विज्ञान

पृथ्वी की तरह धुरी पर झुके ग्रह होंगे इंसानों का घर? पढ़ें पूरी खबर

Gulabi
12 July 2021 1:07 PM GMT
पृथ्वी की तरह धुरी पर झुके ग्रह होंगे इंसानों का घर? पढ़ें पूरी खबर
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ब्रह्मांड में पृथ्वी जैसे दूसरों की तलाश करने के लिए अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA समेत दुनियाभर की स्पेस एजेंसियां लगी हुई हैं

ब्रह्मांड (Universe) में पृथ्वी (Earth) जैसे दूसरों की तलाश करने के लिए अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA समेत दुनियाभर की स्पेस एजेंसियां लगी हुई हैं. ऐसे में ये सवाल सबसे ज्यादा उभर कर आ रहा है कि किस तरह के ग्रह पर सबसे अधिक जीवन की संभावना होगी. वहीं, अब इस सवाल का जवाब मिलता हुआ भी नजर आ रहा है. NASA द्वारा फंड की गई एक स्टडी के मुताबिक, पृथ्वी की तरह किसी तारे का चारों ओर अपनी धुरी पर झुके हुए ग्रह पर जीवन की संभावना (Life on Universe) अधिक हो सकती है.


लेटेस्ट स्टडी में रिसर्चर्स ने एक मॉडल तैयार किया, जिसमें जीवन के लिए जरूरी परिस्थितियों को बनाए रखा गया. इस दौरान हालात में होने वाले बदलाव का ऑक्सीजन की मात्रा पर पड़ने वाले प्रभाव को समझने की कोशिश की गई. पर्ड्यू यूनिवर्सिटी के प्रिंसिपल रिसर्चर्स स्टेफनी ओल्सन ने कहा कि इस मॉडल पर जलीय जीवन में दिन की लंबाई, वायुमंडलीय मात्रा और स्थलीय उपस्थिति के प्रभाव की जांच की गई. उन्होंने कहा, हम यह समझने की कोशिश कर रहे थे कि ऑक्सीजन पैदा करने वाले जीवों पर इसका क्या असर होगा.
कैसे होता है इन ग्रहों पर ऑक्सीजन का उत्पादन?
किसी ग्रह पर लंबे दिन, सतह पर दबाव बढ़ने और महाद्वीपों के बनने की वजह से ऑक्सीजन बढ़ती है. रिसर्चर्स के मुताबिक, इनका प्रभाव समुद्र के संचलन और जीवन के लिए आवश्यक पोषक तत्वों पर भी पड़ता है. इनकी मदद से ही आज तक धरती पर ऑक्सीजन की मात्रा यहां तक पहुंची है. इसी तरह जब किसी ग्रह के अपनी धुरी पर झुकाव कोण को समझा गया तो पता चला कि इससे महासागरों में अधिक ऑक्सीजन का उत्पादन होता है. वास्तव में, ये जैविक तत्वों का बेहतर रिसाइकलिंग होने में मदद करता है.

अभी तक चार हजार से अधिक एक्सोप्लेनेट खोजे गए
पृथ्वी अपनी धुरी पर 23.5 डिग्री और मंगल 25.2 डिग्री पर झुकी हुआ है. वहीं शुक्र 177.3 डिग्री झुका हुआ है और बुध बिल्कुल सीधा है. पृथ्वी के कोने पर सूक्ष्मजीवों के पैदा होने के लिए बेहतर स्थितियां बनती हैं और बड़े जीवों के पैदा होने की भी बेहतर संभावना होती है. इस रिसर्च को 2021 Goldschmidt geochemistry सम्मेलन में प्रस्तुत किया गया. गौरतलब है कि दुनियाभर की स्पेस एजेंसियां पृथ्वी जैसे एक्सोप्लेनेट को ढूंढ़ने में जुटी हुई हैं. अभी तक चार हजार से अधिक एक्सोप्लेनेट खोजे गए हैं.
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