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धर्म-अध्यात्म
हरतालिका तीज पर क्यों रखा जाता है निर्जला व्रत जानें इसकी खास वजह
nidhi
9 Sept 2026 11:47 AM IST

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सोलह श्रृंगार का महत्व
नई दिल्ली: हिंदू धर्म में हरतालिका तीज का विशेष महत्व माना जाता है। खासकर उत्तर प्रदेश और बिहार में यह पर्व सुहागिन महिलाओं के लिए आस्था, प्रेम और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए कठिन निर्जला व्रत रखती हैं और भगवान शिव-पार्वती की पूजा करती हैं।
हरतालिका तीज केवल एक धार्मिक पर्व नहीं बल्कि महिलाओं की भावनाओं, परंपराओं और परिवार से जुड़े रिश्तों का उत्सव भी है। इस दिन महिलाएं सजती-संवरती हैं, मेहंदी लगाती हैं और सोलह श्रृंगार कर पूजा में शामिल होती हैं।
हरतालिका तीज की पौराणिक मान्यता
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हरतालिका तीज का संबंध माता पार्वती और भगवान शिव के विवाह से जुड़ा है। मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी।
कहा जाता है कि माता पार्वती की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया। तभी से महिलाएं इस व्रत को पति की लंबी आयु और अच्छे वैवाहिक जीवन के लिए करती हैं।
निर्जला व्रत का महत्व
हरतालिका तीज पर महिलाएं सूर्योदय से लेकर अगले दिन तक बिना पानी पिए व्रत रखने की परंपरा निभाती हैं। इसे सबसे कठिन व्रतों में से एक माना जाता है।
मान्यता है कि श्रद्धा और विश्वास के साथ रखा गया यह व्रत वैवाहिक जीवन में सुख-शांति और प्रेम बनाए रखने में सहायक होता है।
सोलह श्रृंगार की परंपरा
हरतालिका तीज पर सोलह श्रृंगार का विशेष महत्व होता है। महिलाएं नई साड़ी पहनती हैं, मेहंदी लगाती हैं, चूड़ी, बिंदी, सिंदूर और अन्य आभूषणों से सजती हैं।
सोलह श्रृंगार को भारतीय संस्कृति में सौभाग्य और सुहाग का प्रतीक माना जाता है। यही वजह है कि इस दिन महिलाएं विशेष रूप से तैयार होकर पूजा करती हैं।
यूपी-बिहार में दिखती है खास रौनक
उत्तर प्रदेश और बिहार में हरतालिका तीज बड़े उत्साह के साथ मनाई जाती है। घरों में पूजा की तैयारियां कई दिन पहले शुरू हो जाती हैं।
महिलाएं समूह में पूजा करती हैं, लोकगीत गाती हैं और माता पार्वती व भगवान शिव की कथा सुनती हैं। कई जगहों पर इस अवसर पर विशेष आयोजन भी किए जाते हैं।
पूजा विधि और परंपराएं
हरतालिका तीज के दिन महिलाएं भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की पूजा करती हैं। मिट्टी से बनी शिव-पार्वती की प्रतिमाओं की स्थापना कर उन्हें फूल, फल, वस्त्र और पूजा सामग्री अर्पित की जाती है।
इसके बाद व्रत कथा सुनी जाती है और परिवार की खुशहाली की कामना की जाती है।
आस्था और रिश्तों का पर्व
हरतालिका तीज महिलाओं के लिए केवल व्रत नहीं बल्कि प्रेम, विश्वास और रिश्तों की मजबूती का प्रतीक है। बदलते समय के साथ इसकी परंपराओं में बदलाव जरूर आया है, लेकिन आस्था और भावनाओं का महत्व आज भी कायम है।
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