धर्म-अध्यात्म

ललिता सप्तमी पर करें ललिता जी की आराधना जानें महत्व

nidhi
17 Sept 2026 7:21 AM IST
ललिता सप्तमी पर करें ललिता जी की आराधना जानें महत्व
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ललिता सप्तमी 2026
हिंदू पंचांग के अनुसार ललिता सप्तमी का पर्व भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी की प्रिय सखी ललिता जी को समर्पित होता है। यह पावन दिन भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जाता है। वैष्णव परंपरा में इस दिन ललिता सखी की विशेष पूजा-अर्चना का महत्व बताया गया है।
ललिता जी को राधा रानी की अष्ट सखियों में प्रमुख माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वे राधा-कृष्ण की दिव्य लीलाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। भक्त इस दिन सुख, शांति और भक्ति भाव की प्राप्ति के लिए ललिता जी की आराधना करते हैं।
ललिता सप्तमी का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ललिता जी राधा रानी की सबसे प्रिय सखियों में से एक हैं। उन्हें राधा-कृष्ण भक्ति की प्रमुख सेविका माना जाता है। ललिता सप्तमी के दिन पूजा करने से भक्तों को भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी की कृपा प्राप्त होने की मान्यता है।
इस दिन मंदिरों में विशेष पूजा, भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। वृंदावन और ब्रज क्षेत्र में इस पर्व का विशेष महत्व माना जाता है।
पूजा का शुभ समय
ललिता सप्तमी के दिन भक्त सुबह स्नान करने के बाद पूजा का संकल्प लेते हैं। इसके बाद राधा-कृष्ण और ललिता जी की पूजा की जाती है।
पूजा में पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य और अन्य पूजन सामग्री अर्पित की जाती है। भक्त ललिता जी से भक्ति और आध्यात्मिक उन्नति की कामना करते हैं।
पूजा विधि
सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
पूजा स्थल पर राधा-कृष्ण और ललिता जी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
दीप जलाकर पुष्प और फल अर्पित करें।
ललिता जी की कथा और मंत्रों का पाठ करें।
भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी का स्मरण करें।
ब्रज में विशेष आयोजन
ललिता सप्तमी के अवसर पर वृंदावन, बरसाना और आसपास के ब्रज क्षेत्रों में विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं। मंदिरों में सजावट, भजन और कीर्तन के माध्यम से भक्त इस पर्व को श्रद्धा के साथ मनाते हैं।
यह पर्व राधा-कृष्ण की प्रेम और भक्ति परंपरा से जुड़ा हुआ है। भक्त मानते हैं कि ललिता जी की आराधना से जीवन में प्रेम, समर्पण और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है।
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