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Washington वाशिंगटन: हाल ही में आयोजित 13वें गट माइक्रोबायोटा विश्व शिखर सम्मेलन में शोधकर्ताओं और चिकित्सकों ने आंत स्वास्थ्य, कोविड-19 के प्रभाव और पोषण पर नई वैज्ञानिक खोजों पर चर्चा की। इस सम्मेलन का आयोजन अमेरिकन गैस्ट्रोएंटरोलॉजिकल एसोसिएशन (AGA) और यूरोपियन सोसाइटी ऑफ न्यूरोगैस्ट्रोएंटरोलॉजी एंड मोटीलिटी (ESNM) द्वारा किया गया था। इस दौरान आंत में मौजूद बैक्टीरिया के प्रभाव, प्रोबायोटिक्स और पोषण से जुड़ी कई नई जानकारियां सामने आईं।
कोविड-19 और बच्चों में गट माइक्रोबायोम में बदलाव
एक अध्ययन में पाया गया कि कोविड-19 से संक्रमित बच्चों के गट माइक्रोबायोम में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिले, जो वयस्कों में होने वाले बदलावों से मिलते-जुलते हैं। शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन बच्चों को कोविड-19 हुआ था, उनमें लैक्टिकैसिबैसिलस और बिफीडोबैक्टीरियम जैसे फायदेमंद बैक्टीरिया की मात्रा उन बच्चों की तुलना में काफी कम थी, जिन्हें यह संक्रमण नहीं हुआ था।
ये बैक्टीरिया सूजन को कम करने और आंत के स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद करते हैं। जिन बच्चों में कोविड के लक्षण लंबे समय तक बने रहे, उनमें सूजन बढ़ाने वाले तत्व अधिक पाए गए और आंत के कार्य में भी कमी देखी गई। वैज्ञानिकों ने सुझाव दिया कि भविष्य में कोविड-19 के प्रभाव को कम करने के लिए माइक्रोबायोम-लक्षित उपचारों पर अधिक शोध की आवश्यकता होगी।
पौधे और डेयरी-आधारित प्रोटीन पर नई खोज
एक अन्य अध्ययन में 35 पौधे-आधारित और 23 डेयरी-आधारित खाद्य पदार्थों का विश्लेषण किया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि इन खाद्य पदार्थों में से लगभग 50% में S100B नामक एक विशेष प्रोटीन मौजूद था। यह प्रोटीन गट बैक्टीरिया के साथ संपर्क करके आंत के अच्छे स्वास्थ्य को बढ़ावा दे सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि S100B प्रोटीन सूजन आंत्र रोग (IBD) को प्रभावित कर सकता है। इस अध्ययन के निष्कर्षों के आधार पर भविष्य में न्यूट्रास्युटिकल्स और आहार पूरक उत्पादों में S100B प्रोटीन का उपयोग किया जा सकता है।
प्रोबायोटिक्स से कोलोनोस्कोपी के बाद तेजी से रिकवरी
गट माइक्रोबायोम पर किए गए एक अन्य महत्वपूर्ण अध्ययन में यह पाया गया कि प्रोबायोटिक्स कोलोनोस्कोपी के बाद मरीजों की रिकवरी में मदद कर सकते हैं। इस अध्ययन में 2,345 मरीजों को शामिल किया गया और 10 विभिन्न अध्ययनों का विश्लेषण किया गया।
अध्ययन में पाया गया कि प्रोबायोटिक्स लेने से पेट दर्द, सूजन और उल्टी की समस्या में सुधार हुआ। हालांकि, मतली, कब्ज, गैस या दस्त जैसी समस्याओं में कोई खास बदलाव नहीं देखा गया। फिर भी, शोधकर्ताओं ने इस निष्कर्ष पर जोर दिया कि प्रोबायोटिक्स का उपयोग कोलोनोस्कोपी जैसी प्रक्रियाओं से उबरने में मदद कर सकता है और मरीजों की रिकवरी को तेज कर सकता है।
निष्कर्ष
गट माइक्रोबायोम पर हुए इस वैश्विक सम्मेलन में कोविड-19, पोषण और प्रोबायोटिक्स के प्रभाव पर महत्वपूर्ण निष्कर्ष सामने आए। शोधकर्ताओं ने गट हेल्थ को बनाए रखने के लिए प्राकृतिक आहार, प्रोबायोटिक्स और माइक्रोबायोम-लक्षित उपचारों पर अधिक ध्यान देने की सिफारिश की।
यह सम्मेलन आंत स्वास्थ्य के क्षेत्र में भविष्य के चिकित्सीय और पोषण संबंधी अनुसंधानों के लिए एक नई दिशा प्रदान कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि गट माइक्रोबायोम के संतुलन को बनाए रखना संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है, और आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में और भी नए शोध सामने आ सकते हैं।





