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धर्म-अध्यात्म
श्रीकृष्ण को क्यों प्रिय है तुलसी जन्माष्टमी पर जरूर जानें इसका महत्व
nidhi
2 Sept 2026 1:31 PM IST

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जन्माष्टमी
धर्म : श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में पूरे देश में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। साल 2026 में जन्माष्टमी 4 सितंबर, शुक्रवार को मनाई जाएगी। इस दिन श्रद्धालु उपवास रखते हैं और मध्यरात्रि में लड्डू गोपाल का अभिषेक, श्रृंगार, आरती और भोग लगाकर जन्मोत्सव मनाते हैं। जन्माष्टमी की पूजा में माखन-मिश्री, पंजीरी, फल और मिठाइयों के साथ एक छोटी-सी चीज का विशेष महत्व है—तुलसी दल। धार्मिक परंपरा में श्रीकृष्ण के भोग में तुलसी अर्पित करना अत्यंत शुभ माना गया है।
श्रीकृष्ण को क्यों प्रिय है तुलसी?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है। वैष्णव परंपरा में तुलसी को ‘विष्णुप्रिया’ कहा जाता है और भगवान विष्णु की पूजा में इसका विशेष स्थान है। इसी कारण श्रीकृष्ण की पूजा और उन्हें लगाए जाने वाले भोग में भी तुलसी दल अर्पित करने की परंपरा है।
पद्म पुराण और स्कंद पुराण से जुड़ी धार्मिक परंपराओं में तुलसी को भगवान विष्णु की आराधना में अत्यंत पुण्यदायी बताया गया है। इसी संदर्भ में प्रसिद्ध श्लोक ‘तुलसीदल-मात्रेण जलस्य चुलुकेन वा…’ का उल्लेख किया जाता है, जिसका भाव यह है कि भगवान भक्त द्वारा श्रद्धा से अर्पित तुलसी दल और जल से भी प्रसन्न हो जाते हैं।
जन्माष्टमी के भोग में जरूर रखें तुलसी
जन्माष्टमी पर भक्त लड्डू गोपाल को माखन-मिश्री, पंजीरी, पंचामृत, मेवे, फल और अलग-अलग मिठाइयों का भोग लगाते हैं। धार्मिक परंपरा के अनुसार इन भोगों के साथ तुलसी दल अर्पित किया जाता है। जन्माष्टमी की पूजा विधि से जुड़ी मान्यताओं में भी प्रत्येक भोग में तुलसी शामिल करने का विशेष महत्व बताया गया है।
तुलसी को केवल एक पौधे के रूप में नहीं बल्कि पवित्रता, भक्ति और समर्पण के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। इसलिए जन्माष्टमी के दिन श्रीकृष्ण के चरणों में तुलसी दल चढ़ाने और भोग में तुलसी रखने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है।
तुलसी और देवी वृंदा की कथा
पौराणिक मान्यताओं में तुलसी का संबंध देवी वृंदा से बताया जाता है। कथा के अनुसार वृंदा भगवान विष्णु की परम भक्त थीं। धार्मिक कथाओं में वर्णन मिलता है कि बाद में उन्हें तुलसी के रूप में विशेष स्थान मिला और भगवान विष्णु की आराधना में तुलसी को प्रिय माना गया। इसी मान्यता के कारण विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण को भी तुलसी अर्पित की जाती है।
जन्माष्टमी पर तुलसी तोड़ने से पहले जानें नियम
धार्मिक परंपराओं में तुलसी के पत्ते तोड़ने को लेकर भी कुछ नियम बताए गए हैं। कई परंपराओं में रात के समय तुलसी दल तोड़ने से बचने और साफ हाथों से पत्ते लेने की सलाह दी जाती है। जन्माष्टमी पर पूजा के लिए तुलसी पहले से रखी जा सकती है। कुछ धार्मिक मान्यताओं में पर्व के दिन तुलसी के पत्ते न तोड़ने की भी सलाह दी जाती है, इसलिए अपने परिवार या संप्रदाय की परंपरा का पालन करना बेहतर है।
जन्माष्टमी पर श्रद्धा से किया गया पूजन सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। तुलसी दल श्रीकृष्ण के प्रति प्रेम और समर्पण का प्रतीक है। यही कारण है कि माखन-मिश्री से लेकर पंचामृत और अन्य नैवेद्य तक में तुलसी रखकर भगवान को अर्पित करने की परंपरा है।
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