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धर्म-अध्यात्म
जन्माष्टमी व्रत में सात्विक भोजन क्यों जरूरी जानें सही नियम
nidhi
3 Sept 2026 12:19 PM IST

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कृष्ण जन्माष्टमी उपवास
नई दिल्ली: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व देशभर में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। इस दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के लिए व्रत रखते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जन्माष्टमी व्रत में सात्विक भोजन का विशेष महत्व होता है। माना जाता है कि सात्विक आहार शरीर को शुद्ध रखने के साथ मन को भी शांत और सकारात्मक बनाता है।
व्रत के दौरान भोजन केवल शरीर की जरूरत पूरी करने का माध्यम नहीं माना जाता, बल्कि इसे साधना और भक्ति का हिस्सा माना जाता है। इसलिए इस दिन भोजन की शुद्धता, समय और नियमों का विशेष ध्यान रखा जाता है।
सात्विक भोजन क्यों माना जाता है जरूरी?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सात्विक भोजन मन में शांति, संयम और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने में सहायक होता है। जन्माष्टमी जैसे धार्मिक व्रत में भक्त भगवान श्रीकृष्ण की आराधना करते हुए शरीर और मन को पवित्र रखने का प्रयास करते हैं।
सात्विक भोजन में ताजे फल, दूध, दही, घी, मखाना, साबूदाना, कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा और सूखे मेवे जैसी चीजों को शामिल किया जाता है।
ऐसा भोजन हल्का माना जाता है और व्रत के दौरान शरीर को ऊर्जा बनाए रखने में मदद कर सकता है।
व्रत में क्या खा सकते हैं?
जन्माष्टमी के उपवास में श्रद्धालु अपनी परंपरा और स्वास्थ्य के अनुसार अलग-अलग प्रकार के सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं।
फल और फलों का रस
दूध और दूध से बनी चीजें
मखाने की खीर
साबूदाने की खिचड़ी
कुट्टू या सिंघाड़े के आटे की रोटी
आलू और शकरकंद
सूखे मेवे
नारियल पानी
इन खाद्य पदार्थों को सामान्य रूप से व्रत के दौरान ग्रहण किया जाता है।
किन चीजों से करना चाहिए परहेज?
जन्माष्टमी व्रत में कई लोग अनाज, नमक और तामसिक भोजन से दूरी रखते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार व्रत के दौरान कुछ चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए।
इनमें शामिल हैं—
मांसाहारी भोजन
प्याज और लहसुन
शराब और नशीली चीजें
अधिक तला-भुना भोजन
पैकेट वाले जंक फूड
हालांकि व्रत के नियम अलग-अलग परंपराओं में अलग हो सकते हैं।
सेंधा नमक का महत्व
जन्माष्टमी व्रत में सामान्य नमक की जगह सेंधा नमक का प्रयोग करने की परंपरा है। इसे व्रत के लिए उपयुक्त माना जाता है।
साबूदाना खिचड़ी, आलू की सब्जी और अन्य व्रत के व्यंजनों में सेंधा नमक का इस्तेमाल किया जाता है।
उपवास के दौरान रखें इन बातों का ध्यान
व्रत रखने वालों को केवल भोजन ही नहीं बल्कि अपनी दिनचर्या का भी ध्यान रखना चाहिए।
पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं
बहुत अधिक देर तक भूखे रहने से बचें
कमजोरी महसूस होने पर स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें
फल और पौष्टिक चीजों का सेवन करते रहें
पूजा और ध्यान में मन लगाएं
स्वास्थ्य की स्थिति के अनुसार व्रत रखने का तरीका बदलना जरूरी हो सकता है।
व्रत खोलने की सही विधि
जन्माष्टमी पर कई भक्त आधी रात भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के बाद व्रत खोलते हैं। पूजा, आरती और भोग लगाने के बाद प्रसाद ग्रहण करने की परंपरा है।
व्रत खोलते समय भी हल्का और सात्विक भोजन लेना बेहतर माना जाता है। अचानक भारी भोजन करने से बचना चाहिए।
भगवान कृष्ण को प्रिय हैं ये भोग
जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण को माखन मिश्री, पंजीरी, पंचामृत, फल और मिठाई का भोग लगाया जाता है।
मान्यता है कि भगवान कृष्ण को शुद्ध और प्रेम से बनाया गया भोग प्रिय होता है। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार कान्हा को अलग-अलग प्रकार के व्यंजन अर्पित करते हैं।
आस्था के साथ स्वास्थ्य का भी रखें ध्यान
धार्मिक दृष्टि से व्रत आत्मसंयम और भक्ति का प्रतीक माना जाता है, लेकिन स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी जरूरी है।
जो लोग किसी बीमारी से पीड़ित हैं, बुजुर्ग हैं या नियमित दवाएं लेते हैं, उन्हें व्रत रखने से पहले अपनी स्थिति का ध्यान रखना चाहिए।
जन्माष्टमी का व्रत श्रद्धा, संयम और भक्ति का पर्व है। सात्विक भोजन के साथ सकारात्मक विचार और भगवान श्रीकृष्ण की आराधना इस पर्व को और विशेष बना देते हैं।
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