विज्ञान

बुध ग्रह गहन अध्ययन का विषय,नई खोज में पता चला है कि बुध ग्रह के ध्रुवों पर भी बर्फ

jantaserishta.com
24 March 2022 2:17 AM GMT
बुध ग्रह गहन अध्ययन का विषय,नई खोज में पता चला है कि बुध ग्रह के ध्रुवों पर भी बर्फ
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हमारे सौरमंडल में पृथ्वी के बाहर जीवन तलाशने के लिए कई पिंडों की पड़ताल की गई है.

जनता से रिश्ता वेबडेस्क। हमारे सौरमंडल (Life exploration in Solar System) में पृथ्वी के बाहर जीवन तलाशने के लिए कई पिंडों की पड़ताल की गई है. इनमे सबसे वायुमंडल और पानी की तलाश को अधिक प्राथमिकता दी गई. चंद्रमा, मंगल, के अलावा गुरू और शनि ग्रहों के उपग्रहों पर भी बर्फ मिली है. लेकिन बहुत अब नई खोज में पता चला है कि बुध ग्रह के ध्रुवों पर भी बर्फ (Ice on the Poles of Mercury) है. शोधकर्ताओं ने यह नई जानकारी राडार खगोलविज्ञान (Radio Astronomy) के जरिए हासिल करने में सफलता पाई है. इस पड़ताल में शोधकर्ताओं ने एरेसिबो रेडियो टेलीस्कोप और मैसेंजर अंतरिक्ष यान के द्वारा जमा किए गए आंकड़ों का उपयोग किया है.

प्लैनेटरी राडार तकनीक
शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में एरेसिबो रेडियो टेलीस्कोप के आंकड़ों का अध्ययन किया जो आजकल उपयोग में नहीं लाया जाता है, लेकिन उससे हमारे वैज्ञानिकों को बहुत सारे आंकडे जरूर मिले हैं जिनका उपयोग उन्होंने प्लैनेटरी राडार तकनीक के लिए किया. यह तकनीक 1960 के दशक में शुक्र और बुध की कक्षा को मापने के लिए इस्तेमाल में लाई गई थी.
कैसे काम करती है तकनीक
ग्रहीय राडार तकनीक में रेडियो संकेत ग्रह पर भेजा जाता है और फिर ग्रह से टकरा कर बिखरने वाले संकेतों को एक संवेदनशील टेलीस्कोप के जरिए पकड़ा जाता है. इससे उस ग्रह के बारे में काफी जानकारी मिल जाती है. पिछले कुछ सालों में राडार खगोलविज्ञान ज्यादा शक्तिशाली हो गया है. इस तकनीक के जरिए वैज्ञानिक ग्रहों की सतह का नक्शा बनाने के साथ सतह की संचरना का भी पता लगाने लगे हैं.
1990 के दशक से हुई शुरुआत
1990 के दशक में ग्रहीय राडार तकनीक का उपयोग बुध की सतह का नक्शा बनानेके लिए किया गया था और नतीजों से इसमें चौंकाने वाली जानकारी यह मिली कि ग्रह के ध्रुवों के पास कुछ इलाकों में बर्फ है. इन नक्शों से बर्फ के स्थान की स्थिति का सटीक पता नहीं चल सका, लेकिन खगोलविदों ने यह अनुमान जरूर लगाया कि ध्रुवों के क्रेटर के छाया वाले इलाकों में बर्फ हो सकती है जहां सूर्य की किरणें कभी नहीं पहुंच पाती हैं.
दो आंकड़ों को मिला कर अध्ययन
इसके बाद 2012 में हुए अध्ययनों ने भी क्रेटरों में बर्फ की मौजूदगी का पुष्टी की थी. इसके बाद 2019 में एरेसिबो ने बुध की ओर शक्तिशाली रेडियो संकेत भेजे. वापसी के संकेतों के अध्ययन से खगोलविद ध्रुवों के क्रेटर सहित बुध का विस्तृत रेडियो मैप बना सके. इस आंकड़े और मैसेंजर अंतरिक्ष यान के से मिले 2011 से 2-15 तक के आंकड़ों को मिला कर फिर से अध्ययन किया गया.
हो गई पुष्टि
सभी आंकड़ों को मिला कर टीम ने राडार के नक्शे के बेहतर निष्कर्ष निकाले. जहां ग्रह की मिट्टी की जगह बर्फ ज्यादा संकेत प्रतिबिम्बित करती है, लेकिन इसके दूसरे कारण भी हो सकते हैं. शोधकर्ता इस बात की पुष्टि करने में सफल हो सके कि जो चमकीले रेडियो संकेत आ रहे थे वे वास्तव में बुध ग्रह के ध्रुवों के कुछ इलाकों से ही आ रहे थे.
दूसरे पिंडों का भी हो सकता है ऐसा अध्ययन
ध्रुवों पर बर्फ के होने की पुष्टि करने के बाद शोधकर्ताओ यह भी जानने में कामयाब हो सके यह बर्फ कितनी शुद्ध है. इस तरह का अध्ययन से सौरमंडल में स्थित दूसरे पिंडों के बारे में भी सटीक जानकारी निकाली जा सकती है. इसमें चंद्रमा पर मौजूद बर्फ में वैज्ञानिकों की ज्यादा रुचि है जो भावी मानव अभियानों के लिए बहुत ही उपयोगी साबित हो सकता है.
ग्रहों या उपग्रहों पर बर्फ का मिलना अब ताज्जुब की बात नहीं रह गई है और ना ही यह कोई जीवन के होने का पुष्ट प्रमाण रह गया है. जीवन के लिए जरूरी पहलुओं में वैज्ञानिक तरल पानी की उपस्थिति के साथ वायुमंडल के स्थायित्व पर जर दे रहे हैं. जिससे अगर ग्रह या उपग्रह पर ऑक्सीजन ना भी हो तो हम वहां ऑक्सीजन पैदा कर सकें. मंगल पर यही प्रयास हो रहा है और वहां वायुमडंल का स्थायित्व ही चुनौती है.


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