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नई दिल्ली: आधुनिक पवनचक्कियां 25 साल पहले की तुलना में 20 गुना ज्यादा बिजली पैदा कर सकती हैं. वे और ऊंची और बड़ी हो गई हैं और उनके ब्लेड भी लंबे हैं. इन्वेस्टमेंट बैंक लजार्ड के मुताबिक नये संयंत्रों से पवन ऊर्जा उत्पादन में आज 2009 के मुकाबले 72 फीसदी कम लागत आती है. इसीलिए उसे धरती के सबसे सस्ते ऊर्जा स्रोतों में से एक माना जाता है. जर्मनी स्थित शोध संगठन, सौर ऊर्जा प्रणालियों के फ्राउनहोफर संस्थान के एक अध्ययन के मुताबिक तेज हवा वाले तटीय इलाकों की बिजली के लिए प्रति किलोवॉट घंटा 0.04 से 0.05 यूरो (0.05 से 0.06 डॉलर) की लागत आती है. जहां हवा कमजोर होती है उन इलाकों में उसकी लागत प्रति किलोवॉट घंटा 0.06-0.08 यूरो आती है. समंदर में लगे संयंत्रों में प्रति किलोवॉट प्रति घंटा की कीमत करीब 0.1 यूरो बैठती है क्योंकि वहां उन्हें लगाने और रखरखाव में ज्यादा लागत आती है.





