विज्ञान

शोध में खुलासा, वर्चस्व दिखाने के लिए एक दूसरे के चेहरे पर हमला किया करते थे डायनासोर

Sandhya Yadav
15 Sep 2021 4:57 AM GMT
शोध में खुलासा, वर्चस्व दिखाने के लिए एक दूसरे के चेहरे पर हमला किया करते थे डायनासोर
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दुनिया के सबसे ज्यादा कौतूहल पैदा करने वाले विलुप्त जीव डायनासोर

जनता से रिश्ता वेबडेस्क|दुनिया के सबसे ज्यादा कौतूहल पैदा करने वाले विलुप्त जीव डायनासोर(Dinosaurs) के बारे में एक और बहुत ही अनोखी बात पता चली है. टायरेनोसॉरस रेक्स (Tyrannosaurus rex) डायनासोर को अपने समय का बहुत ही खतरनाक शिकारी जीव माना जाता है. दो पैरों पर चलने वाला यह सरीसृप मांसाहारी (carnivorous) जीव 40 फुट तक लंबा और 9 टन वजनी तक हो जाता था. नए अध्ययन में पाया गया है कि इनके युवा बच्चे एक दूसरे पर वर्चस्व दिखाने के लिए एक दूसरे के चेहरे पर हमला किया करते थे.

एक जबड़े के अध्ययन से हुई शुरुआत

रॉयल टेरिल म्यूजियम की डायनासोर सिस्मैटिक्स एंड इवोल्यूश्न की टीम ने इन नतीजों की पुष्टि की है जिसकी अगुआई शोधकर्ता और क्यूरेटर कैलेब ब्राउन ने की है. साल 2017 में शुरु किए गए इस शोध में ब्राउन ने अल्बेर्टा के डायनासोर प्रोविंसियल पार्क में खोजे गए टायरेनोसॉरस की ऊपरी जबड़े के एक नमूने से अपना अध्ययन शुरू किया.

200 से ज्यादा खोपड़ी- जबड़ों का अध्ययन

ब्राउन ने लाइव लाइव साइंस को दिए बयान में बताया कि जबड़ में लंबे घावों की एक शृंखला का खुलासा हुआ जो हड्डी के पास चाप के आकार के थे. बहुत ज्यादा संभव है कि ये घाव किसी दूसरे टायरेनोसॉर के दांतों के होंगे जो समय के साथ भर तो गए लेकिन उनके निशान रह गए. इस अध्ययन के लिए ब्राउन ने 202 टायरेनोसॉर की खोपड़ियों और जबड़ों का अध्ययन किया.

केवल आधे व्यस्कों में निशान मिले

ब्राउन ने अपने अध्ययन में कुल 324 निशानों का अध्ययन किया. शोधकर्ताओं ने पाया कि टीरेक्स के बच्चों में इस तरह के निशान देखने को नहीं मिले हैं. लेकिन दूसरी तरफ आधे व्यस्क टी रेक्स के चेहरों पर ऐसे निशान जरूर मिले. इससे पता चलता है कि यहे निशान केवल एक ही लिंग के टी रेक्स के चेहरे पर हुआ करते थे. ब्राउन ने बताया कि इनका भी आकार एक सा हुआ करता था.

लिंग निर्धारण एक समस्या

फिर भी ब्राउन का कहना है कि जीवाश्म डायनासोर का लिंग पता करना बहुत ही कठिन काम है. इसलिए शोधकर्ता यह सुनिश्चित करने की स्थिति में नहीं थे कि क्या इस तरह से काटने का बर्ताव केवल नर डायनासोर में ही होता था या नहीं. फिर भी दांतों की दूरी, खोपड़ी और काटने के निशान के आधार पर शोधकर्ता यह तय कर सके कि शिकार या काटने वाले जीव कितने बड़े हुआ करते थे.

दो तरह के डायनासोर का अलग असर

पिछले कई सालों में मिले बहुत सारे डायनासोर जीवाश्म और उनकी आकृति के अध्ययन से यह धारणा बनी है कि टी रेक्स और उसके जैसे गोर्गोसॉरस डायनासोर का पर्यावरण पर अलग अनुपात में असर हुआ था. अध्ययन में पाया गया है कि इन डायनासोर ने अपने वृद्धि के लिए एक बड़े खेल के लिए अपनी भूख विकसित कर ली थी.

एक ही प्रजाति का वर्चस्व

टायरेनोसॉरस दूसरे मांसाहारी जीवों को पीछे धकेल दिया करते थे जिससे एक ही शिकारी जीवों से पारिस्थितिकी तंत्र नियंत्रित हुआ करता था. ब्राउन के मुताबिक आज के जानवर एक दूसरे से भी लड़ने लगते हैं जब वे बूढ़े होकर प्रजजन क्षमता खो देते हैं. वे अपने प्रतिद्वंदियों से या सक्षम साथियों की तुलना में कहां हैं, यह देखकर जूझने लगते हैं.

शोधकर्ताओं का कहना है कि टायरेनोसॉरस भी आपस में वर्चस्व की लड़ाई लड़ना शुरू कर देते होंगे जब वे प्रजनन परिपक्वता हासिल कर लेते होंगे. लेकिन इसकी जांच कर पुष्टि कर पाना बहुत मुश्किल है. इसलिए हम सच्चाई नहीं जानते हैं. लेकिन संभावना यही ज्यादा है कि वे या तो वर्चस्व के लिए या फिर साथी के लिए आपस में लड़ जाते होंगे.


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