विज्ञान

इंसानों की तरह ही कौओं में भी होता है दिमाग से सोचकर सच्चाई की धारणा बनाने की प्रकृति

Janta Se Rishta Admin
8 Oct 2020 10:38 AM GMT
इंसानों की तरह ही कौओं में भी होता है दिमाग से सोचकर सच्चाई की धारणा बनाने की प्रकृति
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जर्मनी के वैज्ञानिकों ने बताया कि इंसानों की तरह ही कौओं में भी अपने दिमाग से सोचकर सच्चाई के बारे में धारणा बनाने की प्रकृति होती है

जनता से रिश्ता वेबडेस्क। अभी तक माना जाता था कि किसी चीज को देखकर उस पर अपनी समझ के मुताबिक विश्वास करने और धारणा बनाने की प्रकृति सिर्फ इंसानों की होती है। हालांकि, ताजा स्टडी में जर्मनी के वैज्ञानिकों ने पाया है कि ऐसा व्यवहार कौओं जैसे पक्षियों में भी देखने को मिल सकता है। इंसानों और दूसरे स्तनपायी जीवों के दिमाग के हिस्से- cerebral cortex के कारण यह प्रकृति पैदा होती है जो पक्षियों में नहीं होता है लेकिन इस स्टडी ने वैज्ञानिकों को चौंका दिया है। ये स्टडी साइंस जर्नल में छपी है।

जीवों की चेतना (Consciousness) को पक्षियों में टेस्ट करने के लिए यूनिवर्सिटी ऑफ तुबिनजन में जीव मनोविज्ञान विभाग के हेड प्रफेसर ऐंड्रियस निएडर के नेतृत्व में एक स्टडी की जा रही थी। इसमें दो कौओं (Corvus Corone) को एक स्क्रीन पर प्रॉजेक्शन देखने पर सिर हिलाने के लिए ट्रेन किया गया।

कैसे किया गया एक्सपेरिमेंट

जब प्रोजेक्शन साफ था, पक्षियों ने उसे देखने का सिग्नल दिया लेकिन जब वह धुंधला था तो उन्होंने अपनी समझ के हिसाब से अलग-अलग प्रतिक्रिया दी। निएडर ने फोर्ब्स से बताया कि इसके पीछे उनकी आंख कारण नहीं थी लेकिन दिमाग में कैसे यह सूचना प्रोसेस हो रही है, उसका असर था। कई बार कुछ नहीं दिखने पर भी कौओं ने देखने का इशारा किया।

ये एक्सपेरिमेंट करते हुए वैज्ञानिकों ने पक्षियों के Nerve cells की ऐक्टिविटी भी रिकॉर्ड की। तब पता चला कि जब पक्षी प्रोजेक्शन पर प्रतिक्रिया देते थे, नर्व सेल में ऐक्टिविटी तभी होती थी। अगर वह अपनी सोच के हिसाब से जवाब नहीं दे रहे होते, तो धुंधला प्रोजेक्शन दिखने पर भी उसे देखने का इशारा करते।

इस हिस्से में हुई ऐक्टिविटी

वैज्ञानिकों ने पाया कि पक्षियों के दिमाग की पेलियन लेयर (Pallium Layer) के NCL (nidopallium caudolaterale) हिस्से में ऐक्टिविटी देखी गई। यह हिस्सा शरीर के दूसरे हिस्सों तक सेंसरी इन्फर्मेशन पहुंचाने का काम करता है। ये हिस्सा सिर्फ पक्षियों में पाया जाता है। निएडर का कहना है कि हो सकता है कि NCL इंसानों के दिमाग के प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स की तरह काम करता हो।

क्यों अहम हैं ये नतीजे

उनका कहना है कि इन नतीजों से दो संभावनाएं दिख रही हैं- पहली ये कि 32 करोड़ साल पहले जो पक्षियों और स्तनपायी जीवों के कॉमन पूर्व थे, उनसे चेतना (Consciousness of perception) विकसित हुई हो। दूसरी यह कि अलग-अलग प्रजातियों में Consciousness अलग तरह से विकसित हुई है। दोनों में से वजह कोई भी हो, इंसानों की तरह प्रकृति किसी और जीव में मिलना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है।


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