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धर्म-अध्यात्म
Karva Chauth में करवा क्यों होता है खास? जानें मिट्टी के इस बर्तन का धार्मिक महत्व और पूजा के बाद इसका क्या करें
Harrison
9 Oct 2025 8:11 PM IST

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Religion Spirituality, धर्म अध्यात्म : करवा चौथ का त्योहार सुहागिनों के लिए सबसे पवित्र व्रतों में से एक माना जाता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करते हुए निर्जला व्रत रखती हैं। इस व्रत की पूजा में कई चीजें अहम मानी जाती हैं—जैसे छलनी, सोलह श्रृंगार, थाली, दीपक, और करवा। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस व्रत का नाम "करवा चौथ" ही क्यों पड़ा और इस पूजा में करवा (मिट्टी या धातु का बर्तन) को इतना विशेष महत्व क्यों दिया जाता है? इस लेख में जानिए करवा का धार्मिक महत्व, इसके प्रयोग की विधि, और पूजा के बाद करवा का क्या करना चाहिए।
करवा चौथ और करवा का गहरा संबंध
‘करवा’ एक छोटा मिट्टी या पीतल का बर्तन होता है, जिसमें पूजा के लिए जल या गेहूं भरा जाता है। यही करवा पूजा की थाली का एक मुख्य अंग होता है। व्रत के दौरान महिलाएं इसे करवा माता के आगे अर्पित करती हैं और कथा के समय हाथ में लेकर सुनती हैं।
धार्मिक ग्रंथों और मान्यताओं के अनुसार, करवा चौथ का व्रत सौभाग्य और अखंड विवाह जीवन के लिए किया जाता है। करवा को इस पूजा में इसलिए शामिल किया जाता है क्योंकि यह धारण, संग्रह और समर्पण का प्रतीक है।
करवा में जल या गेहूं भरना, अन्न और जल की पूर्ति का प्रतीक होता है, जिससे परिवार में अन्न और समृद्धि बनी रहती है।
करवा माता की पूजा करते समय इसी बर्तन को माता को समर्पित किया जाता है, जिससे माना जाता है कि माता करवा घर में सुख, सौभाग्य और संतोष बनाए रखती हैं।
करवा से जुड़ी पौराणिक कथा
करवा चौथ के साथ एक कथा जुड़ी है जिसमें एक पतिव्रता स्त्री "करवा" अपने पति की रक्षा के लिए यमराज से भी भिड़ जाती है। यह नाम ही इस व्रत के महत्व को और गहरा करता है। उस स्त्री का नाम करवा था, जिसने अपने तप, आस्था और साहस से अपने पति के प्राण वापस लाए। यही कारण है कि इस व्रत को "करवा चौथ" कहा जाता है और करवा (बर्तन) पूजा में प्रमुख भूमिका निभाता है।
पूजा में करवा का उपयोग कैसे करें?
करवा को साफ करके उसमें गेहूं या जल भरें।
उसके ऊपर ढक्कन रखें और उस पर हल्दी से स्वास्तिक बनाएं।
पूजा की थाली में इसे दीपक, मिठाई और श्रृंगार के सामान के साथ रखें।
कथा सुनते समय इसे हाथ में लेकर रखा जाता है।
चंद्रमा को अर्घ्य देते समय भी इसी करवे से जल अर्पित किया जाता है।
पूजा के बाद करवा का क्या करें?
करवा चौथ की पूजा पूरी होने के बाद करवे को यूं ही नहीं छोड़ दिया जाता, बल्कि इसका विशेष महत्व रहता है:
1. करवा का दान करें:
कई जगहों पर इसे सुहागिन महिला या ब्राह्मण को दान देना शुभ माना जाता है। इसमें मिठाई, पैसा, कपड़ा या श्रृंगार का सामान रखकर दिया जा सकता है।
2. घर में रखें:
कुछ परिवारों में करवे को घर के पूजा स्थल या अनाज वाले स्थान पर सुरक्षित रखा जाता है, ताकि घर में समृद्धि और अन्न की कभी कमी ना हो।
3. अगले वर्ष दोबारा प्रयोग करें:
अगर करवा मिट्टी का नहीं बल्कि धातु का है, तो उसे साफ करके अगली बार की पूजा में दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है।
करवा का वैज्ञानिक पहलू
पौराणिक और धार्मिक दृष्टिकोण के साथ-साथ करवा का वैज्ञानिक पहलू भी है। मिट्टी के बर्तन में जल रखने से उसमें शुद्धता बनी रहती है और सकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न होती है। पूजा में इसका प्रयोग वातावरण को शुद्ध करने और सकारात्मकता बढ़ाने के लिए भी किया जाता है।
करवा चौथ में करवा सिर्फ एक पूजा सामग्री नहीं, बल्कि सदियों पुरानी परंपरा, श्रद्धा और आस्था का प्रतीक है। यह मिट्टी का छोटा-सा बर्तन व्रती महिला की भावना, समर्पण और पति के प्रति प्रेम को दर्शाता है। करवा को पूजा में ससम्मान शामिल करना, उसके धार्मिक महत्व को समझना, और पूजा के बाद उसका उचित उपयोग करना इस व्रत को और अधिक पूर्णता देता है।
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