विज्ञान

Axiom स्पेस मिशन के कल लॉन्च की तैयारी, भारतीय एस्ट्रोनॉट शुभांशु शुक्ला क्रू में शामिल

Tara Tandi
25 Jun 2025 7:56 PM IST
Axiom स्पेस मिशन के कल लॉन्च की तैयारी, भारतीय एस्ट्रोनॉट शुभांशु शुक्ला क्रू में शामिल
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Science : अमेरकी स्पेस एजेंसी NASA ने बताया है कि इंटरनेशनल स्पेस मिशन (ISS) के लिए Axiom-4 मिशन को बुधवार को लॉन्च किया जा सकता है। इस मिशन के चार सदस्यीय क्रू में भारतीय एस्ट्रोनॉट Shubhanshu Shukla शामिल हैं। इस मिशन को कुछ मुश्किलों की वजह से इससे पहले कई बार टाला गया है।
NASA, Axiom Space औ बिलिनेयर Elon Musk की SpaceX ने इस मिशन के लिए 25 जून को बुधवार 12.01 PM (भारतीय समयानुसार) पर लॉन्च का टारगेट रखा है। अमेरिका में कैलिफोर्निया के Kennedy Space Centre से SpaceX का Falcon 9 रॉकेट इस मिशन के स्पेसक्राफ्ट Dragon के साथ उड़ान भरेगा। यह Dragon स्पेसक्राफ्ट की पहली और Falcon 9 रॉकेट की दूसरी उड़ान होगी। इस मिशन में शुक्ला के अलावा अमेरिका की Peggy Whitson, पोलैंड के Slawosz Uznanski Wisniewski और हंगरी के Tibor Kapu शामिल हैं। इन एस्ट्रोनॉट्स के साथ शून्य ग्रेविटी के उनके संकेतक के तौर पर Joy कहे जाने वाले एक स्वैन टॉय को भी भेजा जाएगा। इस मिशन के लिए क्रू ने कड़ी तैयारी की है। शुक्ला ने इसके लिए विदेश में लंबा प्रशिक्षण लिया है।
इस स्पेस मिशन को 29 मई को लॉन्च किया जाना था। हालांकि, इसके बाद इसे 8 जून, 10 जून और 11 जून और 19 जून और 22 जून को टाला गया था। इसमें मिशन कमाडंर की जिम्मेदारी अमेरिका की Peggy Whitson के पास होगी। अमेरिकी स्पेस इंफ्रास्ट्रक्चर डिवेलपर Axiom Space ने बताया है कि पिछले 40 वर्षों से अधिक में यह पहली बार है कि जब अमेरिका की सरकार ने भारत, पोलैंड या हंगरी के एस्ट्रोनॉट्स वाली एक स्पेसफ्लाइट के लिए स्वीकृति दी है। हाल ही में Axiom Space के प्रवक्ता ने NDTV को बताया कि इस मिशन में शामिल चारों एस्ट्रोनॉट्स का स्वास्थ्य अच्छा है और वे उत्साहित हैं। यह क्रू एक महीने से अधिक की अवधि से क्वारंटाइन में है।
भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री Rakesh Sharma ने 1984 में अंतरिक्ष में पहुंचकर इतिहास बनाया था। हालांकि, शुक्ला एक स्पेसक्राफ्ट के पहले भारतीय पायलट होंगे। इन एस्ट्रोनॉट्स को कड़ा प्रशिक्षण दिया गया है। ये ISS पर कई एक्सपेरिमेंट्स करेंगे। इनमें से सात एक्सपेरिमेंट्स की अगुवाई शुक्ला करेंगे। इस मिशन में 31 देशों की भागीदारी है। ये देश स्पेस में ह्युमन फिजियोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मैटीरियल्स साइंस और बायोलॉजिकल स्टडीज में अपना योगदान देंगे।
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