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विज्ञान
समुद्र में रंगों का अनोखा खेल, जलवायु के लिए क्यों जरूरी है 'फाइटोप्लांकटन'
jantaserishta.com
4 April 2026 11:11 AM IST

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नई दिल्ली: समुंद्र हो या पहाड़ पृथ्वी का कोना-कोना अपने अंदर रहस्य को सिमेटे हुए है। ऐसा ही रहस्य है समुद्र में रंगों के अनोखे खेल का अद्भुत नजारा दिखाता फाइटोप्लांकटन ब्लूम। जून 2025 में स्कॉटलैंड के शेटलैंड द्वीपों के पास उत्तरी सागर का पानी अचानक रंग-बिरंगा हो उठा। हरे और नीले रंगों का यह अद्भुत नजारा फाइटोप्लांकटन नामक सूक्ष्म जीवों के भारी ब्लूम की वजह से था। ये इतने छोटे होते हैं कि नंगी आंख से दिखाई नहीं देते, लेकिन जब इनकी संख्या अचानक बहुत बढ़ जाती है तो सैटेलाइट से भी साफ दिखने लगते हैं।
अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के लैंडसैट- 9 उपग्रह पर लगे ओएलआई-2 कैमरे ने 13 जून 2025 को एक तस्वीर खींची, जिसमें ब्लूम का हिस्सा करीब 160 किलोमीटर चौड़ा था। सैटेलाइट से ली गई तस्वीरों में पानी हरा और कुछ जगहों पर नीला, सफेद नजर आ रहा था।
वैज्ञानिकों के अनुसार, हरे रंग ज्यादातर डायटम नामक फाइटोप्लांकटन की वजह से थे। डायटम में सिलिका के खोल होते हैं और इनमें क्लोरोफिल बहुत ज्यादा मात्रा में पाया जाता है। ये वसंत ऋतु में खूब पनपते हैं, लेकिन कभी-कभी गर्मियों में भी दिख जाते हैं। इस ब्लूम में कोकोलिथोफोर नामक फाइटोप्लांकटन भी शामिल थे, इनके कवच पर चमकदार कैल्शियम कार्बोनेट की छोटी-छोटी प्लेट होती हैं, जो पानी को दूधिया या फिरोजी नीला रंग दे देती हैं। यह प्रजाति उत्तरी सागर में आम है और पहले भी 2021 में स्कॉटलैंड के तटीय इलाकों में ऐसी घटना देखी गई थी।
सबसे पहले सरल तरीके से समझने की जरूरत है कि फाइटोप्लांकटन क्या हैं? यह ग्रीक शब्द ‘फाइटो’ (पौधा) और ‘प्लैंकटन’ (भटकने वाला) से मिलकर बना यह नाम सूक्ष्म जीवों के लिए इस्तेमाल होता है। ये खारे और मीठे पानी दोनों जगह रहते हैं। इनमें सायनोबैक्टीरिया, डायटम, डिनोफ्लैजेलेट्स, हरे शैवाल और कोकोलिथोफोर शामिल हैं। ज्यादातर एककोशिकीय होते हैं। ये स्थलीय पौधों की तरह सूर्य के प्रकाश से ऊर्जा बनाते हैं, जिसे प्रकाश संश्लेषण कहते हैं। वे कार्बन डाइऑक्साइड सोखते हैं और ऑक्सीजन छोड़ते हैं। इनकी वृद्धि के लिए सूर्य का प्रकाश, कार्बन डाइऑक्साइड और नाइट्रेट, फॉस्फेट, सिलिकेट जैसे पोषक तत्व जरूरी होते हैं। कुछ प्रजातियां नाइट्रोजन को स्थिर भी कर सकती हैं। अनुकूल मौसम में इनकी संख्या में विस्फोटक वृद्धि होती है, जिसे ब्लूम कहते हैं। यह सैकड़ों वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैल सकता है और कई हफ्तों तक रह सकता है, हालांकि हर जीव का जीवनकाल सिर्फ कुछ दिन का होता है।
फाइटोप्लांकटन समुद्री खाद्य शृंखला की नींव हैं। ये प्राथमिक उत्पादक हैं जो छोटे जूप्लैंकटन से लेकर विशाल व्हेल तक सभी जीवों को भोजन मुहैया कराते हैं। छोटी मछलियां इन्हें खाती हैं, फिर बड़ी मछलियां छोटी मछलियों को खाती हैं। ये पर्यावरण के लिए भी बेहद जरूरी हैं। प्रकाश संश्लेषण के जरिए ये कार्बन डाइऑक्साइड सोखते हैं।
मृत फाइटोप्लांकटन समुद्र के गहरे हिस्से में डूब जाते हैं और वहां कार्बन लंबे समय तक जमा रहता है। इस तरह ये जलवायु नियंत्रण में मदद करते हैं। हालांकि, कुछ फायदे के साथ कुछ नुकसान भी हैं। कुछ प्रजातियां जहरीले पदार्थ बनाती हैं, जिन्हें ‘रेड टाइड’ कहा जाता है। ये मछलियों और इंसानों के लिए खतरनाक हो सकते हैं। बड़े ब्लूम के बाद मृत जीवों के सड़ने से पानी में ऑक्सीजन कम हो जाता है और ‘मृत क्षेत्र’ बन जाते हैं, जहां अन्य जीव नहीं रह पाते।
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