धर्म-अध्यात्म

दिवाली पर इस शुभ मुहूर्त में करें लक्ष्मी पूजन, जानें पूजा का सही समय

Rajeshwari Nishad
8 Nov 2026 2:19 PM IST
दिवाली पर इस शुभ मुहूर्त में करें लक्ष्मी पूजन, जानें पूजा का सही समय
x
Diwali Puja 2026: हिंदू धर्म में दीपावली का पर्व सुख, समृद्धि, धन और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। इस दिन माता लक्ष्मी, भगवान गणेश और धन के देवता कुबेर की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। वहीं, देवी काली की उपासना के लिए रात्रिकाल को विशेष महत्व दिया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दिवाली की रात शुभ मुहूर्त में विधि-विधान से पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का आगमन होता है।
इस वर्ष रविवार, 8 नवंबर 2026 को दीपावली मनाई जा रही है। ऐसे में श्रद्धालुओं के मन में सबसे बड़ा सवाल है कि लक्ष्मी-गणेश की पूजा कब करें, स्थिर लग्न कितने बजे से शुरू होगा और निशीथ एवं महानिशीथ काल में किस देवी-देवता की पूजा करना शुभ माना जाता है।
पूजा के समय का निर्धारण स्थानीय सूर्योदय, सूर्यास्त, अमावस्या तिथि और पंचांग के आधार पर होता है। इसलिए अलग-अलग शहरों में मुहूर्त में कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है।
दिवाली पूजा के प्रमुख शुभ मुहूर्त
पूजा काल शुभ समय
अमावस्या प्रारंभ 8 नवंबर, सुबह 11:27 बजे
अमावस्या समाप्त 9 नवंबर, दोपहर 12:31 बजे
प्रदोष काल शाम 5:24 से 7:57 बजे
लक्ष्मी-गणेश पूजा शाम 5:49 से 7:48 बजे
वृषभ स्थिर लग्न शाम 5:49 से 7:48 बजे
निशीथ मुहूर्त रात 11:22 से 12:13 बजे
महानिशीथ मुहूर्त रात 11:22 से 12:13 बजे
सिंह स्थिर लग्न 9 नवंबर, रात 12:16 से 2:26 बजे
प्रदोष काल में लक्ष्मी-गणेश पूजा का विशेष महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दीपावली पर माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा के लिए प्रदोष काल अत्यंत शुभ माना जाता है। यह समय सूर्यास्त के बाद प्रारंभ होता है। इस दौरान घरों में दीपक जलाए जाते हैं और माता लक्ष्मी से धन, सुख एवं समृद्धि की कामना की जाती है।
रायपुर में रविवार को सूर्यास्त शाम 5 बजकर 24 मिनट पर होगा। इसके बाद प्रदोष काल शुरू होगा। शाम 5 बजकर 49 मिनट से 7 बजकर 48 मिनट तक वृषभ लग्न रहेगा। यही समय गृहस्थ परिवारों के लिए लक्ष्मी-गणेश और कुबेर पूजा का विशेष शुभ मुहूर्त है।
स्थिर लग्न में पूजा क्यों मानी जाती है लाभदायक?
ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार वृषभ और सिंह स्थिर राशियां हैं। स्थिर लग्न में पूजा करने का उद्देश्य घर में धन, समृद्धि और खुशहाली की स्थिरता की कामना करना है।
दिवाली पर शाम के समय वृषभ लग्न होने से इसे गृहस्थों के लिए प्राथमिकता दी जाती है। वहीं मध्यरात्रि के बाद सिंह लग्न में भी विशेष साधना और पूजा का विधान कुछ परंपराओं में मिलता है।
निशीथ और महानिशीथ काल में देवी काली की पूजा
दिवाली की रात देवी काली की पूजा का भी विशेष महत्व है। खासकर पश्चिम बंगाल सहित कुछ क्षेत्रों में अमावस्या की रात काली पूजा की परंपरा है।
रायपुर के पंचांग के अनुसार निशीथ मुहूर्त रात 11 बजकर 22 मिनट से शुरू होकर 9 नवंबर की रात 12 बजकर 13 मिनट तक रहेगा। इसी अवधि को संबंधित पंचांग में महानिशीथ पूजा मुहूर्त भी बताया गया है। इस दौरान देवी काली की विशेष आराधना की जा सकती है।
दिवाली पर शुभ चौघड़िया का समय
- सुबह चर, लाभ और अमृत का शेष समय: 11:27 से 11:47 बजे।
- दोपहर शुभ चौघड़िया: 1:11 से 2:36 बजे।
- शाम शुभ, अमृत और चर चौघड़िया: 5:24 से रात 10:12 बजे।
- रात्रि लाभ चौघड़िया: 9 नवंबर, रात 1:23 से 2:59 बजे।
- प्रातः शुभ चौघड़िया: 9 नवंबर, सुबह 4:35 से 6:10 बजे।
हालांकि, लक्ष्मी पूजा के लिए केवल चौघड़िया देखकर समय तय करने के बजाय प्रदोष काल और स्थिर लग्न को अधिक महत्व दिया जाता है।
लक्ष्मी, गणेश और कुबेर की पूजा कैसे करें?
दिवाली की शाम सबसे पहले घर और पूजा स्थल की सफाई करें। पूजा की चौकी पर स्वच्छ लाल या पीला वस्त्र बिछाकर भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें। साथ में भगवान कुबेर का चित्र या प्रतीक भी रख सकते हैं।
पूजा के दौरान दीपक जलाएं और फूल, अक्षत, रोली, चंदन, फल एवं मिठाई अर्पित करें। सबसे पहले भगवान गणेश का स्मरण करें। इसके बाद माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा करें। श्रद्धालु अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार मंत्र जाप और आरती कर सकते हैं।
मान्यता है कि भगवान गणेश की पूजा से विघ्न दूर होते हैं, माता लक्ष्मी की आराधना से सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है और कुबेर पूजा धन के संरक्षण की कामना से की जाती है।
Next Story