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Science साइंस : भारत की स्वदेशी सैटेलाइट नेविगेशन प्रणाली ‘गगन’ (GAGAN) ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है, जिससे देश की तकनीकी क्षमता को नई मजबूती मिली है। इस उपलब्धि के बाद हवाई यात्रा पहले से अधिक सुरक्षित, सटीक और प्रभावी होने की उम्मीद जताई जा रही है। सरकार का कहना है कि यह प्रणाली भारत के सैटेलाइट नेविगेशन नेटवर्क को मजबूत करने के साथ-साथ एयर ट्रैफिक मैनेजमेंट को भी बेहतर बनाएगी।
‘गगन’ की इस सफलता को भारत के एविएशन सेक्टर में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। इसके जरिए देशभर में सैटेलाइट आधारित नेविगेशन सेवाओं का तेजी से विस्तार किया जा सकेगा, जिससे विमान संचालन अधिक सुरक्षित और आधुनिक तकनीक से जुड़ सकेगा।
सरकारी बयान के अनुसार, जून 2026 में ‘गगन’ ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की, जब नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने पहली बार किसी व्यावसायिक जेट विमान पर गगन की मदद से सैटेलाइट आधारित लैंडिंग सिस्टम अप्रोच का सफल परीक्षण किया। यह परीक्षण भारतीय एविएशन इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।
इस सफल परीक्षण के बाद भारत अब उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो गया है, जिनके पास स्वदेशी सैटेलाइट आधारित नेविगेशन और लैंडिंग तकनीक मौजूद है। इससे पहले तक हवाई नेविगेशन के लिए भारत को काफी हद तक विदेशी प्रणालियों पर निर्भर रहना पड़ता था।
सरकार का कहना है कि ‘गगन’ और भारत की अन्य स्वदेशी नेविगेशन प्रणाली NAVIC (Navigation with Indian Constellation) मिलकर देश के सैटेलाइट नेविगेशन इकोसिस्टम को और मजबूत बनाएंगे। इन दोनों प्रणालियों के संयुक्त उपयोग से भारत की विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम होगी और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस तकनीक के लागू होने से हवाई जहाजों की लैंडिंग और टेकऑफ अधिक सुरक्षित और सटीक हो सकेगा, खासकर उन क्षेत्रों में जहां मौसम की स्थिति चुनौतीपूर्ण होती है। इससे न केवल यात्रियों की सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि एयरलाइंस के संचालन की दक्षता भी बेहतर होगी।
‘गगन’ प्रणाली का उद्देश्य विमानन क्षेत्र में सटीक पोजिशनिंग, नेविगेशन और टाइमिंग सेवाएं प्रदान करना है। यह सिस्टम भारतीय वायु क्षेत्र में उड़ानों को अधिक सुरक्षित और आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
भारत पहले से ही अंतरिक्ष और सैटेलाइट तकनीक में लगातार प्रगति कर रहा है। ‘गगन’ की यह उपलब्धि इस दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखी जा रही है, जो आने वाले समय में देश को वैश्विक एविएशन तकनीक में और मजबूत स्थिति में ला सकती है।
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