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एशियाई खेल: महिला हॉकी में भारत का स्वर्णिम इतिहास, चीन को दी मात

Tara Tandi
2 Oct 2026 7:17 PM IST
एशियाई खेल: महिला हॉकी में भारत का स्वर्णिम इतिहास, चीन को दी मात
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काकामिगहारा: शुक्रवार को आइची-नागोया गेम्स के फ़ाइनल में मौजूदा चैंपियन चीन को 1-0 से हराकर भारत ने एशियाई खेलों में महिला हॉकी का गोल्ड मेडल जीतने का 44 साल का इंतज़ार खत्म किया और लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक खेलों के लिए सीधे क्वालिफ़ाई किया।
लालरेम्सियामी ने 10वें मिनट में ज़बरदस्त रिवर्स-हिट के साथ निर्णायक गोल किया। चीन के लगातार दबाव के बावजूद भारत ने संयम बनाए रखा और 1982 के बाद पहली बार महाद्वीपीय खिताब अपने नाम किया।
यह गोल एक बेहतरीन अटैक के बाद हुआ। सलीमा टेटे ने सर्कल में सटीक पास दिया, जिसके बाद साक्षी ने गेंद लालरेम्सियामी तक पहुंचाई। लालरेम्सियामी ने ज़ोरदार रिवर्स-हिट लगाई जो सीधे नेट के ऊपरी हिस्से में चली गई और चीनी गोलकीपर के पास उसे रोकने का कोई मौका नहीं था।
भारत की शुरुआती बढ़त की परीक्षा तब हुई जब चीन ने धीरे-धीरे गेंद पर कब्ज़ा जमाया और बार-बार भारतीय सर्कल में खतरा पैदा किया। हालांकि, भारतीय डिफेंस मज़बूती से डटा रहा और नवनीत कौर ने गोललाइन पर अहम बचाव करते हुए चीन के पेनल्टी-कॉर्नर के प्रयास को नाकाम कर दिया।
इसके बाद सविता पूनिया ने फ़ाइनल का एक यादगार पल बनाया। उन्होंने एक हाथ से शानदार बचाव करते हुए चीन को पेनल्टी स्ट्रोक से वंचित कर दिया। भारतीय गोलकीपर ने चीन के प्रयास को बखूबी भांप लिया और उसे रोक दिया, जिससे मैच के अहम मोड़ पर अपनी टीम की मामूली बढ़त बरकरार रही।
चीन की बराबरी करने की कोशिशों के बावजूद भारत हाफ़-टाइम तक 1-0 से आगे रहा। ब्रेक के बाद भी दबाव बना रहा और चीन ने तीसरे क्वार्टर में कई पेनल्टी कॉर्नर हासिल किए, लेकिन सलीमा और उनकी टीम की साथियों ने बार-बार अपने शरीर को दांव पर लगाकर उन प्रयासों को रोका।
मैच के आखिरी पलों में चीन ने अटैक में अपनी पूरी ताकत झोंक दी। बराबरी का गोल करने के लिए उन्होंने अपने गोलकीपर को हटाकर एक अतिरिक्त आउटफ़ील्ड खिलाड़ी को मैदान पर उतारा। भारत ने संयम बनाए रखा, गेंद पर कब्ज़ा बनाए रखा और विरोधी टीम को मैच को शूटआउट तक ले जाने का कोई साफ़ मौका नहीं दिया। यह जीत भारतीय महिला हॉकी के लिए एक यादगार वापसी थी। इससे पहले टीम ने 1982 में नई दिल्ली में हुए एशियाई खेलों में गोल्ड मेडल जीता था, जब इस खेल को पहली बार इस कॉन्टिनेंटल इवेंट में शामिल किया गया था। इसके बाद भारत 1998 और 2018 में फ़ाइनल तक पहुँचा, लेकिन दोनों बार उसे सिल्वर मेडल से ही संतोष करना पड़ा।
मौजूदा टूर्नामेंट में भारतीय टीम का प्रदर्शन शानदार रहा। टीम ने पूल A में अपने चारों मैच जीतकर टॉप स्थान हासिल किया और फिर सेमीफ़ाइनल में जापान को 7-2 से हराया। पूल स्टेज में पाकिस्तान को 7-1 से हराने के बाद, टीम ने फ़ाइनल में भी अपना आक्रामक खेल जारी रखा।
इस गोल्ड मेडल के साथ भारत ने 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक के लिए भी अपनी जगह पक्की कर ली। यह टीम के लिए एक अतिरिक्त इनाम था, जिसने अपने आक्रामक खेल और मज़बूत डिफ़ेंस के दम पर यह शानदार सफ़र तय किया।
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