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धर्म-अध्यात्म
अंतिम संस्कार में क्यों फोड़ा जाता है शव का सिर जानिए वजह
nidhi
27 Aug 2026 11:00 AM IST

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सिर फोड़ने की परंपरा का सच
धर्म : हिंदू धर्म में अंतिम संस्कार से जुड़ी कई परंपराएं और मान्यताएं सदियों से चली आ रही हैं। इन्हीं में से एक परंपरा है चिता पर जलते हुए शव के सिर पर लकड़ी से प्रहार करना, जिसे आम भाषा में "कपाल क्रिया" कहा जाता है। कई लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि आखिर अंतिम संस्कार के दौरान यह प्रक्रिया क्यों की जाती है और इसके पीछे क्या धार्मिक या वैज्ञानिक कारण बताए जाते हैं।
क्या होती है कपाल क्रिया?
कपाल क्रिया अंतिम संस्कार की एक महत्वपूर्ण रस्म मानी जाती है। इसमें मुखाग्नि देने वाला व्यक्ति जलती हुई चिता के दौरान शव के सिर के हिस्से पर लकड़ी से प्रहार करता है। यह परंपरा मुख्य रूप से हिंदू रीति-रिवाजों में देखने को मिलती है। हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों और समुदायों में इसके तरीके अलग हो सकते हैं।
पहला कारण: आत्मा की मुक्ति की धार्मिक मान्यता
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शरीर नश्वर है और आत्मा अजर-अमर मानी जाती है। कपाल क्रिया को आत्मा की अंतिम मुक्ति और शरीर से उसके पूर्ण संबंध विच्छेद का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इस प्रक्रिया से मृत व्यक्ति की आत्मा को शांति मिलती है और वह अपने अगले सफर की ओर बढ़ती है।
दूसरा कारण: अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को पूर्ण करना
कपाल क्रिया को अंतिम संस्कार की अधूरी प्रक्रिया को पूरा करने वाली रस्म माना जाता है। पुराने समय में जब लकड़ियों से चिता सजाई जाती थी, तब शरीर के सभी हिस्सों का पूरी तरह अग्नि में विलीन होना जरूरी समझा जाता था। इसी उद्देश्य से यह प्रक्रिया की जाती थी।
तीसरा कारण: वैज्ञानिक और व्यावहारिक दृष्टिकोण
कुछ लोग इसे पुराने समय की व्यावहारिक आवश्यकता से जोड़कर देखते हैं। लकड़ी की चिता में कई बार शरीर के कुछ हिस्से पूरी तरह नहीं जल पाते थे। ऐसे में कपाल क्रिया को शरीर के पूर्ण दहन की प्रक्रिया का हिस्सा माना जाता था। हालांकि, आधुनिक समय में विद्युत शवदाह गृहों में यह परंपरा कई जगह नहीं निभाई जाती।
परंपरा और आस्था का हिस्सा
कपाल क्रिया को मुख्य रूप से धार्मिक विश्वास और परंपरा से जोड़ा जाता है। इसका उद्देश्य किसी प्रकार की हिंसा नहीं, बल्कि मृतक के प्रति अंतिम सम्मान और धार्मिक कर्तव्यों की पूर्ति माना जाता है। अलग-अलग धर्मों और संस्कृतियों में मृत्यु और अंतिम संस्कार से जुड़ी अलग-अलग मान्यताएं होती हैं।
इस तरह जलती चिता में की जाने वाली कपाल क्रिया के पीछे धार्मिक विश्वास, अंतिम संस्कार की पूर्णता और पुराने समय की व्यावहारिक जरूरतों जैसे कारण बताए जाते हैं।
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