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धर्म :सावन महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी का त्योहार मनाया जाता है। इस वर्ष नाग पंचमी 17 अगस्त, सोमवार को मनाई जाएगी। पंचमी तिथि 16 अगस्त को शाम 4 बजकर 52 मिनट से प्रारंभ होकर 17 अगस्त को शाम 5 बजे तक रहेगी। हिंदू धर्म में किसी भी पर्व की तारीख तय करने के लिए उदयातिथि को विशेष महत्व दिया जाता है। इसी आधार पर नाग पंचमी का पर्व 17 अगस्त को मनाया जाएगा।
इस बार नाग पंचमी सोमवार को पड़ने के कारण इसका धार्मिक महत्व और बढ़ गया है। सोमवार भगवान शिव को समर्पित होता है, जबकि नाग देवता को भगवान शिव का प्रिय और उनके आभूषण के रूप में माना गया है। ऐसे में श्रद्धालु नाग देवता की पूजा के साथ भगवान शिव का अभिषेक भी कर सकते हैं। मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक पूजा करने से परिवार में सुख, शांति और समृद्धि आती है तथा नाग संबंधी दोषों से राहत मिलती है।
पूजा का शुभ मुहूर्त
नाग पंचमी पर पूजा का शुभ समय 17 अगस्त को सुबह 5 बजकर 51 मिनट से सुबह 8 बजकर 29 मिनट तक रहेगा। इस प्रकार श्रद्धालुओं को पूजा के लिए कुल 2 घंटे 37 मिनट का समय मिलेगा। भक्त इस अवधि में नाग देवता की पूजा और भगवान शिव का जलाभिषेक कर सकते हैं।
पूजा करने के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद घर के पूजा स्थल की सफाई करके नाग देवता की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। नाग देवता को जल, दूध, हल्दी, कुश, फूल और अन्य पूजन सामग्री अर्पित की जा सकती है। इसके बाद दीपक जलाकर नाग देवता के मंत्रों का जाप करें और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करें।
भगवान शिव की पूजा के दौरान शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और आक के फूल चढ़ाए जा सकते हैं। श्रद्धालु “ॐ नमः शिवाय” मंत्र या महामृत्युंजय मंत्र का जाप भी कर सकते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नाग पंचमी पर शिव और नाग देवता की संयुक्त आराधना विशेष फल प्रदान करती है।
राहुकाल का रखें ध्यान
17 अगस्त को राहुकाल सुबह के समय पड़ने की संभावना है। राहुकाल में किसी नए या शुभ कार्य की शुरुआत करने से बचने की परंपरा है। हालांकि, अलग-अलग शहरों में सूर्योदय के समय के अनुसार राहुकाल में कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है। इसलिए श्रद्धालुओं को अपने शहर के स्थानीय पंचांग के अनुसार सही समय की जानकारी जरूर प्राप्त करनी चाहिए।
जो श्रद्धालु राहुकाल से बचकर पूजा करना चाहते हैं, वे सुबह निर्धारित शुभ मुहूर्त में राहुकाल शुरू होने से पहले पूजा संपन्न कर सकते हैं। दैनिक पूजा और भगवान का स्मरण राहुकाल में भी किया जा सकता है, लेकिन विशेष अनुष्ठान स्थानीय विद्वान या पंचांग की सलाह के अनुसार करना बेहतर माना जाता है।
रवि योग और शुभ योग का संयोग
इस वर्ष नाग पंचमी पर रवि योग और शुभ योग का संयोग भी बन रहा है। रवि योग सुबह 5 बजकर 51 मिनट से 8 बजकर 4 मिनट तक रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार रवि योग में किए गए शुभ कार्यों में सफलता मिलने की संभावना बढ़ती है। इस योग में भगवान शिव और नाग देवता की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है।
नाग पंचमी के दिन जीवित सांप को दूध पिलाने से बचना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार दूध सांपों का प्राकृतिक आहार नहीं है और इससे उन्हें नुकसान पहुंच सकता है। इसके स्थान पर नाग देवता की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दूध अर्पित किया जा सकता है। इस दिन किसी भी सांप या अन्य जीव-जंतु को हानि नहीं पहुंचानी चाहिए।
श्रद्धालु जरूरतमंद लोगों को भोजन, वस्त्र या अपनी क्षमता के अनुसार दान भी कर सकते हैं। जिन लोगों की कुंडली में कालसर्प योग या नाग दोष होने की मान्यता है, वे योग्य ज्योतिषी या विद्वान की सलाह के बाद पूजा और उपाय कर सकते हैं। नाग पंचमी प्रकृति, जीव-जंतुओं और भारतीय धार्मिक परंपराओं के प्रति सम्मान व्यक्त करने का भी पर्व है।
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