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गोल्ड जीतते ही पुष्पा राणा ने उठाई आवाज
टोकाई: एशियाई खेल 2026 में भारतीय महिला कबड्डी टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया। खिताबी मुकाबले में भारत ने ईरान को 37-34 से हराकर अपना स्वर्ण पदक बरकरार रखा। इस जीत के बाद भारतीय महिला टीम की कप्तान पुष्पा राणा ने कबड्डी को कॉमनवेल्थ गेम्स और ओलंपिक खेलों में शामिल करने की मांग उठाई है।
भारत और ईरान के बीच फाइनल मुकाबला टोकाई सिटीजन जिम्नेजियम में खेला गया। मुकाबला बेहद करीबी रहा, लेकिन भारतीय खिलाड़ियों ने निर्णायक समय पर बढ़त कायम रखते हुए 37-34 से जीत दर्ज की। इसके साथ ही भारत ने महिला कबड्डी में एशियाई खेलों का अपना चौथा स्वर्ण पदक जीत लिया।
कबड्डी को मिले बड़ा वैश्विक मंच
गोल्ड मेडल जीतने के बाद पुष्पा राणा ने कहा कि कबड्डी का स्तर अब कई देशों में तेजी से बेहतर हो रहा है। उन्होंने ईरान और चीनी ताइपे जैसी टीमों के प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कहा कि दूसरे देशों में भी इस खेल का विकास हो रहा है।
पुष्पा राणा ने कहा कि उनकी इच्छा है कि कबड्डी ज्यादा से ज्यादा देशों में आगे बढ़े और भविष्य में इसे कॉमनवेल्थ गेम्स और ओलंपिक में जगह मिले। उन्होंने इसे भारतीय टीम की मांग भी बताया।
महिला प्रो कबड्डी लीग की भी उठाई मांग
भारतीय कप्तान ने महिलाओं के लिए भी पुरुषों की प्रो कबड्डी लीग की तरह एक मजबूत और पूर्ण लीग शुरू करने की जरूरत बताई। उनका कहना है कि इससे महिला खिलाड़ियों और युवा प्रतिभाओं को बड़ा मंच मिलेगा।
पुष्पा राणा के मुताबिक युवा महिला खिलाड़ियों को आगे बढ़ने के लिए उसी तरह के अवसर मिलने चाहिए, जैसे पुरुष खिलाड़ियों को प्रो कबड्डी के जरिए मिल रहे हैं।
गोल्ड जीतने का था लक्ष्य
फाइनल में जीत के बाद भारतीय कप्तान ने बताया कि टीम शुरुआत से ही गोल्ड मेडल जीतने के लक्ष्य के साथ उतरी थी। खिलाड़ियों का ध्यान हर मुकाबले को जीतने पर था और टीम ने विपक्षी टीम की ताकत के अनुसार अपनी रणनीति तैयार की।
उन्होंने माना कि भारतीय कबड्डी के शानदार रिकॉर्ड के कारण टीम पर गोल्ड जीतने का दबाव भी था। खिलाड़ियों ने हालांकि अपनी तैयारी और अभ्यास को मैदान पर सही तरीके से लागू किया और खिताब जीतने में सफलता हासिल की। पुष्पा ने इस जीत का श्रेय खिलाड़ियों के साथ कोचिंग स्टाफ, फेडरेशन और मिले समर्थन को भी दिया।
एशियाई खेलों में भारत का दबदबा
महिला कबड्डी को 2010 में एशियाई खेलों में शामिल किया गया था। भारत ने 2010 और 2014 में गोल्ड जीता, जबकि 2018 में उसे सिल्वर से संतोष करना पड़ा। इसके बाद भारतीय महिला टीम ने हांगझोऊ एशियाई खेलों में फिर गोल्ड हासिल किया था। 2026 में पुष्पा राणा की कप्तानी में टीम ने एक बार फिर स्वर्ण पदक जीतकर अपना दबदबा कायम रखा।
ओलंपिक में कबड्डी के लिए भी चल रही कोशिश
अंतरराष्ट्रीय कबड्डी महासंघ भी कबड्डी के वैश्विक विस्तार और इसे भविष्य में ओलंपिक मंच तक पहुंचाने की दिशा में प्रयास कर रहा है। सितंबर 2026 में हैदराबाद में हुई महासंघ की कार्यकारी बैठक में भी ओलंपिक में कबड्डी को शामिल कराने के लिए रणनीतिक रास्ता तैयार करने पर चर्चा हुई थी।
वहीं कॉमनवेल्थ गेम्स के मौजूदा स्पोर्ट प्रोग्राम फ्रेमवर्क में कबड्डी को कोर या वैकल्पिक खेल के रूप में सूचीबद्ध नहीं किया गया है। हालांकि मेजबान को निर्धारित नियमों के तहत अतिरिक्त खेल प्रस्तावित करने का विकल्प मिलता है।
एशियाई खेलों में एक और गोल्ड जीतने के बाद पुष्पा राणा की मांग ने कबड्डी को वैश्विक मल्टी-स्पोर्ट आयोजनों में जगह दिलाने की चर्चा को फिर आगे बढ़ाया है।
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