विज्ञान

कब रुकेगा पृथ्वी का घूमना, जानें फिर क्या होगा इसका प्रभाव

Tara Tandi
27 March 2022 4:02 AM GMT
कब रुकेगा पृथ्वी का घूमना, जानें फिर क्या होगा इसका प्रभाव
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कब रुकेगा पृथ्वी का घूमना, जानें फिर क्या होगा इसका प्रभाव

अंतरिक्ष (Space) की बहुत सी घटनाओं की व्याख्या हो चुकी हैं और लेकिन बहुत सी या शायद उससे ज्यादा घटनाओं की व्याख्या अभी नहीं हो सकी है.

जनता से रिश्ता वेबडेस्क। अंतरिक्ष (Space) की बहुत सी घटनाओं की व्याख्या हो चुकी हैं और लेकिन बहुत सी या शायद उससे ज्यादा घटनाओं की व्याख्या अभी नहीं हो सकी है. कई हो चुकी घटनाओं को वैज्ञानिक फिर से नहीं देख पाए हैं लेकिन फिर भी उनकी व्याख्या करने का प्रयास भी करते हैं. ब्लैक होल कैसे बना, ब्रह्माण्ड की शुरुआत कैसे हुई, ऐसे कई सवाल हैं जो इंसानी के जेहन में पैदा होते हैं और वैज्ञानिक इसका जवाब देने का प्रयास करते हैं. ऐसा ही एक सवाल है कि क्या पृथ्वी का घूमना (Rotation of Earth) रुक सकता है और क्या होगा जब ऐसा होगा. आइए जानते हैं कि इस बारे में विज्ञान क्या कहता है What does Science Say).

शुरू से घूम रही है पृथ्वी
पृथ्वी का निर्माण साढ़े चार साल पहले हुआ था और उसके बाद से यह घूम ही रही है और इसके साथ ही वह सूर्य का चक्कर भी लगा रही है. इस अनोखे ग्रह का निर्माण सौरमंडल में फैली धूल और गैसे के अवशेषों से हुआ था जो एक डिस्क के रूप में सूर्य का चक्कर लगा रहे थे. इन्हीं से धीरे धीरे पृथ्वी सहित दूसरे ग्रहों का निर्माण हुआ और तब से पृथ्वी घूम ही रही है.
एक दिन लगता है पूरा घूमने में
पृथ्वी अपने धूरी पर घूमते हुए एक चक्कर 23 घंटे और 56 मिनट का समय लगाती है और इस दौरान वह सूर्य की कक्षा में थोड़ा सा आगे भी बढ़ जाती है. जिसे पूरा करने में उसे एक साल लगता है. यानि इसे अपना पूरा चक्कर लगाने में कुल 24 घंटे लगते हैं. अगर यह घूर्णन रुक गया तो 24 घंटे में होने वाली बहुत सारी घटनाएं होना बंद हो सकती हैं.
कोई रोकने वाला नहीं
पृथ्वी के लगातार घूमने की सबसे बड़ी वजह यही है कि इसे रोकने वाला कोई बल नहीं है. अगर आप हवा में हलकी गेंद को घुमते हुए फेंकेंगे तो बहुत संभव है कि वह जमीन पर आने से पहले ही घूमना बंद हो जाएगी क्योंकि उसकी सतह पर हवा का विपरीत बल लग रहा है जिसके घर्षण के कारण वह ज्यादा देर घूम नहीं पाएगी. लेकिन पृथ्वी के साथ ऐसा कुछ नहीं है
चंद्रमा का एक प्रभाव
पृथ्वी खाली अंतरिक्ष में घूम रही है और उसके साथ किसी तरह का घर्षण बल नहीं लग रहा है. लेकिन फिर भी उसे एक चीज धीमी जरूर कर रही है वह है चंद्रमा. गुरुत्व की वजह से पृथ्वी की ओर का चंद्रमा का हिस्सा और चंद्रमा की ओर का पृथ्वी का हिस्सा सटीक रूप संतुलित नहीं होते हैं इसकी नतीजे में होत यह है कि पृथ्वी पर ज्वार भाटा का प्रभाव होता है इससे महासागर पृथ्वी के दोनों ओर फूले हुए से दिखाई देते हैं.
कोई दूसरा ग्रह?
लेकिन यह प्रभाव बड़ा नहीं है. यह पृथ्वी को घूर्णन पर घर्षण का काम तो करता है और घूर्णन को धीमा भी करता है, लेकिन यह इतना छोटा है कि यह पृथ्वी के एक दिन की लंबाई को 50 हजार साल में एक ही सेकंड तक कम कर पाता है. इसके अलावा पृथ्वी और चंद्रमा की दूरी हर साल कुछ सेंटीमीटर बढ़ती भी जा रही है. ऐसे में इस प्रभाव के बढ़ने के संभावना कम ही है. ऐसे में पृथ्वी को दूसरे ग्रह या पिंड से टकराव ही रोक सकता है कोई विशालकाय क्षुद्रग्रह यह काम कर सकता है. लकिन वह या कोई ग्रह केवल पृथ्वी के घूर्णन को बदल ही पाएगा उसे रोक नहीं पाएगा.
तो क्या होगा घूर्णन बंद होने पर
फिर भी वैज्ञानिकों ने यह आंकलन भी किया है कि क्या होगा अगर पृथ्वी घूमना बंद करदे. ऐसे में हम जब जो उसके साथ घूम रहे हैं अचानक अंतरिक्ष में नहीं फेंके जाने लगेंगे क्योंकि पृथ्वी का गुरुत्व अपना काम करता रहेगा. ऐसी हालत दिन और रात आधे-आधे साल के हो जाएंगे. दिन ज्यादा गर्म होगा और रात ज्यादा ठंडी होने लगेगी.
हवाओं में होगा बदलाव
घूर्णन रुकने से जलवायु में बहुत बड़े बड़े बदलाव दिखने लगेंगे. हवाओं के बहाव में भी बदलाव होगा. जहां हवा के बहाव के कारण घूर्णन होता था, अब दिन रात के तापमान उसकी वजह होंगे. इसके साथ ही भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर हवाएं बहेंगी. पूर्व से पश्चिम और उसकी उल्टी दिशाओं में बहने वाली हवाओं में भी बदलाव देखन को मिलेगा.
एक और असर पृथ्वी के मैग्नेटिक फील्ड पर होगा. पृथ्वी के घूमने से उसके क्रोड़ में मौजूद पिघला लोहा मैग्नेट बनता है जिससे मैग्नेटिक फील्ड के रूप में रक्षा कवच बनता है. इसी कवच के कारण सूर्य और सुदूर अंतरिक्ष से आने वाले हानिकारक विकिरण पृथ्वी की सतह तक नहीं पहुंच पाते हैं. जब यह विकिरण पृथ्वी के वायुमंडल से टकराते हैं तब ध्रुवों पर ऑरोर दिखाई देते हैं. पृथ्वी का घूर्णन बंद होने के साथ यह सब बंद हो जाएगा और लोग कॉस्मिक विकिरणों से बीमार होने लगेंगे.


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