धर्म-अध्यात्म

शादी में द्वार रुकाई क्यों है खास, जानें इस मजेदार रस्म का महत्व

nidhi
22 Sept 2026 8:46 AM IST
शादी में द्वार रुकाई क्यों है खास, जानें इस मजेदार रस्म का महत्व
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शादी में क्यों होती है द्वार रुकाई की रस्म

लाइफस्टाइल डेस्क: भारतीय शादियां केवल विवाह की औपचारिकता तक सीमित नहीं होतीं, बल्कि इनमें कई छोटी-बड़ी रस्में निभाई जाती हैं। अलग-अलग क्षेत्रों और समुदायों में इनके नाम और तरीके भी अलग हो सकते हैं। ऐसी ही एक लोकप्रिय रस्म है द्वार रुकाई। इसमें आमतौर पर दूल्हे की बहनें या परिवार की महिलाएं नवविवाहित जोड़े को घर में प्रवेश करने से पहले दरवाजे पर रोकती हैं और दूल्हे से नेग मांगती हैं। हंसी-मजाक से भरी इस रस्म के पीछे पारिवारिक जुड़ाव और नई बहू के स्वागत का भाव माना जाता है।

शादी के बाद जब दूल्हा अपनी दुल्हन को लेकर घर पहुंचता है तो गृह प्रवेश की तैयारियां की जाती हैं। इसी दौरान कई परिवारों में दूल्हे की बहनें दरवाजा रोककर खड़ी हो जाती हैं। वे अपने भाई और भाभी को तब तक अंदर नहीं जाने देतीं, जब तक भाई उन्हें मनचाहा नेग या उपहार देने का वादा नहीं करता। इसके बाद मजाक-मस्ती और बातचीत के बीच रास्ता खोल दिया जाता है।
भाई-बहन के रिश्ते से जुड़ी है रस्म
द्वार रुकाई को भाई और बहन के रिश्ते से जोड़कर भी देखा जाता है। शादी के बाद भाई के जीवन में नई जिम्मेदारियां और नया रिश्ता जुड़ता है। ऐसे में बहनें मजाकिया अंदाज में भाई से नेग मांगकर अपने रिश्ते और अधिकार को व्यक्त करती हैं। यह कोई कानूनी या अनिवार्य धार्मिक नियम नहीं बल्कि अलग-अलग परिवारों में चली आ रही सामाजिक और पारिवारिक परंपरा है।
नई बहू का स्वागत
इस रस्म का एक महत्वपूर्ण पहलू नई दुल्हन का परिवार के माहौल से परिचय भी है। विवाह के बाद दुल्हन पहली बार ससुराल पहुंचती है। यह समय उसके लिए भावनात्मक हो सकता है क्योंकि वह अपने मायके से विदा होकर नए परिवार में प्रवेश कर रही होती है। द्वार रुकाई के दौरान होने वाला हल्का-फुल्का मजाक माहौल को सहज बनाने का माध्यम बन सकता है।
इस दौरान ननद और भाभी के बीच बातचीत भी शुरू होती है। कई परिवारों में इसे ननद-भाभी के नए रिश्ते की मजेदार शुरुआत के रूप में देखा जाता है। नेग को पैसे तक सीमित रखना जरूरी नहीं है। उपहार, मिठाई या कोई यादगार चीज भी दी जा सकती है।
नेग देने की परंपरा क्यों?
भारतीय विवाह परंपराओं में अलग-अलग मौकों पर नेग देने का चलन लंबे समय से मौजूद है। नेग को शुभ अवसर पर प्रेम और खुशी साझा करने के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। द्वार रुकाई में बहनों द्वारा मांगा गया नेग भी इसी परंपरा का हिस्सा है।
कई जगह बहनें पहले बड़ी रकम मांगती हैं और दूल्हा कम रकम देने की बात करता है। दोनों पक्षों के बीच मजेदार मोलभाव चलता है और आखिर में एक रकम या उपहार पर सहमति बनती है। यही हंसी-मजाक इस रस्म को यादगार बना देता है।
हालांकि भारत में विवाह परंपराएं क्षेत्र, जातीय समुदाय और परिवार के अनुसार काफी अलग होती हैं। इसलिए द्वार रुकाई की कोई एक निश्चित विधि या सार्वभौमिक धार्मिक व्याख्या नहीं है। आज के समय में इसे मुख्य रूप से परिवार के सदस्यों को करीब लाने, खुशी साझा करने और नई दुल्हन के स्वागत को यादगार बनाने वाली रस्म के रूप में देखा जाता है।
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