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वैज्ञानिकों ने प्लास्टिक प्रदूषण पर काबू पाने के लिए अपनाया यह तरीका, गन्ने की छाल व बांस से बनाया ईको-फ्रेंडली बर्तन

Rishi kumar sahu
22 Nov 2020 4:35 PM GMT
वैज्ञानिकों ने प्लास्टिक प्रदूषण पर काबू पाने के लिए अपनाया यह तरीका, गन्ने की छाल व बांस से बनाया ईको-फ्रेंडली बर्तन
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यह इस्तेमाल के बाद कम समय में आसानी से नष्ट हो जाते हैं

जनता से रिश्ता वेबडेस्क। अमेरिकी वैज्ञानिकों ने प्लास्टिक प्रदूषण पर लगाम लगाने का नया तरीका खोज निकाला है। उन्होंने गन्ने की छाल और बांस की मदद से ऐसे ईको-फ्रेंडली बर्तन तैयार किए हैं, जो इस्तेमाल के बाद कम समय में आसानी से नष्ट हो जाते हैं।

नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के मुताबिक प्लास्टिक से बने कप, प्लेट, कटोरी, चम्मच प्राकृतिक रूप से नष्ट होने में औसतन 450 साल का समय ले सकते हैं। वहीं, गन्ने की छाल और बांस से तैयार बर्तन मिट्टी में मिलने के 30 से 45 दिन के भीतर सड़ने-गलने लगते हैं।

60 दिन बीतते-बीतते इनका अस्तित्व पूरी तरह से मिट जाता है। खास बात यह है कि प्लास्टिक के बर्तनों की तरह इनमें चाय-कॉफी या गर्मागर्म खाने का सेवन करना सेहत के लिए हानिकारक नहीं साबित होता।

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