धर्म-अध्यात्म

कान्हा को क्यों प्रिय है वैजयंती माला जानें इसका अनोखा रहस्य

nidhi
4 Sept 2026 1:20 PM IST
कान्हा को क्यों प्रिय है वैजयंती माला जानें इसका अनोखा रहस्य
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श्रीकृष्ण की वैजयंती माला
भगवान श्रीकृष्ण के श्रृंगार में मोर मुकुट, बांसुरी और वैजयंती माला का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वैजयंती माला भगवान श्रीकृष्ण को अत्यंत प्रिय है और वह इसे अपने गले में धारण करते थे। इसे विजय, सौभाग्य और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।
वैजयंती माला का क्या है अर्थ?
‘वैजयंती’ शब्द का अर्थ होता है विजय दिलाने वाली। मान्यता है कि यह माला वैजयंती के बीजों से बनाई जाती है। इसके चमकदार बीजों को शुभ और पवित्र माना जाता है।
कहा जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण जब इसे धारण करते थे तो यह उनके दिव्य स्वरूप की शोभा को और बढ़ाती थी।
श्रीकृष्ण को क्यों प्रिय है यह माला?
धार्मिक कथाओं के अनुसार, वैजयंती माला प्रेम, भक्ति और विजय का प्रतीक है। मान्यता है कि यह माला भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण दोनों को प्रिय है। कुछ कथाओं में इसे राधा-कृष्ण के प्रेम और आध्यात्मिक संबंध से भी जोड़ा जाता है।
पंचतत्वों से जुड़ा रहस्य
कुछ धार्मिक मान्यताओं में कहा गया है कि वैजयंती माला में पांच प्रकार के तत्वों का प्रतीकात्मक समावेश होता है, जो पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश यानी पंचमहाभूतों को दर्शाते हैं। इसे प्रकृति और जीवन के संतुलन का प्रतीक माना जाता है।
वैजयंती माला पहनने के बताए गए लाभ
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वैजयंती माला धारण करने से—
मन को शांति मिलती है
आत्मविश्वास बढ़ता है
नकारात्मक ऊर्जा दूर होने की मान्यता है
भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त होती है
हालांकि ये बातें धार्मिक आस्था और मान्यताओं पर आधारित हैं।
जन्माष्टमी पर क्यों बढ़ जाता है महत्व?
जन्माष्टमी के दिन भक्त लड्डू गोपाल का विशेष श्रृंगार करते हैं। इस दौरान मोर मुकुट, बांसुरी और वैजयंती माला से कान्हा को सजाने की परंपरा है। भक्त इसे भगवान श्रीकृष्ण के प्रति प्रेम और भक्ति का प्रतीक मानते हैं।
वैजयंती माला सिर्फ एक आभूषण नहीं बल्कि श्रीकृष्ण की लीलाओं, प्रेम और विजय का प्रतीक मानी जाती है, जो भक्तों को भक्ति और सकारात्मकता का संदेश देती है।
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