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विज्ञान

वैज्ञानिकों ने 2.74 किलोमीटर लंबी टनल के निर्माण को लेकर पूछे सवाल

Gulabi
11 Jun 2021 12:56 PM GMT
वैज्ञानिकों ने 2.74 किलोमीटर लंबी टनल के निर्माण को लेकर पूछे सवाल
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2.74 किलोमीटर लंबी टनल

पहाड़ों की रानी मसूरी में यातायात व्यवस्था को और अधिक सुगम बनाने को लेकर 700 करोड़ रुपए की लागत से प्रस्तावित 2.74 किलोमीटर लंबी सुरंग निर्माण कार्यों से पहले ही विवादों के घेरे में आ गई हैं।

जहां एक तरफ प्रस्तावित टनल के निर्माण को लेकर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने 700 करोड़ रुपये के बजट स्वीकृत करने की जानकारी दी है, वही वाडिया इंस्टीट्यूट आफ हिमालयन जियोलॉजी के वैज्ञानिकों का मानना है कि बिना जियोलॉजिकल सर्वे और वैज्ञानिक अध्ययन के भूस्खलन और भूकंप के लिहाज से बेहद संवेदनशील मसूरी जैसे इलाके में इतनी लंबी टनल के निर्माण को स्वीकृति और बजट का आवंटन चौंकाने वाला पहलू है।
वाडिया इंस्टीट्यूट आफ हिमालयन जियोलॉजी के वरिष्ठ भूस्खलन विज्ञानी डॉ. विक्रम गुप्ता का कहना है कि मसूरी व उसके आसपास के इलाके का अध्ययन करने के बाद यह बात सामने आई है कि मसूरी व आसपास का इलाका भूस्खलन के लिहाज से काफी संवेदनशील है, ऐसे में इतनी लंबी टनल के निर्माण को मंजूरी के साथ ही बजट का आवंटन बिना किसी वैज्ञानिक अध्ययन या जियोलॉजिकल सर्वे के किया जाना चौंकाने वाली बात है।
साथ ही डॉ. गुप्ता का यह भी कहना है कि आधुनिक युग में जहां समुद्र के नीचे सुरंगे बनाई जा रही है, वहीं मसूरी जैसे इलाकों में सुरंग का बनाया जाना बहुत मुश्किल नहीं है। बशर्ते कि इसके लिए तमाम पहलुओं पर वैज्ञानिक अध्ययन करने की जरूरत है।
विक्रम गुप्ता का यह भी मानना है कि पूरे मसूरी क्षेत्र में लाइमस्टोन की चट्टाने हैं जो साल भर मानसून के साथ ही अन्य स्रोतों से निकलने वाले पानी को अवशोषित करती हैं और इन चट्टानों की पानी को ग्रहण करने की अपनी क्षमता होती है। बाद में यही चट्टाने खिसकने लगती हैं और भूस्खलन की घटनाएं घट जाती हैं। इस लिहाज से तमाम पहलुओं को पहले अध्ययन किए जाने की जरूरत है।
काटने पड़ेगें हजारों ओक, देवदार समेत कई प्रजातियों के पेड़
इतना ही नहीं मसूरी में प्रस्तावित सुरंग के निर्माण को लेकर ओक, देवदार समेत कई प्रजातियों के हजारों पेड़ों को भी काटना पड़ेगा। दूसरी ओर इस संबंध में जब प्रभागीय वनाधिकारी मसूरी कहकशा नसीम से किसी भी प्रकार की लिखापढ़ी की जानकारी चाही गई, तो प्रभागीय वनाधिकारी ने कहा कि इस संबंध में किसी भी स्तर पर कोई भी लिखापढ़ी फिलहाल अभी तक नहीं की गई है। भविष्य में याद लिखा पढ़ी की जाती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

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