
Sports स्पोर्ट्स : भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व असिस्टेंट कोच अभिषेक नायर ने पूर्व कप्तान रोहित शर्मा की नेतृत्व क्षमता की जमकर तारीफ की है। नायर ने कहा कि रोहित शर्मा की सबसे बड़ी खूबी उनकी जिम्मेदारी लेने की क्षमता और खिलाड़ियों के साथ ईमानदार बातचीत के जरिए भरोसा कायम करना थी। उनके अनुसार, रोहित की कप्तानी में टीम मुश्किल समय में भी एकजुट रही और खिलाड़ियों पर दबाव कम हुआ।
नेशनल टीम के साथ अपने कार्यकाल को याद करते हुए अभिषेक नायर ने बताया कि रोहित शर्मा का नेतृत्व केवल मैदान पर फैसले लेने तक सीमित नहीं था, बल्कि वह खिलाड़ियों के मानसिक पहलुओं को भी समझते थे।
जिम्मेदारी लेने की रोहित की आदत बनी खासियत
अभिषेक नायर ने कहा कि रोहित शर्मा हमेशा टीम की जिम्मेदारी लेने के लिए आगे रहते थे। हार के बाद भी उन्होंने कभी खिलाड़ियों पर दोष डालने की कोशिश नहीं की, बल्कि खुद आलोचना झेलने को तैयार रहते थे।
नायर के अनुसार, एक कप्तान के रूप में रोहित की यह आदत उन्हें अलग बनाती थी। वह खराब प्रदर्शन के बाद भी ड्रेसिंग रूम में खिलाड़ियों का समर्थन करते थे और उन्हें आत्मविश्वास बनाए रखने में मदद करते थे।
उन्होंने कहा कि कप्तान का काम केवल जीत के समय टीम के साथ खड़ा होना नहीं होता, बल्कि मुश्किल परिस्थितियों में भी खिलाड़ियों को भरोसा देना होता है और रोहित इस भूमिका को अच्छी तरह निभाते थे।
ईमानदार बातचीत से बनाया भरोसा
पूर्व असिस्टेंट कोच ने बताया कि रोहित शर्मा खिलाड़ियों के साथ खुलकर बातचीत करते थे। वह अपनी बात साफ तरीके से रखते थे और खिलाड़ियों की परेशानियों को भी समझने की कोशिश करते थे।
नायर ने कहा कि रोहित की बातचीत करने की शैली ने टीम में विश्वास का माहौल बनाया। खिलाड़ी जानते थे कि कप्तान उनकी बात सुनेगा और जरूरत पड़ने पर उनका साथ देगा।
उन्होंने कहा कि टीम में अच्छा माहौल बनाने के लिए केवल रणनीति और तकनीक जरूरी नहीं होती, बल्कि खिलाड़ियों के बीच भरोसा भी जरूरी होता है।
प्लेयर-फर्स्ट अप्रोच की तारीफ
अभिषेक नायर ने रोहित शर्मा की प्लेयर-फर्स्ट अप्रोच को भी खास बताया। उन्होंने कहा कि रोहित हमेशा खिलाड़ियों को प्राथमिकता देते थे और उनकी जरूरतों को समझने की कोशिश करते थे।
नायर के मुताबिक, जब खिलाड़ी महसूस करते हैं कि कप्तान उनके साथ खड़ा है तो उनका आत्मविश्वास बढ़ता है। रोहित ने टीम में ऐसा ही माहौल तैयार किया, जहां खिलाड़ी खुलकर अपनी क्षमता के अनुसार प्रदर्शन कर सके।
हार के बाद भी ड्रेसिंग रूम का बचाव किया
नायर ने कहा कि रोहित शर्मा की कप्तानी की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक यह थी कि वह हार के बाद ड्रेसिंग रूम का बचाव करते थे।
उन्होंने बताया कि कई बार खराब परिणाम आने पर बाहरी दबाव बढ़ जाता है, लेकिन रोहित ने खिलाड़ियों को निशाना बनाने के बजाय खुद जिम्मेदारी लेना पसंद किया।
नायर ने कहा कि यह नेतृत्व की एक दुर्लभ गुणवत्ता है, क्योंकि कई बार कप्तान दबाव में गलत फैसले लेते हैं या खिलाड़ियों पर जिम्मेदारी डाल देते हैं। लेकिन रोहित ने हमेशा टीम को प्राथमिकता दी।
खिलाड़ियों के आत्मविश्वास को बनाए रखा
पूर्व कोच ने कहा कि रोहित शर्मा जानते थे कि क्रिकेट में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। इसलिए वह खिलाड़ियों को खराब प्रदर्शन के बाद भी सकारात्मक रहने के लिए प्रेरित करते थे।
उन्होंने कहा कि एक खिलाड़ी के लिए सबसे मुश्किल समय वह होता है जब उसका प्रदर्शन अच्छा नहीं हो रहा होता। ऐसे समय में कप्तान का समर्थन खिलाड़ी को वापसी करने में मदद करता है।
रोहित ने अपने व्यवहार से यह साबित किया कि कप्तानी केवल मैदान पर रणनीति बनाने का नाम नहीं है, बल्कि टीम के सदस्यों को मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखने की जिम्मेदारी भी है।
भारतीय क्रिकेट में रोहित का योगदान
रोहित शर्मा ने भारतीय क्रिकेट में बतौर खिलाड़ी और कप्तान महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनकी कप्तानी में टीम ने कई महत्वपूर्ण मुकाबलों में शानदार प्रदर्शन किया और कई युवा खिलाड़ियों को टीम में आगे बढ़ने का मौका मिला।
उनकी नेतृत्व शैली में आक्रामक क्रिकेट के साथ-साथ खिलाड़ियों के साथ व्यक्तिगत संबंध बनाने पर भी जोर रहा।
नायर ने साझा किया अनुभव
अभिषेक नायर ने भारतीय टीम के साथ अपने समय के अनुभव साझा करते हुए कहा कि रोहित शर्मा के साथ काम करना उनके लिए सीखने वाला अनुभव रहा।
उन्होंने कहा कि रोहित की नेतृत्व शैली में धैर्य, जिम्मेदारी और खिलाड़ियों के प्रति सम्मान साफ दिखाई देता था। यही कारण है कि हार के बावजूद टीम के अंदर सकारात्मक माहौल बना रहता था।
रोहित की कप्तानी से मिली सीख
नायर के बयान से साफ है कि रोहित शर्मा की कप्तानी का सबसे मजबूत पक्ष उनका मानवीय नजरिया था। वह केवल परिणामों पर ध्यान नहीं देते थे, बल्कि टीम के सदस्यों के आत्मविश्वास और मानसिक मजबूती को भी उतना ही महत्व देते थे।
अभिषेक नायर के अनुसार, रोहित की यही खूबियां उन्हें एक सफल कप्तान बनाती हैं और भारतीय क्रिकेट में उनकी नेतृत्व शैली को लंबे समय तक याद किया जाएगा।





