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FIFA वर्ल्ड कप में भारतीय मूल के 4 खिलाड़ी अलग देशों की टीम में

Kavita2
11 Jun 2026 1:48 PM IST
FIFA वर्ल्ड कप में भारतीय मूल के 4 खिलाड़ी अलग देशों की टीम में
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Sports स्पोर्ट्स: भारत में प्रवासी समुदाय की उपलब्धियों का जश्न अक्सर बड़े गर्व के साथ मनाया जाता है, चाहे वह कारोबार, विज्ञान, शिक्षा या खेल का क्षेत्र हो। अब इस सूची में एक बार फिर फुटबॉल का नाम जुड़ गया है, क्योंकि FIFA वर्ल्ड कप में इस बार भारतीय मूल के चार खिलाड़ी अलग-अलग देशों की टीमों का हिस्सा बनकर मैदान में उतरेंगे।

हालांकि पुरुषों की FIFA वर्ल्ड रैंकिंग में भारत फिलहाल 139वें स्थान पर है और राष्ट्रीय टीम इस बड़े टूर्नामेंट की दौड़ से बाहर है, लेकिन वैश्विक स्तर पर भारतीय मूल के खिलाड़ियों की मौजूदगी ने एक अलग तरह की चर्चा को जन्म दिया है। इस बार वर्ल्ड कप में चार ऐसे खिलाड़ी शामिल हैं जिनकी जड़ें भारत से जुड़ी हैं और जो अपने-अपने देशों का प्रतिनिधित्व करेंगे।

इन खिलाड़ियों में सरप्रीत सिंह (न्यूज़ीलैंड), निशान वेलुपिल्ले (ऑस्ट्रेलिया), सैमुअल माउटौसामी (डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो) और तहसीन मोहम्मद जमशीद (कतर) शामिल हैं। ये सभी खिलाड़ी अलग-अलग फुटबॉल सिस्टम और देशों में विकसित हुए हैं, लेकिन इनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि भारत से जुड़ी हुई है।

सरप्रीत सिंह न्यूज़ीलैंड की राष्ट्रीय टीम का हिस्सा हैं और मिडफील्ड में अपनी तकनीक और खेल समझ के लिए जाने जाते हैं। वहीं निशान वेलुपिल्ले ऑस्ट्रेलिया की टीम से खेलते हैं और डिफेंस लाइन में मजबूत उपस्थिति रखते हैं। सैमुअल माउटौसामी डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो की टीम के महत्वपूर्ण खिलाड़ी हैं, जबकि तहसीन मोहम्मद जमशीद कतर की टीम में अपनी भूमिका निभा रहे हैं।

फुटबॉल विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर भारतीय मूल के खिलाड़ियों की मौजूदगी इस बात का संकेत है कि प्रवासी समुदाय खेलों में लगातार आगे बढ़ रहा है। यह भी माना जा रहा है कि ऐसे खिलाड़ी आने वाले समय में भारत के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बन सकते हैं।

इस बीच, वर्ल्ड कप जैसे बड़े मंच पर भारतीय मूल के खिलाड़ियों की भागीदारी ने सोशल मीडिया पर भी चर्चा तेज कर दी है। कई लोग इसे भारत के वैश्विक प्रभाव और प्रवासी प्रतिभा की सफलता के रूप में देख रहे हैं।

हालांकि भारत की राष्ट्रीय टीम अभी तक इस स्तर तक नहीं पहुंच पाई है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यदि देश में फुटबॉल इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्रासरूट लेवल पर निवेश बढ़ाया जाए, तो भविष्य में भारत भी ऐसे बड़े टूर्नामेंट में अपनी जगह बना सकता है।

इस बार का FIFA वर्ल्ड कप केवल खेल का आयोजन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक जुड़ाव और वैश्विक पहचान का भी प्रतीक बनता दिख रहा है, जिसमें भारतीय मूल के खिलाड़ियों की मौजूदगी इसे और खास बना रही है।

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