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विज्ञान
बृहस्पति का रहस्यमयी 'ग्रेट रेड स्पॉट', जानें विशाल घूमते 'तूफान' के लिए क्या कहते हैं वैज्ञानिक
jantaserishta.com
16 March 2026 10:23 AM IST

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नई दिल्ली: सूर्य से पांचवां ग्रह बृहस्पति सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह है और इसका द्रव्यमान अन्य सभी ग्रहों के कुल द्रव्यमान से भी दोगुने से अधिक है। लेकिन इन बातों के बीच हैरत में डालता है बृहस्पति ग्रह पर स्थित विशाल लाल धब्बा या ग्रेट रेड स्पॉट, जिसे जीआरएस भी कहा जाता है। यह सौर मंडल का सबसे बड़ा तूफान है।
वैज्ञानिकों को भी जीआरएस का रहस्य हैरत में डालता है। यह एक विशाल घूमता हुआ तूफान है, जो आकार में पृथ्वी से भी बड़ा है और सदियों से देखा जा रहा है। हाल के वर्षों में अमेरिकी स्पेस एजेंसी के जूनो और हबल अंतरिक्ष दूरबीन से मिली जानकारी ने इस रहस्यमयी धब्बे के बारे में कई नई बातें सामने लाई हैं।
यह स्पॉट एक एंटीसाइक्लोन है, जो बृहस्पति के वायुमंडल में घूमता रहता है। इसका आकार इतना बड़ा है कि इसमें पूरी पृथ्वी समा सकती है। खगोलविदों ने इसे कम से कम 150-300 सालों से लगातार देखा है। पहले यह बहुत बड़ा था, लेकिन अब यह धीरे-धीरे सिकुड़ रहा है। नासा के जूनो यान ने साल 2018 में इसकी बेहतरीन तस्वीरें ली थीं, जिनमें रंगों को बेहतर तरीके से दिखाया गया था। जूनो ने बताया कि इस तूफान का आधार बहुत गहरा है, कुछ तूफान 100 किलोमीटर तक जाते हैं, जबकि विशाल लाल धब्बा 350 किलोमीटर से भी ज्यादा चला जाता है।
जूनो एक सौर ऊर्जा से चलने वाला यान है, जो बृहस्पति के चारों ओर लंबे चक्कर लगाता है। इसका मुख्य उद्देश्य बृहस्पति की उत्पत्ति, विकास और सौर मंडल के विशाल ग्रहों के रहस्य समझना है। हाल ही में नासा के हबल अंतरिक्ष दूरबीन ने भी इस स्पॉट के बारे में जानकारी दी, जिसके अनुसार, जीआरएस उतना स्थिर नहीं है जितना दिखता है। यह जेली के कटोरे की तरह हिलता-डुलता है। हबल की तस्वीरों से वैज्ञानिकों ने एक टाइम-लैप्स फिल्म बनाई, जिसमें दिखता है कि धब्बा हर 90 दिनों में आकार में फैलता और सिकुड़ता है। यह जब धीमा होता है, तो चौड़ा हो जाता है और तेज होने पर संकरा।
नासा के शोधकर्ता एमी साइमन ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया, "आउटर प्लैनेट एटमॉसफेयर लीगेसी प्रोग्राम के तहत हमने काम किया, जिसमें सामने आया कि इसकी गति में थोड़ा बदलाव आता है, लेकिन आकार का इस तरह बदलना अप्रत्याशित था। हबल की हाई रिजॉल्यूशन तस्वीरों से पहली बार साफ दिखा कि यह सिकुड़ता-फैलता है। अभी इसका कोई हाइड्रोडायनामिक स्पष्टीकरण नहीं मिला है।
वहीं, अल्ट्रावायलेट प्रकाश में देखने पर पता चला कि जब धब्बा सबसे बड़ा होता है, तो उसका केंद्र सबसे चमकीला होता है, जिससे ऊपरी वायुमंडल में धुंध कम अवशोषित होती है। ये बदलाव रोजाना होते हैं और तूफान के रंग, आकार व गति में सूक्ष्म परिवर्तन दिखाते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह खोज पृथ्वी के तूफानों को समझने में मदद करेगी और अन्य तारों के ग्रहों के मौसम का अध्ययन आसान बनाएगी।
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