विज्ञान

UN का रिपोर्ट! कुछ साल बाद 1.5 डिग्री सेल्सियस बढ़ सकता है धरती का तापमान

Triveni
28 May 2021 5:32 AM GMT
UN का रिपोर्ट! कुछ साल बाद 1.5 डिग्री सेल्सियस बढ़ सकता है धरती का तापमान
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संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में में चेतावनी दी गई है कि अगले पांच साल में धरती का तापमान अस्थायी रूप से 1.5 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है।

जनता से रिश्ता वेबडेस्क| संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में में चेतावनी दी गई है कि अगले पांच साल में धरती का तापमान अस्थायी रूप से 1.5 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है। बुधवार को जारी इस रिपोर्ट में बताया गया है कि अब 40 फीसदी संभावना है कि अगले पांच वर्षों में वैश्विक तापमान अस्थायी रूप से पूर्व-औद्योगिक स्तर से 1.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाएगा। साथ में यह भी कहा गया है कि संभावना का प्रतिशत साल दर साल तेजी से बढ़ रहा है।

दुनिया पहले से ही पेरिस जलवायु समझौते में निर्धारित दीर्घकालिक वार्मिंग 1.5-डिग्री सीमा को पार कर रही है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि यह जलवायु परिवर्तन के सबसे विनाशकारी प्रभावों से बचने के लिए अंतिम सीमा है। पेरिस समझौते का लक्ष्य एक साल के बजाय 30 साल के औसत से अधिक तापमान को देखना है।
तापमान बढ़ने के दिखेंगे विनाशकारी परिणाम
जैसे-जैसे तापमान बढ़ता है, वाष्पीकरण की दर बढ़ती है और गर्म हवा अधिक नमी धारण कर सकती है। जलवायु परिवर्तन भी वातावरण और महासागर में परिसंचरण पैटर्न को बदल सकता है। WMO की रिपोर्ट में अटलांटिक महासागर में उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के बढ़ने की संभावना की भविष्यवाणी की गई है। इससे उत्तरी अमेरिका के दक्षिण-पश्चिम में सूखे होने की संभावना है। इतना ही नहीं अफ्रीका के साहेल और ऑस्ट्रेलिया में बाढ़ आ सकती है।
संयुक्त राष्ट्र ने बताया खतरे की घंटी
संयुक्त राष्ट्र विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्लूएमओ) के महासचिव पेटेरी तालास ने बताया कि यह इस बात को रेखांकित करता है कि हम उस सीमा के और करीब पहुंच गए हैं। इतना ही नहीं हम आगे आने वाले वर्षों में इस खतरे के और नजदीक पहुंच रहे हैं। तालास ने ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने के लिए किए गए इस अध्ययन को जागने वाली खतरे की घंटी करार दिया है।
अगले 5 साल में बन सकता है सबसे गर्म साल का रिकॉर्ड
अध्ययन के अनुसार, 2021 से 2025 तक हर साल कम से कम 1 डिग्री सेल्सियस गर्म रहने की संभावना है। रिपोर्ट में 90 फीसदी संभावना की भी भविष्यवाणी की गई है कि उन वर्षों में से कोई एक 2016 की तुलना में आजतक के इतिहास का सबसे गर्म साल बन सकता है।
नासा के वैज्ञानिक बोले- यह देगा असहनीय दर्द
