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जनता से रिश्ता वेबडेस्क | कैक्टस (Cactus) का पौधा सूखे मरुस्थलों में पाया जाता है जो चरम गर्मी के मरुस्थल तक में मिल सकता है. यहां तक कि पृथ्वी के सबसे सूखे इलाके आटाकामा रेगिस्तान में भी इसकी प्रजातियां देखने को मिल जाती है. एक तरफ पृथ्वी के पर्यावरण (Environment) पर जलवायु परिवर्तन (Climate Change) का दुष्प्रभाव पड़ रहा है और दुनिया में ग्लोबलवार्मिंग बढ़ती जा रही है ऐसे में कैक्टस और उसकी प्रजातियों को खतरा हो, इस पर शायद ही यकीन किया जा सके. लेकिन यह सच है. नए अध्यन में बताया गया है कि कैक्टस की कई प्रजातियों पर जलवायु परिवर्तन की वजह से विलुप्त होना का खतरा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)
दुनिया के कई इलाकों में कैकटस (Cactus) एक सामान्य और आसानी से मिलने वाला पौधा है जिसके बारे में एक राय यही है कि वह अत्याधिक गर्मी (Extreme Heat) और कम बारिश वाले इलाकों में खुद को जिंदा रख सकता है. ऐसे में यह सोचना स्वाभाविक है जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के कारण जब पूरी पृथ्वी का ही तापमान बढ़ रहा है तो ऐसे में कैक्टस को कोई खतरा नहीं होना चाहिए. हाल ही में 'एलीवेटेड एक्स्टिंक्शन रिस्क ऑफ कैक्टी अंडर क्लाइमेंट चेंज' शीर्षक वाले हुए नए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने इसी विश्वास का परीक्षण किया. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)
अमेरिका के एरिजोना युनिवर्सिटी में इकोलॉजी एंड इवोल्यूशनरी बायोलॉजी के डॉक्टोरल छात्र माइकल पिलेट की अगुआई शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में यह जानने का प्रयास किया कि क्या कैक्टस (Cactus)को तेजी से गर्म होती जलवायु (Climate) में फायदा मिलता है. इसी हफ्ते नेचर प्लांट्स जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में शोधकर्ताओं ने कैक्टस की 408 प्रजातियों का अध्ययन किया जो कैक्टसक की एक चौथाई ज्ञात प्रजातियां (Species of Cactus) हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)
इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया कि उनकी पड़ताल के नतीजे सुझाते हैं कि जलवायु परिवर्तन Climate Change) कैक्टस (Cactus)की प्रजातियों के विलुप्त होने का प्रमुख कारक बन जाएगा. अध्ययन में शामिल की गईं कैक्टस की 60 से 90 प्रतिशत प्रजातियों पर जलवायु परिवर्तन और अथवा मानवजनित प्रक्रियाओं की वजह से नुकसान हो रहा है. यह इस पर निर्भर करता है कि इन प्रक्रियाओं पर इन प्रजातियों पर असर कैसे होता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)
ये नतीजे चौंकाने वाले लगते हैं, लेकिन कैक्टस (Cactus) और उनकी प्रजातियां केवल रेगिस्तान में ही नहीं ऊगती हैं. इस अध्ययन में भी इस बात को रेखांकित किया गया है कि कैक्कस की प्रजातियां जमीन और पहाड़ों में कहीं भी मिल सकते हैं. इसके अलावा जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के खतरे के कारण कैक्टस की बहुत सी प्रजातियों के पौधे कुछ विशेष जलवायु के हालात के मुताबिक खुद को ढाल रहे हैं. इनमें से बहुत से कैक्टस का विशेष तरह के पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) और जीवन इतिहास रहा है. और बहुत से कटबंधीय नमी वाले वनों और यहां तक की ठंडे वातावरण में भी पनपे हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)
अध्ययन में पाया गया है कि फ्लैरीडा, मध्य मैक्सिको, ब्राजील का अटलांटिक जंगल और ब्राजीली कैटिंगा के पूर्व इलाकों में कैक्टस (Cactus) बहुत प्रभावित हुए हैं. वहीं एरिजोना के मशहूर सैगॉरोस कैक्टस के विलुप्त होने की संभावना कम है. खतरे वाली कैक्टस की प्रजातियां ज्यादातर अमेरिका, दक्षिणी दक्षिण अमेरिका, ब्राजील के कैटिंगा के पश्चिमी इलाकों, ब्राजील के सेराडोके उत्तरी हिस्से और एंडीज की पतली पट्टी के इलाके शामिल हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)
पिछले एक दशक से कैक्टस (Cactus) पर काम कर रहीं डॉ गोच को कई विशेषज्ञों ने बताया है कि जब वे फिर से पहले से देखे गए कैक्टस के इलाके में जाते हैं तो कैक्टस (Species of Cactus) की संख्या उन्हें कम मिलती है. डॉ गोच इस नए अध्ययन में शामिल नहीं थीं. उन्हें इन विशेषज्ञों ने बताया कि कैक्टस मरने याकम होने का उन्हें कोई विशेष या स्थानीय कारण नजर नहीं आया इसलिए वे भी मानते हैं कि इसका कारण जलवायु परिवर्तन (Climate change) हो सकता है. वहीं एक सच यह भी है कि जो खुद को बदलाव के हिसाब से नहीं ढाल सकेगा वह खुद खत्म जाएगा. जलवायु परिवर्तन के संबंध में यह बात कैक्टस पर भी लागू होती है.
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