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कब छपा था पहला कार्टून, प्रागैतिहासिक काल के पत्थरों पर बनी थी आकृति

Tulsi Rao
25 April 2022 12:24 PM IST
कब छपा था पहला कार्टून, प्रागैतिहासिक काल के पत्थरों पर बनी थी आकृति
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जनता से रिश्ता वेबडेस्क। अगर आपको लगता है कि दुनिया में एनिमेटेड तस्वीरें पहली बार 19वीं सदी के अंत में आईं थीं, तो हम आपको बता दें कि जानवरों की एनिमेटेड तस्वीरें हजारों साल पहले ही पत्थरों पर उकेर दी गई थीं. एक नए शोध से पता चला है कि इन पत्थरों को आग के चारों तरफ रखा जाता था, ताकि वे आग की झिलमिलाती रौशनी में एनिमेटेड दिखें

शोध से यह भी पता चलता है कि परिवार का आग के चारों ओर बैठना उस दौर में काफी प्रचलित रहा होगा, जैसा कि उकेरे गए चित्रों से पता चलता है. शोध से पता चलता है कि प्राचीन गुफाओं की दीवार पर पाई जाने वाली कुछ पेंटिंग और नक्काशियां, रौशनी और आग की छाया में चलती हुई या एनिमेटिड लगती हैं.
यह स्टडी PLOS ONE जर्नल में पब्लिश की गई है. इसके लेखक हैं लंदन की यॉर्क यूनिवर्सिटी के पुरातत्वविद् एंडी नीधम. उनका कहना है कि जब रौशनी पत्थर की सतह पर पड़ती है, तो अचानक सभी जानवर हिलने लगते हैं. वे झिलमिलाना शुरू कर देते हैं. शोध में बताया गया है कि दक्षिणी फ्रांस में एक प्रागैतिहासिक जगह पर, चूना पत्थर (लाइमस्टोन) की सपाट चट्टानों पर कुछ जानवरों के चित्र उकेरे गए और बाद में उनके आस-पास आग की रौशनी की गई
शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में लिखा है कि उकेरे गए पत्थर और आग की रोशनी से चित्र जीवंत और गतिशील लगते हैं. इससे पता चलता है कि चलन में रहा होगा. नीधम और उनके सहयोगियों ने 50 लाइम स्टोन पट्टियों का अध्ययन करने के लिए, आधुनिक स्कैनिंग टेक्नोलॉजी और वर्चुअल रियलिटी का इस्तेमाल किया. इन पत्थरों की खुदाई 19वीं शताब्दी के मध्य में, दक्षिणी फ्रांस में मोंटैस्ट्रक रॉक शेल्टर
इस समय ये ब्रिटिश संग्रहालय में रखे गए हैं. इन पट्टियों पर जंगली जानवरों की 77 नक्काशिंयां बनी हुई हैं. इन जानवरों में घोड़े, चामो, बारहसिंगा और बाइसन शामिल हैं. वैज्ञानिकों का मानना ​​है कि इंसानों ने 12,000 से 16,000 साल पहले, लेट अपर पैलियोलिथिक काल ( Late Upper Paleolithic period) के मैग्डालेनियन युग के दौरान ये नक्काशी की थी
नीधम को पता लगा कि कई पट्टिकाएं आग से खराब भी हो गई थीं. कुछ पर सफेद राख की परतें दिख रही थीं, बाकी गर्मी से झुलस गई थीं या टूट गई थीं. उन्होंने कहा कि ऐसा भी देखा गया है कि एक ही जानवर के ऊपर ही दूसरे जानवर के चित्र को उकेरा गया था. कभी-कभी जानवर के शरीर के अंगों को रीसाइकिल किया जाता था, जैसे कि एक पट्टी में एक घोड़े और एक बोविड (कुछ तरह का जंगली जानवर) दोनों को दिखाता है.
घोड़े का पेट और गर्दन बोविड की पीठ और गर्दन बना हुआ दिखता है, जबकि घोड़े का सिर, बोविड का कान बन जाता है. जानवरों को चित्रित करने में कलात्मक कौशल साफ तौर पर दिखाई देता है. यानी ये तस्वीरें अलग-अलग लोगों द्वारा बनाई हुई हैं, जिनमें कुछ बेहद खूबसूरत हैं. अध्ययन में कहा गया है तकि जानवरों को पत्थरों पर तराशने और फिर उन्हें एनिमेट करने के लिए आग के चारों ओर रखने की प्रथा, एक सामाजिक गतिविधि हो सकती है.


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