विज्ञान

क्या आपको पता है ब्रह्मांड में एलियन की दुनिया कितनी है? नासा ने खोज निकाला

jantaserishta.com
27 Jan 2022 12:16 PM IST
क्या आपको पता है ब्रह्मांड में एलियन की दुनिया कितनी है? नासा ने खोज निकाला
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नई दिल्ली: क्या आपको पता है ब्रह्मांड में एलियन की दुनिया/ग्रह कितनी है? How Many Alien Worlds/Planets in the Universe? अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने इसका जवाब खोज लिया है. पिछले चार साल नासा और उससे जुड़े वैज्ञानिकों दिन-रात एक करके यह पता लगाया है कि हमारे ब्रह्मांड में कम से कम 5 हजार एलियन दुनिया हैं. इस काम में नासा की मदद की ट्रांसिटिंग एक्सोप्लैनेट सर्वे सैटेलाइट (TESS) ने.

असल में ये एलियन दुनिया या ग्रह जो हैं वो एक्सोप्लैनेट्स (Exoplanets) हैं. यानी हमारे सौर मंडल या आकाशगंगा से बाहर के ग्रह. TESS ने जब 5000 एलियन दुनिया को खोज लिया तो उसे नाम दिया गया TESS ऑबजेक्ट्स ऑफ इंट्रेस्ट (TOI). यानी वो बाहरी ग्रह जिनसे किसी न किसी तरह के सिग्नल मिल रहे हैं. अब वैज्ञानिक इन TOI's में से ग्रहों का चयन करेंगे और उनका विस्तृत अध्ययन करेंगे. ताकि पता चले कि वहां पर क्या है?
मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) की पोस्ट डॉक्टोरल फेलो मिशेल कुनीमोतो ने एक बयान में कहा कि पिछले साल हम 27 जनवरी तक TESS ने 2400 ऐसे ग्रह खोजे थे. असल में MIT के रिसर्चर ही TESS की टीम को लीड कर रहे हैं. इस प्रोजेक्ट का नाम है फेंट स्टार सर्च (Faint Star Search). मिशेल ने कहा कि पिछले एक साल में टेस ने काफी ज्यादा ग्रहों को खोजा है. अगले कुछ सालों में इनकी संख्या और बढ़ने वाली है.
जब से TESS लॉन्च हुआ है तब से लेकर अप्रैल 2018 तक 176 TOI को ग्रहों का दर्जा दिया गया है. क्योंकि किसी भी एक्सोप्लैनेट को खोजना थोड़ा आसान है, लेकिन उसके बारे में जानकारी जमा करके उसे ग्रह का दर्जा देना कठिन कार्य है. इसलिए एलियन दुनिया तेजी से मिलती रहेगी, लेकिन उनमें से ग्रहों का चयन करने में समय लगेगा.
TESS से पहले केपलर स्पेस टेलिस्कोप (Kepler Space Telescope) ने 2700 से ज्यादा एक्सोप्लैनेट्स की खोज की थी. जो अब तक पुख्ता नहीं हो पाए हैं. यानी अभी तक उन्हें ग्रहों का दर्जा नहीं दिया गया है. जबकि उसका ऑब्जरवेशन 2013 में पूरा हो गया था. अब भी इनकी जांच चल रही है. ग्रहों का दर्जा देने का काम जारी है.
जब TESS लॉन्च किया गया तो मिशन की समय सीमा दो साल थी. पहले आधे हिस्से में इसे दक्षिणी गोलार्ध की तरफ चक्कर लगाया. उसके बाद के हिस्से में इसने उत्तीर गोलार्ध की तरफ चक्कर लगाया. इस मिशन की समय सीमा जुलाई 2020 में बढ़ाई गई. फिलहाल वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि यह मिशन कम से कम 2025 तक तो काम करेगा ही.
टेस अंतरिक्ष में एक रोशनी या ग्रह की तरफ करीब एक महीने निहारता है. फिर उससे संबंधित डेटा कंट्रोल रूम में भेजता है. ताकि यह पता चल सके कि उस ग्रह के आसपास कोई सूरज जैसा तारा है या नहीं. इनमें से कई ग्रह तो ऐसे हैं जो अपने तारों के चारों तरफ 16 घंटे में अपना चक्कर पूरा कर लेते हैं.
TESS ने एक ऐसे खोज भी किए हैं, जिनमें पांच ग्रह एक तारे के चारों तरफ एक लयबद्ध तरीके से चक्कर लगा रहे हैं. ऐसा ग्रह जहां पर पानी के बादलों की उम्मीद है. इसके अलावा ऐसे ग्रह भी खोजे गए हैं, जिन्हें उनके तारे निगल ले रहे हैं. TOI की मैनेजर कैथरीन हेसे ने बताया कि अभी इस मिशन की समय सीमा को बढ़ाया गया है. अभी हमें और मल्टीप्लैनेट सिस्टम देखने को मिलेंगे.

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