डब्लूएमओ रिपोर्ट के अनुसार, अबतक रिकॉर्ड किए गए तीन सबसे गर्म वर्षों में से एक 2020 में वैश्विक औसत तापमान पूर्व-औद्योगिक आधार रेखा से 1.2 डिग्री सेल्सियस ऊपर था। न्यूयॉर्क शहर में नासा के गोडार्ड इंस्टीट्यूट फॉर स्पेस स्टडीज के निदेशक गेविन श्मिट ने कहा कि वार्षिक तापमान में थोड़ा उतार चढ़ाव देखने को मिल रहा है, लेकिन ये दीर्घकालिक रुझान असहनीय दर्द देने वाला है।
दुनिया से सभी इलाकों में दिखेगा प्रभाव
नासा के इस वैज्ञानिक ने चेतावनी देते हुए रहा कि पक्के तौर पर यह लगता है कि हम इन सीमाओं को पार करने जा रहे हैं। और ऐसा इसलिए है क्योंकि सिस्टम में देरी है, सिस्टम में जड़ता है और हमने अभी तक वास्तव में वैश्विक उत्सर्जन में बड़ी कटौती नहीं की है। डब्ल्यूएमओ ने कहा कि हाल के दिनों की तुलना में लगभग सभी क्षेत्रों में अगले पांच वर्षों में गर्म होने की संभावना है।
सैटलाइट डेटा और क्लाइमेट मॉडल्स के आधार पर रिसर्चर्स ने बताया है कि स्ट्रेटोस्फीयर (stratosphere) के नीचे की परत ट्रोपोस्फीयर (troposphere) जलवायु परिवर्तन की वजह से गर्म हो रही है। धरती के करीब 12 से 50 किमी तक जाने वाली स्ट्रेटोस्फीयर में ही ओजोन गैस पाई जाती है जो हमें सूरज के हानिकारक रेडिएशन से बचाती है। ट्रोपोस्फीयर के गर्म होने से स्ट्रेटोस्फीयर का निचला हिस्सा बाहर की ओर दब रहा है। कार्बनडायऑक्साइड की मात्रा बढ़ने से ये परत सिकुड़ती जा रही है।
NASA के गॉडार्ड इंस्टिट्यूट फॉर स्पेस स्टडीज के डायरेक्टर गैविन श्मिट ने कनाडा के नैशनल ऑब्जर्व को 2016 में बताया था कि कार्बनडायऑक्साइड स्ट्रेटोस्फीयर में ठंडी हो जाती है जिससे ये सिकुड़ने लगती है। ब्रिटेन की रीडिंग यूनिवर्सिटी के अटमॉस्फीरिक साइंस के प्रफेसर पॉल विलियम्स ने बताया कि इसकी वजह से धरती की कक्षा में घूम रहीं सैटलाइट्स को नुकसान हो सकता है।
पॉल का कहना है कि अगर स्ट्रेटोस्फीयर के सिकुड़ने से उसके ऊपर की दूसरी परतें भी नीचे आती हैं, तो निचली कक्षा में घूम रहीं सैटलाइट्स के सामने हवा का कम प्रतिरोध होगा। इससे उनके रास्ते पर असर पड़ सकता है। पॉल का कहना है कि ये परतें इलेक्ट्रिकली चार्ज होती हैं और उनमें बदलाव होने से रेडियो वेव्स के ट्रांसमिशन पर भी असर हो सकता है। जैसे आइओनोस्फीयर में चार्ज्ड पार्टिकल्स होते हैं जो सूरज से आने वाले रेडिएशन के कारण न्यूट्रल गैस ऐटम्स से अलग होते हैं। इससे निकली इलेक्ट्रिक कंडक्टिविटी इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगें पैदा करती है जिनका इस्तेमाल धरती के इलेक्ट्रिक एनवायरन्मेंट और मौसम को स्टडी करने के लिए किया जाता है।
कई पुख्ता सबूतों पर की गई भविष्यवाणी
WMO नासा और नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (NOAA) सहित कई स्रोतों से तापमान डेटा का उपयोग करता है। एनओएए के नेशनल सेंटर फॉर एनवायर्नमेंटल इंफॉर्मेशन में जलवायु विश्लेषण और संश्लेषण शाखा के प्रमुख रसेल वोस ने कहा, तापमान में बदलाव औसतन और चरम तापमान दोनों में हो रहा है। गर्म तापमान क्षेत्रीय और वैश्विक वर्षा को भी प्रभावित करते हैं।


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