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वैज्ञानिकों की बढ़ी चिंता, प्लूटो के वायुमंडल के साथ हो रहा ऐसा...

jantaserishta.com
6 Oct 2021 12:03 PM GMT
वैज्ञानिकों की बढ़ी चिंता, प्लूटो के वायुमंडल के साथ हो रहा ऐसा...
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एक ग्रह (Planet) पर जीवन होने के लिए जरूरी होता है कि वहां एक वायुमंडल उपस्थित हो, कई ग्रहों पर वायुमंडल होते भी हैं, लेकिन उनका टिक पाना बहुत मुश्किल होता है. मंगल ग्रह का वायुमंडल इसकी सबसे अच्छी मिसाल है. एक अध्ययन से पता चल रहा है कि प्लूटो (Pluto) का वायुमंडल भी गायब होने की राह पर है. शोधकर्ताओं ने पाया है कि प्लूटो के चारों ओर फैली गैस अब सिकुड़ कर वापस बर्फ में बदल रही है जिससे उसका वायुमंडल (Atmosphere of Pluto) सिमट रहा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

प्लूटो (Pluto)के वायुमंडल के यूं संकुचित होने की वजह उसका सूर्य से दूर जाना बताया जा रहा है. यह वायुमंडल (Atmosphere of Pluto)पहले से ही पतला बताया जा रहा था. यह नाइट्रोजन (Nitrogen) और कुछ मीथेन के साथ कार्बनमोनोऑक्साइड से बना हुआ है. जैसे जैसे तापमान सतह पर गिर रहा है. ऐसा लगता है कि इससे नाइट्रोजन फिर से जमने लगी है. जिसे वायुमंडल गायब होने लगा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)
इस अध्ययन में प्लूटो (Pluto)का विश्लेषण ऑकल्टेशन (occultation) नाम की पद्धति के जरिए किया गया. इसमें सूदूर तारे की रोशनी को पृथ्वी पर स्थित टेलीस्कोप (Telescope) के लिहाज से पीछे के प्रकाश की तरह उपयोग कर यह जानने का प्रयास किया कि प्लूटो में क्या हो रहा है. यह पद्धति खगोल विज्ञानी में बहुत जानी मानी और परखी हुई अवलोकन तकनीक है. वैज्ञानिक 1988 से इसके लिए प्लूटो के वायुमंडल में बदलावों का अध्ययन कर रहे हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)
शोधकर्ताओं का कहना है कि न्यू होराइजन अभियान जब 2015 में प्लूटो (Pluto)के पास से गुजरा था तब उसने वहां के वायुमंडल (Atmosphere of Pluto)की बहुत सी उपयोगी जानकारी निकाली थी. प्लूटो का वायुमंडल हर दशक में दो गुना हो रहा था, लेकिन 2018 के अवलोकनों से पता चला है कि 201 तक का चलन अब बंद हो गया है. प्लूटो का वायुमडंल सतह पर वाष्प से बनी बर्फ से बना था जिसमें तापमान में थोड़ा सा बदलाव हुआ था. इसी वजह से इसके वायुमंडल के घनत्व (Density) में बड़ा बदलाव हुआ. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)
प्लूटो (Pluto)की सतह के पश्चिमी हिस्से पर टॉमबोग रेजियो नाम का दिल का आकार का बड़े हिस्से में स्पूतनिक प्लैनिटिया नाम का नाइट्रोजन ग्लेशियर पृथ्वी (Earth) से दिखाई देता है. यह बौना ग्रह सूर्य (Sun) का एक चक्कर लगाने में पृथ्वी के 248 साल लगाता है. जब यह पृथ्वी की सबसे पास होता है, तब वह उसकी सूर्य से दूरी, पृथ्वी-सूर्य की दूरी के 30 गुना ज्यादा दूरी तक होती है. लेकिन यह दूरी बढ़ती जा रही है जिससे प्लूटो का तापमान और सूर्य की रोशनी, दोनों कम हो रहे हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)
प्लूटो (Pluto)को संपूर्ण ग्रह का दर्जा अब नहीं दिया जाता, लेकिन वह अब भी विशेषज्ञों के बीच विवाद का विषय बना हुआ है. बहुत से खगोलविद अब भी उसका एक पूरे ग्रह (Planet) की तरह अध्ययन करते हैं. और उस पर लगातार नजर रखी जाती है. हाल ही में खगोलविदों ने प्लूटो पर बर्फ से ढके पहाड़ों के साथ सतह के नीचे तरल महासागरों का होना सुनिश्चित किया है. शोधकर्ताओं का कहना है कि इससे इस ग्रह के वायुमडंल (Atmosphere of Pluto)की प्रक्रियाओं का पता चल सकता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)
साल 2018 के अवलोनकनों को केंद्रीय चमक (Central Flash) से काफी जानकारी मिली जिससे पता चला कि टेलीस्कोप सीधे प्लूटो (Pluto)को ही देख रहे थे जब वायुमंडल (Atmosphere of Pluto) की गणनाएं की जा रही थी. इससे उनके नतीजों की विश्वसनीयता भी बढ़ी. यह अब तक की देखी गई सबसे स्पष्ट केंद्रीय चमक थी. यह चमक प्लूटो के पृथ्वी पर छाया पथ की सटीक जानकारी देती है. अध्ययन की पड़ताल अमेरिकन एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी डिविजन फॉर प्लैनेटरी साइंसेस की सालाना मीटिंग में साझा की गई थीं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)


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