशन प्रतियोगिता में हिस्सा लेने की अनुमति दी है। यह प्रतियोगिता कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए होने वाले अंतिम ट्रायल्स का हिस्सा मानी जा रही है, जहां खिलाड़ियों का चयन अंतरराष्ट्रीय मंच के लिए किया जाएगा।
लोकेश का लक्ष्य केवल कॉमनवेल्थ गेम्स तक सीमित नहीं है, बल्कि वह जून के अंत में होने वाली नेशनल इंटर-स्टेट चैंपियनशिप में भी हिस्सा लेना चाहते हैं, जो एशियन गेम्स के लिए अंतिम चयन ट्रायल्स के रूप में महत्वपूर्ण होगी।
हालांकि, उनके चयन में एक तकनीकी बाधा सामने आई थी। ट्रायल्स के नियमों के अनुसार किसी भी खिलाड़ी को कम से कम दो राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं और एक राज्य स्तरीय मीट में हिस्सा लेना अनिवार्य होता है। लोकेश अपने हालिया सेमेस्टर की परीक्षाओं और अमेरिका में प्रशिक्षण कार्यक्रम के कारण यह शर्त पूरी नहीं कर पाए थे।
इसी वजह से AFI ने उनकी स्थिति पर विचार करते हुए उन्हें विशेष अनुमति प्रदान की है, ताकि वे चयन प्रक्रिया में भाग ले सकें और अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकें।
लोकेश का भारत लौटना भारतीय एथलेटिक्स के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि वह लंबे कूद (Long Jump) में देश के उभरते हुए खिलाड़ियों में शामिल हैं और विदेशी प्रशिक्षण अनुभव का लाभ भारतीय टीम को मिल सकता है।
अब सभी की नजरें रांची में होने वाले ट्रायल्स पर होंगी, जहां लोकेश सत्यनाथन के प्रदर्शन से यह तय होगा कि वे अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व कर पाएंगे या नहीं।





