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वाशिंगटन डीसी: ऑटिज्म से पीड़ित लोगों का निदान आमतौर पर नैदानिक अवलोकन और मूल्यांकन के आधार पर किया जाता है। यह प्रक्रिया कई बार व्यक्तिपरक हो सकती है और स्पष्ट रूप से वर्णन करना कठिन होता है। इसी चुनौती से निपटने के लिए वैज्ञानिकों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और बड़े भाषा मॉडल (LLM) का उपयोग करके ऑटिज्म निदान से जुड़े प्रमुख व्यवहारों और संकेतों का विश्लेषण किया।
शोधकर्ताओं के अनुसार, दोहराव वाले व्यवहार, विशिष्ट रुचियां और धारणा-आधारित व्यवहार ऑटिज्म निदान से सबसे अधिक जुड़े होते हैं। यह निष्कर्ष मौजूदा DSM-5 दिशानिर्देशों से अलग है, जो मुख्य रूप से सामाजिक कारकों पर ध्यान केंद्रित करते हैं। शोध से यह भी संकेत मिलता है कि AI आधारित दृष्टिकोण नैदानिक दिशानिर्देशों को अधिक सटीक और वैज्ञानिक रूप से परिभाषित कर सकता है।
मॉन्ट्रियल स्थित मिला क्यूबेक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इंस्टीट्यूट और मैकगिल यूनिवर्सिटी के वरिष्ठ शोधकर्ता डेनिलो बज़डोक ने कहा कि उनका उद्देश्य चिकित्सकों को AI आधारित उपकरणों के माध्यम से सहायता प्रदान करना है, न कि उनकी जगह लेना।
"हम यह परिभाषित करना चाहते थे कि चिकित्सक निदान प्रक्रिया के दौरान किन व्यवहारों और रोगी के इतिहास को सबसे अधिक ध्यान में रखते हैं। ऐसा करने से, हम चिकित्सकों को AI आधारित नैदानिक उपकरणों के साथ काम करने के लिए सशक्त बना सकते हैं," उन्होंने कहा।
शोधकर्ताओं ने इस अध्ययन के लिए एक ट्रांसफॉर्मर भाषा मॉडल का उपयोग किया, जिसे 489 मिलियन अद्वितीय वाक्यों पर प्रशिक्षित किया गया था। इसके बाद, उन्होंने 4,000 से अधिक नैदानिक रिपोर्टों का विश्लेषण किया, जिन्हें चिकित्सकों द्वारा लिखा गया था। इन रिपोर्टों में देखे गए व्यवहार और रोगी इतिहास का विवरण था, लेकिन सुझाए गए नैदानिक निष्कर्ष शामिल नहीं थे।
टीम ने एक कस्टम LLM मॉड्यूल विकसित किया, जो रिपोर्ट में उन विशिष्ट वाक्यों को इंगित करता था जो सटीक निदान के लिए सबसे अधिक प्रासंगिक थे। फिर, इन महत्वपूर्ण वाक्यों का DSM-5 दिशानिर्देशों से सीधा तुलनात्मक अध्ययन किया गया।
इस शोध के निष्कर्ष महत्वपूर्ण हैं क्योंकि:
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यह ऑटिज्म निदान के लिए अधिक सटीक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण प्रदान कर सकता है।
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AI आधारित नैदानिक उपकरण चिकित्सकों की सहायता कर सकते हैं और निदान प्रक्रिया को बेहतर बना सकते हैं।
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यह शोध DSM-5 जैसे पारंपरिक दिशानिर्देशों की पुनर्समीक्षा की आवश्यकता को दर्शाता है।
यह अध्ययन ऑटिज्म निदान को अधिक वैज्ञानिक और वस्तुनिष्ठ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। AI और भाषा मॉडल जैसी आधुनिक तकनीकों के माध्यम से चिकित्सकीय निर्णय प्रक्रिया को और अधिक सटीक बनाया जा सकता है, जिससे लाखों ऑटिज्म प्रभावित व्यक्तियों को लाभ हो सकता है।





