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Religion धर्म : 17 जुलाई 2026 को आषाढ़ शुक्ल चतुर्थी तिथि पर विनायक चतुर्थी का पर्व मनाया जा रहा है। इस बार यह पावन तिथि शुक्रवार के दिन गुप्त नवरात्रि के दौरान पड़ रही है, जिसे ज्योतिष और धार्मिक दृष्टि से बेहद शुभ संयोग माना जा रहा है। मान्यता है कि जब गणेश चतुर्थी और गुप्त नवरात्रि जैसे धार्मिक पर्व एक साथ आते हैं, तो पूजा-पाठ और साधना का महत्व कई गुना बढ़ जाता है।
गुप्त नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा की विशेष साधना की जाती है। वहीं विनायक चतुर्थी पर भगवान गणेश की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व होता है। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और बुद्धि, ज्ञान एवं सफलता का देवता माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन श्रद्धापूर्वक गणेश जी की पूजा करने से जीवन की परेशानियां दूर होती हैं और सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस बार शुक्रवार के दिन विनायक चतुर्थी पड़ने से इसका महत्व और भी बढ़ गया है। शुक्रवार का संबंध माता लक्ष्मी से माना जाता है, इसलिए गणेश जी के साथ मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए भी यह दिन शुभ माना जा रहा है। भक्त इस दिन भगवान गणेश की पूजा करके आर्थिक परेशानियों से मुक्ति और जीवन में सफलता की कामना कर सकते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार विनायक चतुर्थी पर शाम के समय गणेश पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है। सूर्यास्त के बाद किया गया पूजन मन को शांत और एकाग्र करता है। माना जाता है कि शाम के समय विधि-विधान से गणेश जी की आराधना करने से बाधाएं दूर होती हैं और नई शुरुआत के लिए सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।
शाम की पूजा के लिए सबसे पहले घर और पूजा स्थान की साफ-सफाई करनी चाहिए। इसके बाद स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल पर भगवान गणेश की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। भगवान गणेश को जल, दूध और पंचामृत से स्नान कराएं। इसके बाद उन्हें दूर्वा, सिंदूर, लाल फूल, मोदक और लड्डू का भोग अर्पित करें।
गणेश पूजा के दौरान "ॐ गं गणपतये नमः" मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। इसके बाद भगवान गणेश की आरती करें और अपनी मनोकामना मन में रखकर प्रार्थना करें। पूजा समाप्त होने के बाद प्रसाद परिवार के सदस्यों और अन्य लोगों में बांटना चाहिए।
विनायक चतुर्थी पर गणेश जी को दूर्वा अर्पित करने का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि भगवान गणेश को दूर्वा बहुत प्रिय होती है। शाम की पूजा के दौरान पांच दूर्वा लेकर उन्हें जोड़कर भगवान गणेश के मस्तक पर चढ़ाना शुभ माना जाता है। ध्यान रखें कि दूर्वा को भगवान गणेश के चरणों में नहीं रखना चाहिए।
दूर्वा अर्पित करते समय "इदं दुर्वादलं ऊं गं गणपतये नमः" मंत्र का जाप करने से भगवान गणेश की कृपा प्राप्त होने की मान्यता है। धार्मिक विश्वास के अनुसार इस उपाय से बुद्धि, ज्ञान और निर्णय लेने की क्षमता में वृद्धि होती है तथा जीवन में आने वाली परेशानियां कम होती हैं।
इसके अलावा इस दिन गणेश जी को लाल फूल अर्पित करना, मोदक का भोग लगाना और जरूरतमंदों को दान करना भी शुभ माना जाता है। भक्त अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार पूजा और धार्मिक कार्य कर सकते हैं।
कुल मिलाकर 17 जुलाई 2026 की विनायक चतुर्थी गुप्त नवरात्रि और शुक्रवार के शुभ संयोग के कारण विशेष मानी जा रही है। इस दिन भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा करने से जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और सफलता की कामना की जाती है। हालांकि धार्मिक मान्यताएं आस्था पर आधारित होती हैं, इसलिए पूजा और उपाय श्रद्धा एवं विश्वास के साथ करना चाहिए।





