विज्ञान

रात में प्रकाश में सोना हानिकारक, इन बीमारियों का बढ़ता है खतरा

Gulabi Jagat
4 April 2022 1:48 PM GMT
रात में प्रकाश में सोना हानिकारक, इन बीमारियों का बढ़ता है खतरा
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यहां तक कि डीम लाइट में भी सोने से कार्डियोवस्कुलर फंक्शन पर दुष्प्रभाव पड़ता है
न्यूयार्क, आइएएनएस। रात में किसी को लाइट (प्रकाश) में नहीं आती तो किसी को अंधेरे में। सबके पास अपने-अपने कारण हैं। लेकिन इन स्थितियों से स्वास्थ्य प्रभावित होता है। अब एक शोध में बताया गया है कि यदि आप कम प्रकाश (डीम लाइट) में भी सोते हैं तो उससे स्वास्थ्य को नुकसान हो सकता है। इसलिए बेहतर होगा कि अंधेरे में सोने की आदत डालें।
अमेरिका में नार्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के मुताबिक, यहां तक कि डीम लाइट में भी सोने से कार्डियोवस्कुलर फंक्शन पर दुष्प्रभाव पड़ता है और अगली सुबह इंसुलिन प्रतिरोध बढ़ जाता है।
स्कूल के फिनबर्ग स्कूल आफ मेडिसिन में स्लीप मेडिसिन की प्रमुख डाक्टर फीलिस जी ने बताया कि इस शोध का निष्कर्ष दर्शाता है कि यदि एक रात भी सामान्य लाइट में आप सोते हैं तो ग्लूकोज और कार्डियोवस्कुलर रेगुलेशन में गड़बड़ी पैदा होती है, जो हार्ट डिजीज, डायबिटीज तथा अन्य मेटाबोलिक सिंड्रोम के जोखिम के कारक बन सकते हैं।
जी ने इन निष्कर्षो के आधार पर कहा है कि लोगों के लिए यह महत्वपूर्ण है कि रात को सोने के समय या तो लाइट बिल्कुल बंद कर दें या फिर कम से कम लाइट रखें।
यह शोध अध्ययन पीएनएएस जर्नल में प्रकाशित हुआ है। इसके अनुसार, इस अध्ययन में शामिल प्रतिभागियों के एक रात सोते समय 100 लक्स (माडरेट लाइट) और 3 लक्स (डीम लाइट) रखने के असर का तुलनात्मक अध्ययन किया गया है।
शोधकर्ताओं ने पाया कि जो लोग माडरेट लाइट में सोए, उनका शरीर ज्यादा अलर्ट मोड में था। इस स्थिति में हृदय गति (हार्ट रेट) बढ़ने के साथ ही हृदय के सिकुड़ने और रक्त नलिकाओं में आक्सीजन युक्त ब्लड के प्रवाह की गति भी प्रभावित होती है।
नार्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी में ही न्यूरोलाजी की असिस्टेंट रिसर्च प्रोफेसर डेनिएला ग्रिमाल्डी ने बताया कि जब आप नींद में भी होते हैं, तब भी आपका आटनामिक (स्वतंत्र) नर्वस सिस्टम सक्रिय रहता है, जो कि अच्छा नहीं होता है। सामान्य तौर पर हार्ट रेट तथा अन्य कार्डियोवस्कुलर मापांक रात में कम और दिन में अधिक होते हैं।
शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि जो लोग रात में लाइट जलाकर सोए, सुबह में उनमें इंसुलिन प्रतिरोध बढ़ा था। इंसुलिन प्रतिरोध उस स्थिति को कहते हैं, जब मांसपेशियां, फैट और लिवर इंसुलिन से उचित प्रतिक्रिया नहीं करता है और शरीर को ऊर्जा देने के लिए ब्लड ग्लूकोज का इस्तेमाल कम हो जाता है या नहीं हो पाता है। इस स्थिति से निपटने के लिए पैनक्रियाज (अग्नाशय) को ज्यादा इंसुलिन बनाना पड़ता है। इस कारण समय के साथ ब्लड शुगर का स्तर बढ़ता जाता है।
जी के मुताबिक, नींद, पोषण, व्यायाम दिन में प्रकाश में रहना जैसी बातें स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण कारक होते हैं, लेकिन हमने पाया है कि रात के समय में सामान्य तीव्रता वाला प्रकाश भी दिल और अंत:स्त्रावी (एंडोक्राइन) स्वास्थ्य में बिगाड़ पैदा करता है।
उन्होंने बताया कि ये निष्कर्ष आधुनिक समाज के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि घर के बाहर और अंदर रात के समय में प्रकाश की अच्छी व्यवस्था बढ़ती ही जा रही है।
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