खेल
अरुणाचल के पहले रणजी मैच पर संकट, खिलाड़ियों की कमी और संघ में गुटबाजी
Ashish verma
9 Oct 2026 12:22 PM IST

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Ranji match : अरुणाचल प्रदेश की क्रिकेट टीम के रणजी ट्रॉफी अभियान पर शुरुआत से पहले ही संकट मंडराने लगा है। राज्य क्रिकेट संघ के भीतर चल रही गुटबाजी और उससे जुड़े न्यायिक विवाद के कारण टीम चयन की प्रक्रिया अटक गई है। अरुणाचल प्रदेश को 11 अक्टूबर से अहमदाबाद में नागालैंड के खिलाफ अपना शुरुआती मुकाबला खेलना है, लेकिन खिलाड़ियों को मैदान में उतारने की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। संघ का प्रशासनिक कामकाज बाधित होने से इस महत्वपूर्ण घरेलू प्रतियोगिता में राज्य की भागीदारी पर सवाल खड़े हो गए हैं।
इस संकट के केंद्र में खिलाड़ियों की कमी से अधिक टीम गठित करने और चयन संबंधी निर्णय लेने की समस्या है। संघ में फिलहाल ऐसी कार्यरत व्यवस्था नहीं है, जो खिलाड़ियों के चयन और उन्हें मैच के लिए भेजने पर फैसला कर सके। इस सत्र में अरुणाचल प्रदेश का प्रतिनिधित्व करने के लिए अनुबंधित पेशेवर खिलाड़ी भी असमंजस में हैं। उन्हें यह स्पष्ट सूचना नहीं मिली है कि शुरुआती रणजी मुकाबले के लिए अहमदाबाद पहुंचना है या नहीं। मुकाबले की तारीख नजदीक आने के बावजूद यह अनिश्चितता बनी हुई है।
राज्य क्रिकेट संघ के चुनाव को लेकर शुरू हुआ विवाद अदालत तक पहुंच चुका है। नबाम विवेक के अध्यक्ष चुने जाने के बाद कई जिला संघों ने चुनाव प्रक्रिया में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की। इसी विवाद के कारण संघ के संचालन और निर्णय लेने की प्रक्रिया प्रभावित हुई है। मामले की सुनवाई गुवाहाटी हाईकोर्ट की ईटानगर पीठ में हुई है और निर्णय का इंतजार है। चुनाव संबंधी आरोपों पर अंतिम न्यायिक फैसला आने से पहले किसी पक्ष के दावे को सही या गलत घोषित नहीं किया जा सकता।
चुनाव प्रक्रिया पर आपत्ति उठाने वाले छह जिला निकायों में लोअर सियांग, अपर सुबनसिरी, कमले, तवांग, वेस्ट सियांग और पापुम पारे शामिल हैं। इन निकायों ने नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए नए चुनाव कराने की मांग की थी। अध्यक्ष और अन्य पदाधिकारियों के खिलाफ उठे विवाद के बाद अदालत ने संघ के कामकाज पर अंतरिम रोक लगाई। इसके चलते प्रशासनिक गतिरोध का असर राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए टीम तैयार करने पर भी पड़ा है। अब विवाद का समाधान और क्रिकेट गतिविधियों का संचालन, दोनों न्यायिक स्थिति से जुड़े हुए हैं।
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के सचिव देवजीत सैकिया ने भी इस गतिरोध की पुष्टि की है। उनके मुताबिक, राज्य संघ के दो गुटों के बीच विवाद अदालत में लंबित है और संघ के संचालन पर रोक के कारण कोई कार्यरत पदाधिकारी व्यवस्था उपलब्ध नहीं है। उन्होंने बताया कि मामले की सुनवाई सितंबर के पहले सप्ताह में हुई थी, लेकिन फैसला अभी नहीं आया है। इस स्थिति में टीम गठित करने की तैयारी नहीं हो सकी। सैकिया के बयान से स्पष्ट है कि मैदान पर दिखने वाला संकट संघ के भीतर लंबे समय से जारी प्रशासनिक बाधा का परिणाम है।
इस विवाद का असर केवल सीनियर पुरुष टीम तक सीमित नहीं रहा है। अरुणाचल प्रदेश की अंडर-19 टीम भी वीनू मांकड़ ट्रॉफी के लिए मैदान में नहीं उतर सकी। राज्य को गुरुवार को भुवनेश्वर के केआईआईटी क्रिकेट स्टेडियम में सिक्किम के खिलाफ अपना अभियान शुरू करना था। हालांकि, संघ की कार्यप्रणाली पर रोक और टीम तैयार नहीं होने के कारण उसकी भागीदारी बाधित हुई। जूनियर प्रतियोगिता में सामने आया यह घटनाक्रम रणजी ट्रॉफी से पहले राज्य क्रिकेट की कठिन स्थिति को दर्शाता है।
अंडर-19 महिला टी-20 ट्रॉफी में भागीदारी भी इस न्यायिक और प्रशासनिक विवाद से प्रभावित हुई है। इस तरह अलग-अलग आयु वर्ग के खिलाड़ियों के सामने राज्य का प्रतिनिधित्व करने की समस्या खड़ी हो गई है। टीम चयन की जिम्मेदारी संभालने वाला अधिकृत निकाय उपलब्ध नहीं होने से प्रतियोगिताओं में प्रवेश की प्रक्रिया बाधित है। खिलाड़ियों की तैयारी और संघ की प्रशासनिक स्थिति के बीच पैदा हुए इस अंतर का असर उनके खेलने के अवसरों पर पड़ रहा है। फिलहाल समाधान के लिए अदालत के लंबित निर्णय पर निगाहें टिकी हैं।
बीसीसीआई के सामने भी सीधे हस्तक्षेप करने की सीमा है। सैकिया के अनुसार, अदालत की रोक के रहते बोर्ड राज्य संघ में अपनी ओर से व्यवस्था लागू नहीं कर सकता। बिहार में स्वतंत्र चयन समितियां बनाने जैसी व्यवस्था अरुणाचल प्रदेश में फिलहाल नहीं अपनाई जा सकी है। नबाम विवेक ने भी कहा है कि अदालत की अनुमति के बिना टीम उतारना न्यायिक आदेश के उल्लंघन का मामला बन सकता है। उनके मुताबिक, संघ ने वास्तविक स्थिति से बीसीसीआई को अवगत कराया है और अंतरिम आदेश या अंतिम फैसले का इंतजार कर रहा है।
अब अरुणाचल प्रदेश के सामने तत्काल चुनौती नागालैंड के खिलाफ शुरुआती मुकाबले में टीम उतारने की है। चयन शिविर और सत्र की तैयारियां प्रभावित होने के बाद भागीदारी सुनिश्चित करना कठिन बना हुआ है। हालांकि, रणजी मुकाबले से बाहर होने का अंतिम निर्णय अभी घोषित नहीं हुआ है। फिलहाल स्थिति अनिश्चित है और अदालत से मिलने वाली अनुमति महत्वपूर्ण होगी। संघ के भीतर शुरू हुई खींचतान राष्ट्रीय घरेलू क्रिकेट में राज्य की मौजूदगी को प्रभावित कर रही है, जबकि खिलाड़ियों को अपनी टीम की स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार है।
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