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वाशिंगटन डीसी: वैज्ञानिकों ने एक अध्ययन में पाया कि आमतौर पर इस्तेमाल किए जाने वाले फ्लू एंटीवायरल दवाएं H5N1 एवियन इन्फ्लूएंजा वायरस के खिलाफ प्रभावी नहीं हैं, जो गाय के दूध में पाया गया है। यह वायरस पहले से ही अमेरिका में डेयरी फार्मों में फैल रहा है और खेत के कर्मचारियों को संक्रमित कर रहा है।
H5N1 वायरस और एंटीवायरल दवाओं की सीमाएं
शोधकर्ताओं ने सेंट जूड चिल्ड्रन रिसर्च हॉस्पिटल में इस वायरस के संभावित इलाजों का अध्ययन किया। नतीजों से पता चला कि दो FDA-स्वीकृत एंटीवायरल दवाएं - ओसेल्टामिविर (टैमीफ्लू) और बैलोक्साविर (ज़ोफ़्लुज़ा) गंभीर H5N1 संक्रमण का प्रभावी रूप से इलाज नहीं कर पाईं।
मुख्य निष्कर्ष:
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वायरस का संक्रमण मार्ग (आंख, नाक, मुंह) उपचार की प्रभावशीलता को प्रभावित करता है।
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संक्रमित कच्चे दूध का सेवन करने से सबसे गंभीर संक्रमण देखा गया।
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बैलोक्साविर ने ओसेल्टामिविर की तुलना में वायरल लोड को अधिक कम किया, लेकिन दोनों पूरी तरह कारगर नहीं थे।
H5N1 संक्रमण और रोकथाम के उपाय
H5N1 वायरस का प्रकोप जारी है, और अब तक 60 से अधिक लोग संक्रमित हो चुके हैं। इनमें ज्यादातर वे लोग शामिल हैं जो डेयरी फार्मों में काम करते हैं या दूषित कच्चे दूध के संपर्क में आए।
रोकथाम के सुझाव:
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कच्चे दूध का सेवन न करें।
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डेयरी कर्मचारियों को सुरक्षा उपाय अपनाने चाहिए, जैसे मास्क और चश्मे का इस्तेमाल।
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खेतों में संक्रमण नियंत्रण उपायों को सख्त किया जाए।
वैज्ञानिकों की चेतावनी
सेंट जूड रिसर्च हॉस्पिटल के रिचर्ड वेबी, पीएचडी ने कहा, "H5N1 वायरस के इस नए स्ट्रेन का इलाज करना कठिन हो सकता है। रोकथाम ही सबसे प्रभावी उपाय है।"
हालांकि, H5N1 संक्रमण मनुष्यों में दुर्लभ है, लेकिन यह डेयरी फार्मों से जुड़े लोगों के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। वैज्ञानिक इस वायरस के प्रभावों को समझने और इसके खिलाफ प्रभावी उपचार विकसित करने में जुटे हुए हैं।





