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83 के वर्ल्ड कप : भारत की जीत के बाद ब्रिटिश पत्रकार को अपने लिखे शब्दों को पड़ा था निगलना, जानें वजह

Bharti sahu
27 Dec 2021 7:07 AM GMT
83 के वर्ल्ड कप : भारत की जीत के बाद ब्रिटिश पत्रकार को अपने लिखे शब्दों को पड़ा था निगलना, जानें वजह
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कपिल देव (Kapil Dev) की कप्तानी में टीम इंडिया ने पहली बार 1983 में क्रिकेट वर्ल्ड कप (Cricket World Cup) जीता था.

कपिल देव (Kapil Dev) की कप्तानी में टीम इंडिया ने पहली बार 1983 में क्रिकेट वर्ल्ड कप (Cricket World Cup) जीता था. उस यादगार पल को फिल्म '83' ने फिर से जीवित करने की कोशिश की है. इस फिल्म ने उस मशहूर किस्से की याद भी ताजा कर दी है, जिसमें एक पत्रकार को अपने लिखे शब्दों को निगलना पड़ा था. विजडन क्रिकेट मंथली के संपादक रहे डेविड फ्रिथ (David Frith) ने टीम इंडिया को लेकर कुछ ऐसा लिख दिया था, जिसके चलते बाद में उन्हें अपने ही लिखे शब्दों को निगलना पड़ा.

World Cup से हटने की दी थी सलाह
हमारी सहयोगी वेबसाइट DNA में छपे लेख में ब्रिटिश पत्रकार डेविड फ्रिथ (David Frith) ने विस्तार से उस घटना के बारे में बताया है. उन्होंने लिखा है, 'भले ही 1983 में भारत की जीत को सालों बीत चुके हैं, लेकिन लगता है जैसे वो कल की ही बात है. उस दौर में मैं भारत के प्रदर्शन से खुश नहीं था. मैंने विजडन क्रिकेट मंथली में लिखा था कि जब तक भारत एक-दिवसीय मैच के लिए तैयार नहीं हो जाता, तब तक उसे भविष्य में होने वाले विश्व कप टूर्नामेंट से हट जाना चाहिए'.
'Team India के प्रदर्शन ने किया था मजबूर'
डेविड फ्रिथ के मुताबिक, उन्होंने जानबूझकर टीम इंडिया के लिए ऐसे शब्द नहीं लिखे थे. वो हमेशा से भारत और भारतीय क्रिकेट के प्रशंसक रहे हैं, लेकिन 83 से पहले के विश्व कप में भारत के लचर प्रदर्शन ने उन्हें तल्ख शब्द इस्तेमाल करने को मजबूर किया था. उन्होंने कहा, 'भारत के प्रदर्शन ने मुझे यह धारणा बनाने को मजबूर किया कि वो केवल टेस्ट टीम है. 1975 के वर्ल्ड कप के ओपनिंग मैच में सुनील गावस्कर ने 60 ओवर के मैच में नॉट आउट महज 36 रन बनाए थे. भारत को दो क्वालिफाइंग मैचों में हार का सामना करना पड़ा था और वो केवल ईस्ट अफ्रीका से जीत पाया था'.
क्वालिफाइंग मैचों में भारत को मिली थी हार
उन्होंने आगे लिखा है कि 1979 में भी टीम इंडिया को तीनों क्वालिफाइंग मैचों में हार का सामना करना पड़ा था. ऐसे में मैंने जो कुछ लिखा, वो सिर्फ और सिर्फ टीम के प्रदर्शन पर आधारित था. मैं क्या कोई भी ये नहीं सोच सकता था कि उस दौर की भारतीय टीम वर्ल्ड कप जीत सकती है. कपिल देव की अगुवाई में जब भारत ने वर्ल्ड कप जीता, तो खुशी के साथ हैरानी भी थी'.
'सबसे कमजोर टीम बनी सबसे मजबूत दावेदार'
जिम्बाब्वे के खिलाफ जब कपिल देव ने नाबाद 175 रनों की पारी खेलकर टीम की जीत का मार्ग सुनिश्चित किया, तब भारत के फैंस को आस जगी. इसके बाद टीम इंडिया ने ऑस्ट्रेलिया को मात देकर सेमी-फाइनल में जगह बनाई और तब मुझे अहसास हुआ कि सबसे कमजोर मानी जा रही भारतीय टीम वर्ल्ड कप के मजबूत दावेदार के रूप में सामने आई है. ओल्ड ट्रैफर्ड के सेमीफाइनल में जब कपिल के लड़ाकों ने इंग्लैंड को पटखनी दी, तो किसी को विश्वास ही नहीं हुआ. अब सबके साथ मेरी निगाहें भी फाइनल पर टिकी हुईं थीं, क्योंकि वहां कपिल देव को Clive Lloyd की टीम से भिड़ना था.
होटल में भांगड़ा कर रहे थे Kapil Dev
डेविड फ्रिथ ने लिखा कि टीम इंडिया ने वर्ल्ड कप के फाइनल में वेस्ट इंडीज को शिकस्त देकर जिस तरह कप अपने नाम किया उसकी कल्पना शायद ही किसी ने की हो. भारत की ऐतिहासिक जीत के बाद जब मैं होटल गया तो खिलाड़ी अपने प्रशंसकों से घिरे हुए थे और सबके आकर्षण का केंद्र थे कपिल देव, जो भांगड़ा करके अपने खुशी बयां कर रहे थे. मैंने सभी खिलाड़ियों से मुलाकात थी. मुझे यह भी अहसास था कि वो शायद मुझसे खुश न हों.
पत्र लिखकर दी थी पत्रकार को चुनौती
डेविड फ्रिथ ने बताया कि भारत की जीत के बाद उन्हें न्यू जर्सी में रहने वाले एक इंडियन जेंटलमैन का पत्र मिला. उस पत्र में मेरे पुराने लेख का हवाला देते हुए मुझे अपने लिखे शब्दों को निगलने की चुनौती दी गई थी. मुझे भले ही किसी भी रूप में देखा जाता हो, लेकिन मैं खेल के प्रति समर्पित एक ऐसा पत्रकार रहा जिसे अपने विचारों को दुरुस्त करने में कोई समस्या नहीं था. इसलिए मैंने उस चुनौती को स्वीकार कर लिया. पत्र के बाद टीम इंडिया की एतिहासिक जीत का मुझे एक ही मतलब नजर आ रहा था और वो ये कि मुझे अपने प्रकाशित लेख को अपना भोजन बनाना था.
एक हाथ में वाइन दूसरे में अखबार
फ्रिथ ने लिखा, 'मैं जानता था कि न्यूजप्रिंट खाना सेहत के लिए अच्छा तो बिल्कुल नहीं होगा, लेकिन मैं इसके लिए तैयार हो गया. मैं लॉर्ड के प्रेस बॉक्स में बैठा. मेरे एक हाथ में रेड वाइन का ग्लास था और दूसरे में मेरे लेख की प्रकाशित कॉपी, मैं धीरे-धीरे उसे निगल गया. मुझे लगा कि शायद मैंने वो शब्द इसीलिए लिखे थे कि भारतीय टीम उसे गलत साबित करने के लिए जी -तोड़ मेहनत करेगी'.


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