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एशियन गेम्स गोल्ड से ओलंपिक क्वालिफिकेशन का फायदा

Kavita2
3 July 2026 1:46 PM IST
एशियन गेम्स गोल्ड से ओलंपिक क्वालिफिकेशन का फायदा
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बेंगलुरु : अगर एशियन गेम्स में गोल्ड जीतने का मतलब हॉकी टीमों के लिए सीधे अगले ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करना है, तो यह किसी भी टीम के लिए बड़ी उपलब्धि के साथ-साथ लंबी तैयारी का सुनहरा अवसर भी बन जाता है। इसी संदर्भ में भारतीय महिला हॉकी टीम के हेड कोच शोर्ड मारिन ने तैयारी और समय प्रबंधन को लेकर महत्वपूर्ण बातें साझा कीं।

भारतीय महिला हॉकी टीम के मुख्य कोच शोर्ड मारिन, जो हाल ही में न्यूज़ीलैंड में नेशन्स कप जीतने के बाद टीम के साथ बेंगलुरु लौटे हैं, का मानना है कि ओलंपिक के लिए सीधे क्वालिफिकेशन मिलने से टीम को अपनी तैयारी को लंबे समय तक बेहतर ढंग से ढालने का मौका मिलता है। उनका कहना है कि यह समय खिलाड़ियों की स्किल डेवलपमेंट, फिटनेस और टीम कॉम्बिनेशन को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाता है।

गुरुवार को वर्ल्ड स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट्स डे के अवसर पर KSBA में स्पोर्ट्स राइटर्स एसोसिएशन ऑफ़ बैंगलोर द्वारा आयोजित एक बातचीत के दौरान उन्होंने टीम की रणनीति और भविष्य की तैयारियों पर विस्तार से चर्चा की। इस कार्यक्रम में खेल पत्रकारों और विशेषज्ञों की मौजूदगी रही, जहां हॉकी के वर्तमान और भविष्य को लेकर विचार साझा किए गए।

डच कोच शोर्ड मारिन ने बातचीत के दौरान कहा कि अगर किसी टीम को पहले ही ओलंपिक का टिकट मिल जाए, तो उसका सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि उसके पास तैयारी के लिए पर्याप्त समय होता है। उन्होंने कहा, “इसका फायदा यह है कि इससे आपको तैयारी के लिए बहुत समय मिलता है।” उनके अनुसार यह समय टीम को कमजोरियों पर काम करने और नई रणनीतियों को विकसित करने का अवसर देता है।

भारतीय महिला हॉकी टीम ने हाल के वर्षों में लगातार बेहतर प्रदर्शन किया है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बनाई है। नेशन्स कप में मिली जीत को भी टीम के आत्मविश्वास के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा है। कोच मारिन के अनुसार, इस तरह की जीतें खिलाड़ियों के मानसिक संतुलन और बड़े टूर्नामेंट्स में प्रदर्शन को और बेहतर बनाती हैं।

एशियन गेम्स जैसे बड़े आयोजनों में गोल्ड मेडल जीतना न केवल सम्मान की बात होती है, बल्कि यह टीम को सीधे ओलंपिक जैसे वैश्विक मंच पर पहुंचा देता है। इससे टीमों को क्वालिफिकेशन टूर्नामेंट के दबाव से भी राहत मिलती है और वे लंबे समय तक योजनाबद्ध तरीके से तैयारी कर पाती हैं।

भारतीय महिला हॉकी टीम के लिए यह समय बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि आने वाले वर्षों में ओलंपिक की तैयारियों को ध्यान में रखते हुए टीम को अपनी रणनीति को और मजबूत करना होगा। कोच मारिन का फोकस खिलाड़ियों की फिटनेस, तकनीकी सुधार और मैच सिचुएशन में निर्णय लेने की क्षमता को बेहतर बनाने पर है।

विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय की तैयारी किसी भी टीम को मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत बनाती है। इससे खिलाड़ी दबाव की स्थिति में बेहतर प्रदर्शन कर पाते हैं और बड़े मैचों में स्थिरता बनाए रखते हैं।

कोच मारिन ने यह भी संकेत दिया कि टीम का लक्ष्य केवल क्वालिफाई करना नहीं, बल्कि ओलंपिक में प्रतिस्पर्धी प्रदर्शन करना है। इसके लिए लगातार अंतरराष्ट्रीय मैच, ट्रेनिंग कैंप और रणनीतिक बदलावों पर काम किया जा रहा है।

भारतीय महिला हॉकी टीम ने पिछले कुछ वर्षों में जिस तरह से प्रगति की है, उसने यह साबित किया है कि सही मार्गदर्शन और निरंतर प्रयास से किसी भी स्तर पर सफलता हासिल की जा सकती है। अब टीम का अगला लक्ष्य अपनी इस लय को बनाए रखते हुए ओलंपिक में मजबूत चुनौती पेश करना है।

फिलहाल टीम प्रबंधन और कोचिंग स्टाफ का पूरा ध्यान खिलाड़ियों की तैयारी और प्रदर्शन को और निखारने पर है, ताकि आने वाले बड़े टूर्नामेंट्स में भारत एक मजबूत दावेदार के रूप में उतर सके।

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