विज्ञान

अध्ययन में हुआ खुलासा- पृथ्वी से साझा करता था चंद्रमा अपना मैग्नेटिक फील्ड

Gulabi
17 Oct 2020 2:57 PM GMT
अध्ययन में हुआ खुलासा- पृथ्वी से साझा करता था चंद्रमा अपना मैग्नेटिक फील्ड
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चंद्रमा के बारे में इन दिनों काफी शोध हो रहा है. कई देश वहां रोवर भेजने की तैयारी में लगे हैं

जनता से रिश्ता वेबडेस्क। चंद्रमा (Moon) के बारे में इन दिनों काफी शोध हो रहा है. कई देश वहां रोवर (Rover) भेजने की तैयारी में लगे हैं तो वहीं नासा (NASA) दो लोगों को वहां भेजने के लिए चंद्रमा पर बहुत से शोध कर रहा है. ताजा अध्ययन से पता चला है कि चंद्रमा की पृथ्वी पर जीवन के विकास (Evolution of life) में बड़ी भूमिका रही थी क्योंक चंद्रमा पर एक समय मैग्नेटिक फील्ड (Magnetic Field) था जिसने हमारी पृथ्वी की हानिकारक विकिरण (Harmful Radiation) से बचाव करने में रक्षा की थी

जब चंद्रमा का मैग्नेटिक फील्ड (Magnetic Field) था, तब चंद्रमा (Moon) और पृथ्वी (Earth) दोनों ही अपने मैग्नेटिक फील्ड को साझा करते थे. नासा की अगुआई में किया यह शोध साइंस एडवांस जर्नल में प्रकाशित हुआ है. इसके मुताबिक चंद्रमा का मैग्नेटिक फील्ड करीब 4.1 अरब साल से पहले लेकर 3.5 अरब साल पहले तक मौजूद रहा होगा. नासा के प्रमुख वैज्ञानिक जिम ग्रीन का कहना है कि चंद्रमा की मैग्नेटिक फील्ड उस समय सूर्य से आने वाली पवनों से पृथ्वी की रक्षा भी करती थी. अब शोधकर्ताओं को नासा के आर्टेमिस कार्यक्रम के तहत लाए जाने वाले चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव से खास नमूनों का इंतजार रहे हैं

इससे पहले नासा (NASA) के अपोलो अभियान (Apollo Mission) के तहत चंद्रमा (moon) की सतह से नमूने पृथ्वी (Earth) पर लाए गए थे जिनके आधार पर वैज्ञानिकों ने निष्कर्ष निकाला था कि चंद्रमा का कभी अपना मैग्नेटिक फील्ड था. नए अध्ययन ने पृथ्वी और चंद्रमा दोनों के चार अरब साल पुराने मैग्नेटिक फील्ड के बर्ताव का सिम्यूलेशन किया और साथ ही एक कम्प्यूटर मॉडल बनाया जिससे उस बर्ताव का अध्ययन किया जा सके

कुछ समय तक चंद्रमा (Moon) के मैग्नेटिक फील्ड (Magnetic Field) ने पृथ्वी और चंद्रमा के सिस्टम के लिए हानिकारक विकिरणों (Harmful Radiations) से रक्षा की थी. इस मॉडल से पता चला कि दोनों ही मैग्नेटिक तौर पर एक दूसरे से ध्रुवीय क्षेत्रों से जुड़े थे. उसी समय सौर पवनों के कण पृथ्वी के अंदर नहीं आ पाते थे और पृथ्वी पर जीवन के विकास को इससे कोई हानि नहीं होती थी.

लेकिन इस दौरान पृथ्वी (Earth) और चंद्रमा (Moon)के वायुमंडल (Atmosphere) में आदान प्रदान भी होता था. सूर्य की पराबैंगनी किरणें (Ultra Violet Rays) पृथ्वी की वायुमंडल के ऊपरी परत के कणों को आवेशित कर देते थे जिसके बाद वे चंद्रमा की मैग्निटिक फील्ड (magnetic Field) के प्रभाव में आकर चंद्रमा तक पहुच जाते थे. इसी वजह से चंद्रमा भी अपना वायुमंडल कायम रखा पाया था. जिसमें वहां नाइट्रोजन प्रमुख तौर पर मौजूद था.

शोधकर्ताओं का लगता है कि चंद्रमा के मैग्नेटिक फील्ड (Magnetic Field) के अध्ययन से उसके पुराने वायुमंडल (atmosphere) के बारे में पता चल सकता है, इसके साथ ही उसका आंतरिक भाग (Interior) कैसे बना और आज की स्थिति में कैसे पहुंचा यह जानकारी भी मिल सकेगी. इससे यह भी पता चलता कि चंद्रमा ने अपना वायुमंडल कैसे गंवा दिया जो 3.2 अरब साल पहले खत्म होना शुरू हुआ था और 1.5 अरब साल पहले पूरी तरह से गायब हो गया क्योंकि मैग्नटिक फील्ड के गायब होने से सूर्य के विकिरणों Solar Radiation) ने इस वायुमंडल को खाली कर दिया होगा

शोधकर्ताओं का कहना है ऐसा केवल हमारे ही चंद्रमा (Moon) के साथ नहीं हुआ होगा. बल्कि बाह्यग्र (Exoplanets) के चंद्रमाओं के साथ भी हुआ होगा जिन्होंने अपने ग्रहों (Planets) के वायुमंडल (Atmosphere) की रक्षा की होगी. इससे हो सकता है कि इन ग्रहों पर जीवन के लिए अनुकूल स्थितियां बन गई होंगी

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