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एशियन खोंखो फेडरेशन ने फिलीपींस को दी आधिकारिक मान्यता

SHIDDHANT
28 Oct 2025 11:45 PM IST
एशियन खोंखो फेडरेशन ने फिलीपींस को दी आधिकारिक मान्यता
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Hyderabad हैदराबाद। भारत के पारंपरिक खेल खो-खो ने अब एशिया में अपनी नई पहचान बना ली है। एशियन खोंखो फेडरेशन (Asian Kho Kho Federation - AKKF) ने फिलीपींस खोंखो एसोसिएशन को अपने नवीनतम सदस्य के रूप में आधिकारिक रूप से मान्यता प्रदान की है। यह कदम भारत में जन्मे इस ऐतिहासिक खेल के वैश्वीकरण की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है।
फेडरेशन के अध्यक्ष अस्लम शेर खान ने कहा कि फिलीपींस के जुड़ने से खेल के विस्तार को नई दिशा मिलेगी। उन्होंने कहा—
“फिलीपींस के शामिल होने के साथ हम एक और देश को इस खेल की भावना, फुर्ती और टीम भावना से जुड़ते देख रहे हैं। यह विस्तार हमारे साझा मिशन का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य खो-खो को एक सच्चा वैश्विक खेल बनाना है।”
फिलीपींस में खो-खो की शुरुआत
फिलीपींस में खो-खो की लोकप्रियता हाल ही में बढ़नी शुरू हुई है। स्कूलों और विश्वविद्यालयों में खेल के प्रति रुचि बढ़ी है, और स्थानीय स्तर पर टूर्नामेंट आयोजित किए जा रहे हैं। फिलीपींस खोंखो एसोसिएशन की अध्यक्ष मरियन इलेन आर. डी चावेज़ ने कहा—
“यह हमारे लिए गर्व का क्षण है। एशियन खोंखो फेडरेशन की मान्यता से हमें इस पारंपरिक खेल को देशभर में विकसित करने की प्रेरणा मिली है। हमारा सपना है कि एक दिन फिलीपींस की टीम अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले और इस खेल की भावना को दुनिया तक पहुंचाए।”
भारत से एशिया तक फैला खो-खो का जादू
खो-खो भारत के सबसे पुराने टीम खेलों में से एक है, जो प्राचीन काल से खेला जा रहा है। यह खेल गति, रणनीति और टीमवर्क का अनूठा मिश्रण है। ग्रामीण इलाकों से शुरू हुआ यह खेल अब आधुनिक सुविधाओं और प्रोफेशनल संरचना के साथ वैश्विक मंच तक पहुंच गया है।
हाल के वर्षों में भारत सरकार और खेलो इंडिया मिशन के सहयोग से खो-खो को नए आयाम मिले हैं। हाल ही में आयोजित पहले खो-खो विश्वकप ने इस खेल को अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर स्थापित कर दिया।
एशियन खोंखो फेडरेशन की भूमिका
एशियन खोंखो फेडरेशन (AKKF) का गठन भारत के इस पारंपरिक खेल को एशिया और विश्व स्तर तक ले जाने के उद्देश्य से किया गया था। फेडरेशन अब तक नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका, ईरान और अब फिलीपींस को अपने सदस्य देशों में शामिल कर चुका है।
अस्लम शेर खान ने बताया कि आने वाले वर्षों में एशियन खोंखो चैंपियनशिप आयोजित की जाएगी और खेल को एशियन गेम्स में शामिल करने की दिशा में भी प्रयास जारी हैं।
खो-खो का बढ़ता वैश्विक प्रभाव
भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ का प्रतीक बनता यह खेल अब सांस्कृतिक एकता और खेल कूटनीति का माध्यम बन रहा है। विभिन्न देशों में इसके प्रशिक्षण शिविर और एक्सचेंज प्रोग्राम आयोजित किए जा रहे हैं।
फिलीपींस के साथ इस समझौते के बाद उम्मीद है कि दक्षिण-पूर्व एशिया के अन्य देश जैसे मलेशिया, थाईलैंड और इंडोनेशिया भी इस खेल से जुड़ेंगे।
खिलाड़ियों और युवा पीढ़ी के लिए नए अवसर
फिलीपींस में खो-खो एसोसिएशन ने स्थानीय खेल प्राधिकरणों के साथ मिलकर प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए हैं। मरियन डी चावेज़ ने कहा कि “खो-खो न केवल खेल है, बल्कि यह अनुशासन, टीमवर्क और त्वरित निर्णय क्षमता सिखाने वाला माध्यम है।”
भारतीय कोचों और विशेषज्ञों को फिलीपींस भेजने पर भी विचार किया जा रहा है, ताकि वहां खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दिया जा सके। इसके अलावा, दोनों देशों के बीच खेल-सांस्कृतिक साझेदारी को और मजबूत करने की योजना है।
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