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धर्म-अध्यात्म
Maghi Purnima पर गंगा स्नान का इतना महत्व क्यों है? जाने पौराणिक कथा
Tara Tandi
12 Feb 2025 1:19 PM IST

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Maghi Purnima ज्योतिष न्यूज़ : सनातन धर्म में कई सारे पर्व मनाए जाते हैं लेकिन पूर्णिमा और अमावस्या तिथि को बहुत ही खास माना जाता है जो कि हर माह में एक बार पड़ती है। साल में कुल 24 पूर्णिमा तिथियां आती है हर पूर्णिमा का अपना महत्व होता है। पंचांग के अनुसार माघ मास में पड़ने वाली पूर्णिमा को माघ या माघी पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है इस दिन स्नान दान, पूजा पाठ और तप जप का विधान होता है।
माघ पूर्णिमा के दिन श्रद्धालु प्रयाग स्थित त्रिवेणी संगम में या अन्य स्थानों पर गंगा स्नान करते हैं मान्यता है कि इस पावन दिन पर गंगा स्नान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और सारे पाप मिट जाते हैं। इस साल माघी पूर्णिमा आज यानी 12 फरवरी दिन बुधवार को मनाई जा रही है इस दिन पूजा पाठ के साथ ही व्रत कथा भी जरूर सुननी या पढ़नी चाहिए माना जाता है कि ऐसा करने से व्रत पूजा का पूर्ण फल मिलता है और ईश्वरीय कृपा बनी रहती है तो आज हम आपको अपने इस लेख द्वारा माघी पूर्णिमा से जुड़ी पौराणिक कथा बता रहे हैं तो आइए जानते हैं।
माघी पूर्णिमा की व्रत कथा—
- पद्म पुराण के अनुसार, एक बार गलती से भगवान विष्णु के पैर के नीचे एक बिच्छू आ गया। अपने बचाव के लिए बिच्छु ने भगवान को डंक मार दिया और श्रीहरि के पैर के नीचे दबने से बिच्छू की अकाल मृत्यु हो गई। बिच्छू के मरने से भगवान विष्णु का मन बहुत विचलित हो गया।
- बिच्छू की मृत्यु का दुख श्रीहरि को परेशान कर रहा था। तभी वहां देवर्षि नारद आए और पूरा बात जानकर उन्होंने भगवान श्रीहरि से कहा ‘आप माघ पूर्णिमा पर पृथ्वी पर जाएं और वहां जाकर गंगा में स्नान करें, इससे आपके मन की सारी पीड़ा दूर होगी और जीव हत्या का पाप भी नहीं लगेगा।’
- नारद की बात मानकर श्रीहरि रूप बदलकर माघ पूर्णिमा पर गंगा में स्नान करने आए। स्नान के बाद उन्होंने ऋषि मुनियों को दान-दक्षिणा भी दी। ऐसा करने से उन्हें उन्हें जीव हत्या के दोष से मुक्ति मिली। तभी से माघ पूर्णिमा पर गंगा नदी में स्नान की परंपरा शुरू हुई, जो आज भी जारी है।
- मान्यता है कि आज भी माघ पूर्णिमा पर भगवान विष्णु रूप बदलकर गंगा स्नान के लिए संगम तट पर आते हैं। इसलिए इस दिन गंगा तटों पर मेले भी आयोजित होते हैं। गंगा के अलावा अन्य पवित्र नदियों पर भी श्रद्धालु स्नान करने पहुंचते हैं। जो लोग माघी पूर्णिमा का व्रत करते हैं, उन्हें ये कथा जरूर सुननी चाहिए।
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