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धर्म-अध्यात्म
गुरुवार के दिन बाल धोने से क्यों रोका जाता है? जानिए मान्यताओं के पीछे का रहस्य
nidhi
5 Jun 2026 2:57 PM IST

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क्या है इसका धार्मिक, सांस्कृतिक और ज्योतिषीय महत्व?
Hindu Belief: भारतीय संस्कृति और हिंदू धर्मशास्त्रों में दिनचर्या के हर छोटे-बड़े कार्य के लिए विशेष नियम बताए गए हैं. सुबह उठने से लेकर रात में सोने तक, और नाखून काटने से लेकर बाल धोने तक, हर क्रिया को ग्रहों और ऊर्जा से जोड़कर देखा जाता है. अक्सर घर के बड़े-बुजुर्ग गुरुवार या बृहस्पतिवार के दिन बाल धोने, कटवाने या नाखून काटने से मना करते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ऐसा क्यों कहा जाता है? क्या यह केवल एक लोकमान्यता है या इसके पीछे कोई धार्मिक और ज्योतिषीय कारण भी छिपा है? आइए जानते हैं.
गुरुवार के दिन बाल धोना और कटवाना क्यों है वर्जित?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, गुरुवार का दिन देवताओं के गुरु बृहस्पति देव को समर्पित माना जाता है. ज्योतिष में बृहस्पति को बुद्धि, ज्ञान, भाग्य, धन, संतान और वैवाहिक जीवन का कारक ग्रह माना गया है. ऐसी मान्यता है कि पुरुषों और महिलाओं के सिर पर बृहस्पति ग्रह का विशेष प्रभाव होता है. इसलिए कहा जाता है कि गुरुवार के दिन सिर धोने या बाल कटवाने से कुंडली में गुरु ग्रह की स्थिति कमजोर हो सकती है.
मान्यता के अनुसार, इसके कारण आर्थिक स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, शिक्षा में बाधाएं आ सकती हैं और व्यक्ति को निर्णय लेने में भ्रम का सामना करना पड़ सकता है. वहीं, बृहस्पति को विवाह का कारक ग्रह भी माना जाता है. इसलिए ऐसी मान्यता है कि गुरुवार को बाल धोने से विवाह में देरी, वैवाहिक संबंधों में तनाव और दांपत्य जीवन में बाधाएं उत्पन्न हो सकती हैं.
महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग मान्यताएं
पौराणिक मान्यताओं और लोकविश्वासों के अनुसार, विवाहित महिलाओं के लिए गुरुवार के दिन बाल धोना विशेष रूप से वर्जित माना गया है. मान्यता है कि इससे पति की उन्नति में बाधा आ सकती है और संतान सुख पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है. वहीं, पुरुषों के लिए इस दिन बाल या दाढ़ी कटवाना आर्थिक नुकसान और भाग्य में कमी का कारण माना जाता है.
पौराणिक कथा
गुरुवार को बाल न धोने के पीछे एक लोकप्रिय पौराणिक लोककथा भी प्रचलित है. कथा के अनुसार, एक अत्यंत समृद्ध व्यापारी की पत्नी बहुत आलसी थी और उसे दान-पुण्य करना पसंद नहीं था. एक दिन उसके द्वार पर एक साधु भिक्षा मांगने आए, जो वास्तव में देवगुरु बृहस्पति थे.
जब साधु ने भिक्षा मांगी, तो सेठानी ने कहा कि वह घर-गृहस्थी और धन-संपत्ति संभालते-संभालते परेशान हो चुकी है और ऐसा कोई उपाय बताएं, जिससे उसका सारा धन समाप्त हो जाए और उसे आराम मिल सके.
तब साधु ने उसे गुरुवार के दिन घर में पोछा लगाने, बाल धोने और बाल कटवाने का उपाय बताया. सेठानी ने साधु की बात मान ली और ऐसा करने लगी. कहा जाता है कि कुछ ही समय में उसका सारा धन, सुख और वैभव नष्ट हो गया तथा वह दाने-दाने के लिए मोहताज हो गई.
बाद में जब उसे अपनी गलती का एहसास हुआ, तो उसने बृहस्पतिवार का व्रत करना शुरू किया, नियमों का पालन किया और देवगुरु बृहस्पति की पूजा-अर्चना की. इसके बाद उसकी खोई हुई सुख-समृद्धि वापस लौट आई.
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