खेल

ट्रॉफी विवाद के बीच 2022 का किस्सा वायरल नकवी पर बढ़े सवाल

nidhi
14 Sept 2026 2:54 PM IST
ट्रॉफी विवाद के बीच 2022 का किस्सा वायरल नकवी पर बढ़े सवाल
x
ट्रॉफी विवाद में अब नकवी से तुलना
नई दिल्ली: एशिया कप की ट्रॉफी को लेकर भारत और एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) के अध्यक्ष मोहसिन नकवी के बीच पैदा हुआ विवाद एक बार फिर चर्चा में है। अब इस मामले में 2022 के एशिया कप का उदाहरण सामने लाते हुए नकवी के रवैये पर सवाल उठाए जा रहे हैं। उस समय ACC के अध्यक्ष जय शाह थे, लेकिन विजेता टीम को ट्रॉफी सौंपने की व्यवस्था को लेकर अपनाए गए तरीके की तुलना मौजूदा विवाद से की जा रही है।
ताजा विवाद में भारतीय टीम के मोहसिन नकवी से ट्रॉफी स्वीकार नहीं करने के बाद प्रेजेंटेशन सेरेमनी चर्चा का केंद्र बन गई। भारत की ओर से नकवी के हाथों ट्रॉफी नहीं लेने के रुख के बाद सवाल यह उठा कि क्या ऐसी स्थिति में ट्रॉफी किसी दूसरे अधिकारी से दिलवाई जा सकती थी।
क्यों याद आया 2022 का एशिया कप?
सोशल मीडिया और क्रिकेट से जुड़ी चर्चाओं में 2022 के एशिया कप का उदाहरण दिया जा रहा है। उस समय जय शाह एशियन क्रिकेट काउंसिल के अध्यक्ष थे। श्रीलंका ने फाइनल में पाकिस्तान को हराकर खिताब जीता था।
पुराने उदाहरण को सामने रखकर दावा किया जा रहा है कि ACC अध्यक्ष होने का अर्थ यह नहीं है कि विजेता टीम को ट्रॉफी उसी व्यक्ति के हाथों लेना अनिवार्य हो। इसी आधार पर मौजूदा मामले में सवाल उठ रहा है कि अगर भारतीय टीम नकवी से ट्रॉफी नहीं लेना चाहती थी तो किसी अन्य अधिकृत पदाधिकारी के जरिए पुरस्कार वितरण क्यों नहीं कराया गया।
हालांकि 2022 के पुरस्कार वितरण की पूरी आधिकारिक प्रक्रिया और ट्रॉफी किस अधिकारी ने सौंपी थी, इसका रिकॉर्ड देखकर ही दोनों घटनाओं की सटीक तुलना की जानी चाहिए।
नकवी के रवैये पर उठे सवाल
मोहसिन नकवी पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड से भी जुड़े प्रमुख अधिकारी हैं। भारत-पाकिस्तान के बीच राजनीतिक तनाव के कारण उनके हाथों ट्रॉफी लेने का मुद्दा सिर्फ खेल तक सीमित नहीं रहा और इस पर दोनों देशों के प्रशंसकों के बीच तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।
आलोचकों का कहना है कि किसी अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट के पुरस्कार वितरण में खिलाड़ियों और विजेता टीम को प्राथमिकता दी जानी चाहिए और अगर किसी पदाधिकारी को लेकर आपत्ति हो तो वैकल्पिक व्यवस्था संभव होनी चाहिए।
भारत ने खिताब जीता लेकिन ट्रॉफी बनी विवाद
भारतीय टीम के मैदान पर खिताब जीतने के बावजूद ट्रॉफी प्रेजेंटेशन का विवाद मैच के नतीजे पर भारी पड़ता दिखाई दिया। सोशल मीडिया पर प्रशंसकों ने सवाल किया कि विजेता टीम को ट्रॉफी दिए बिना समारोह समाप्त होने की स्थिति क्यों बनी।
वहीं कुछ लोगों का मानना है कि खेल संस्थाओं के प्रोटोकॉल और अधिकारियों की भूमिकाओं को भी ध्यान में रखना चाहिए। इसलिए पूरे मामले में ACC की आधिकारिक स्थिति महत्वपूर्ण है।
पुराने उदाहरण से नई बहस
जय शाह के कार्यकाल के 2022 एशिया कप का उदाहरण सामने आने के बाद बहस अब इस बात पर केंद्रित हो गई है कि क्या मौजूदा विवाद को आसानी से टाला जा सकता था। यदि नियम किसी दूसरे अधिकारी को ट्रॉफी सौंपने से नहीं रोकते थे तो वैकल्पिक व्यवस्था नहीं किए जाने पर सवाल स्वाभाविक हैं।
फिलहाल इस तुलना से मोहसिन नकवी को लेकर बहस और तेज हो गई है। हालांकि 2022 और 2026 की परिस्थितियों तथा ACC के प्रोटोकॉल में क्या अंतर था, इसकी आधिकारिक पुष्टि के बिना किसी एक पक्ष को पूरी तरह जिम्मेदार ठहराना जल्दबाजी होगी।
Next Story