धर्म-अध्यात्म

खड़े होकर पानी पीना क्यों माना जाता है गलत जानें धर्म और विज्ञान की वजह

nidhi
5 Sept 2026 9:14 AM IST
खड़े होकर पानी पीना क्यों माना जाता है गलत जानें धर्म और विज्ञान की वजह
x
खड़े होकर क्यों नहीं पीना चाहिए पानी जानें

धर्म : हमारे घरों में अक्सर बड़े-बुजुर्ग एक बात जरूर कहते हैं—“खड़े होकर पानी मत पियो, बैठकर पियो।” पीढ़ियों से चली आ रही इस सलाह को कई लोग धार्मिक परंपरा और आयुर्वेद से जोड़ते हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या वास्तव में खड़े होकर पानी पीना नुकसानदायक है या यह सिर्फ एक पुरानी मान्यता है? आधुनिक विज्ञान और पारंपरिक मान्यताओं को अलग-अलग समझना जरूरी है, क्योंकि खड़े होकर पानी पीने से किडनी खराब होने या गठिया होने जैसे कई लोकप्रिय दावों के लिए मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।

परंपरा में बैठकर पानी पीने पर जोर
भारतीय जीवनशैली में भोजन और पानी को केवल शरीर की आवश्यकता नहीं बल्कि अनुशासन और संयम से भी जोड़ा गया है। पानी को धीरे-धीरे और शांत होकर पीने की परंपरा रही है। इसी वजह से घर के बड़े सदस्य बच्चों को बैठकर पानी पीने की सलाह देते आए हैं। आयुर्वेद से जुड़े कई विशेषज्ञ भी पानी को बैठकर और छोटे-छोटे घूंट में पीने की सलाह देते हैं। पारंपरिक आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में माना जाता है कि जल्दबाजी में पानी गटकने की बजाय आराम से पीना शरीर के लिए बेहतर है।
क्या है इसका धार्मिक कारण?
धार्मिक-सांस्कृतिक दृष्टि से जल को भारतीय परंपरा में पवित्र माना गया है। पूजा-पाठ से लेकर धार्मिक संस्कारों तक जल का विशेष महत्व है। इसी व्यापक परंपरा में पानी पीते समय शांत मुद्रा और संयम रखने जैसी आदतें विकसित हुईं। हालांकि “खड़े होकर पानी पीना धार्मिक रूप से निषिद्ध है” ऐसा कोई सार्वभौमिक वैज्ञानिक निष्कर्ष नहीं है। अलग-अलग परिवारों और परंपराओं में इसके पीछे अलग मान्यताएं हो सकती हैं। इसलिए इसे धार्मिक नियम की बजाय सांस्कृतिक और पारंपरिक स्वास्थ्य-अनुशासन के रूप में समझना अधिक उचित है।
आयुर्वेद क्या कहता है?
आयुर्वेदिक सलाह में सामान्यतः बैठकर पानी पीने और पानी को एक साथ तेजी से गटकने की बजाय छोटे घूंट में लेने पर जोर दिया जाता है। कुछ आयुर्वेदिक व्याख्याओं में दावा किया जाता है कि खड़े होकर तेजी से पानी पीने से शरीर में तरल संतुलन और पाचन प्रभावित हो सकता है। इसी आधार पर कई जगह यह भी दावा किया जाता है कि खड़े होकर पानी पीने से किडनी पर दबाव पड़ता है या जोड़ों में समस्या हो सकती है। लेकिन यहां आयुर्वेदिक मान्यता और आधुनिक वैज्ञानिक प्रमाण में अंतर समझना जरूरी है।
विज्ञान क्या कहता है?
आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में अभी ऐसा मजबूत प्रमाण नहीं है कि एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए केवल खड़े होकर पानी पीना किडनी खराब करता है, गठिया पैदा करता है या पाचन तंत्र को नुकसान पहुंचाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक पानी बैठकर पिया जाए या खड़े होकर, सामान्य परिस्थितियों में शरीर उसे अवशोषित कर सकता है। इसलिए सोशल मीडिया पर मिलने वाले ऐसे दावों से सावधान रहना चाहिए कि खड़े होकर पानी पीने से पानी सीधे जोड़ों में पहुंच जाता है या किडनी उसे फिल्टर नहीं कर पाती। इन बातों को स्थापित करने वाला ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।
फिर बैठकर पानी पीने में फायदा क्या?
बैठकर पानी पीने का व्यावहारिक फायदा यह हो सकता है कि व्यक्ति आराम से पानी पीता है और उसे तेजी से गटकने की संभावना कम रहती है। छोटे-छोटे घूंट लेना उन लोगों के लिए भी अधिक सहज हो सकता है जिन्हें बहुत तेजी से पानी पीने पर खांसी या असहजता होती है। यानी फायदा मुख्य रूप से आराम, सावधानी और धीरे पीने की आदत से जुड़ा हो सकता है, न कि इस दावे से कि खड़े होते ही पानी शरीर के लिए जहरीला या नुकसानदायक हो जाता है।
क्या खड़े होकर पानी पीना बिल्कुल गलत है?
अगर आप स्वस्थ हैं और कभी-कभी चलते या खड़े रहते हुए पानी पी लेते हैं तो घबराने की जरूरत नहीं है। उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाण इसे अपने आप में खतरनाक आदत साबित नहीं करते। हां, पानी बहुत तेजी से गटकने के बजाय आराम से पीना बेहतर है। विशेष रूप से जिन लोगों को निगलने में परेशानी होती है, उन्हें पानी पीते समय अधिक सावधानी बरतनी चाहिए और जरूरत होने पर चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
कितने गिलास पानी पीना जरूरी?
यह भी जरूरी नहीं कि हर व्यक्ति रोज ठीक आठ गिलास पानी ही पिए। पानी की आवश्यकता उम्र, शरीर, मौसम, शारीरिक गतिविधि, भोजन और स्वास्थ्य जैसी कई चीजों पर निर्भर करती है। प्रसिद्ध “8×8” नियम के समर्थन में भी कठोर वैज्ञानिक प्रमाण सीमित पाए गए हैं। गर्मी में अधिक पसीना निकलने, व्यायाम या शारीरिक मेहनत के दौरान शरीर को ज्यादा तरल की जरूरत पड़ सकती है। प्यास और पेशाब का रंग जैसे संकेत भी सामान्य तौर पर हाइड्रेशन का अंदाजा लगाने में मदद कर सकते हैं।
परंपरा और विज्ञान में इतना है फर्क
इसलिए अगली बार बड़े-बुजुर्ग आपको बैठकर पानी पीने को कहें तो उनकी बात के पीछे मौजूद धीरे, आराम से और ध्यानपूर्वक पानी पीने की अच्छी आदत को समझा जा सकता है। आयुर्वेद बैठकर और घूंट-घूंट पानी पीने की सलाह देता है, लेकिन आधुनिक विज्ञान अभी यह साबित नहीं करता कि सिर्फ खड़े होकर पानी पीने से गठिया, किडनी की बीमारी या गंभीर पाचन समस्या हो जाती है। सबसे महत्वपूर्ण बात है—शरीर की जरूरत के अनुसार पर्याप्त पानी पिएं, सुरक्षित पानी पिएं और उसे इतनी तेजी से न गटकें कि निगलने में परेशानी होने लगे।
Next Story