- Home
- /
- अन्य खबरें
- /
- विज्ञान
- /
- कीमोथेरेपी प्रतिरोध पर...

Delhi : कैंसर उपचार में कीमोथेरेपी एक प्रमुख तरीका है, लेकिन कई मामलों में यह प्रभावी नहीं होती। वैज्ञानिकों ने इस विफलता के पीछे "कीमोथेरेपी प्रतिरोध" को एक बड़ी समस्या के रूप में पहचाना है। हाल ही में, मैस जनरल ब्रिघम (Mass General Brigham) के वैज्ञानिकों ने इस विषय पर एक महत्वपूर्ण शोध किया, जिसमें उन्होंने यह पता लगाया कि कैंसर कोशिकाएं VPS35 नामक प्रोटीन की मदद से कीमोथेरेपी से बच सकती हैं।
यह शोध प्रतिष्ठित विज्ञान पत्रिका "Nature" में प्रकाशित हुआ है। अध्ययन में यह सामने आया कि VPS35 उत्परिवर्तन प्रतिक्रियाशील ऑक्सीजन प्रजातियों (Reactive Oxygen Species - ROS) के स्तर को कम कर देता है, जिससे कैंसर कोशिकाएं कीमोथेरेपी से बचने में सक्षम हो जाती हैं।
इस खोज के बाद अब यह संभव हो सकता है कि डॉक्टर मरीजों के VPS35 स्तर की जांच कर यह अनुमान लगा सकें कि उनके कैंसर ट्यूमर पर कीमोथेरेपी का असर होगा या नहीं।
कीमोथेरेपी प्रतिरोध क्यों होता है?
कीमोथेरेपी का काम कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करना है, लेकिन जब कैंसर कोशिकाएं समय के साथ दवाओं के प्रति प्रतिरोधी (Resistant) हो जाती हैं, तो यह इलाज बेअसर हो जाता है।
🔹 क्या कहता है शोध?
-
ROS अणु कोशिकाओं के सामान्य कार्यों में मदद करते हैं, लेकिन अधिक मात्रा में होने पर वे कोशिकाओं को नष्ट कर सकते हैं।
-
कुछ कैंसर कोशिकाएं VPS35 प्रोटीन की मदद से अपने अंदर ROS का स्तर कम कर लेती हैं।
-
इस कारण कीमोथेरेपी उन पर असर नहीं कर पाती और कैंसर ट्यूमर बढ़ता रहता है।
इस शोध के प्रमुख वैज्ञानिक लिरॉन बार-पेलेड (Liron Bar-Peled) ने कहा, "ROS की स्पष्ट समझ हमें यह जानने में मदद कर सकती है कि कुछ मामलों में कीमोथेरेपी असफल क्यों होती है।"
VPS35 की भूमिका और अध्ययन के निष्कर्ष
वैज्ञानिकों ने VPS35 के प्रभाव को समझने के लिए उच्च-ग्रेड सीरस डिम्बग्रंथि कैंसर (High-Grade Serous Ovarian Cancer - HGSOC) से पीड़ित 24 मरीजों के ट्यूमर का विश्लेषण किया।
🔸 अध्ययन में पाया गया: ✔ जिन मरीजों में VPS35 का स्तर अधिक था, उनमें कीमोथेरेपी अधिक प्रभावी रही। ✔ VPS35 का कम स्तर कम उपचार प्रतिक्रिया और कम जीवित रहने की संभावना से जुड़ा था। ✔ VPS35 उत्परिवर्तन से कैंसर कोशिकाओं का ROS स्तर कम हो जाता है, जिससे ट्यूमर को कीमोथेरेपी से बचने में मदद मिलती है।
इसका मतलब यह है कि भविष्य में VPS35 की जांच करके डॉक्टर पहले से ही पता लगा सकेंगे कि मरीज पर कीमोथेरेपी असर करेगी या नहीं।
कैंसर उपचार में इस शोध का महत्व
🔹 व्यक्तिगत इलाज (Personalized Treatment): हर मरीज की कैंसर कोशिकाएं अलग होती हैं। VPS35 की जांच से डॉक्टर यह तय कर सकते हैं कि किसी मरीज के लिए कीमोथेरेपी सही विकल्प है या नहीं।
🔹 नई दवाओं का विकास: अब वैज्ञानिक ऐसी दवाएं विकसित कर सकते हैं, जो VPS35 उत्परिवर्तन को लक्षित करके कीमोथेरेपी को अधिक प्रभावी बना सकें।
🔹 कैंसर उपचार की सफलता दर बढ़ेगी: यदि कीमोथेरेपी से पहले VPS35 स्तर की जांच की जाए, तो कैंसर के लिए सबसे उपयुक्त उपचार योजना बनाई जा सकती है।
विशेषज्ञों की राय
शोधकर्ता लिरॉन बार-पेलेड का कहना है, "हमारे निष्कर्षों से कैंसर के व्यक्तिगत इलाज की संभावना बढ़ सकती है। हम मरीज के VPS35 स्तर की जांच कर यह तय कर सकते हैं कि उनके लिए कौन-सा उपचार सबसे कारगर होगा।"
कैंसर विशेषज्ञों का मानना है कि यह खोज कैंसर उपचार में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है।
निष्कर्ष
यह शोध कीमोथेरेपी प्रतिरोध को समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इससे कैंसर के इलाज में व्यक्तिगत दृष्टिकोण (Personalized Medicine) को बढ़ावा मिलेगा।
VPS35 प्रोटीन के स्तर की जांच करके भविष्य में डॉक्टर यह निर्धारित कर पाएंगे कि कौन-से मरीजों के लिए कीमोथेरेपी सही विकल्प होगी और किन्हें वैकल्पिक उपचार की जरूरत पड़ेगी।





