धर्म-अध्यात्म

पूजा-पाठ में क्यों गूंजती है 'उलू ध्वनि'? जानिए इसके पीछे की खास परंपरा

Tara Tandi
20 Oct 2026 5:33 PM IST
पूजा-पाठ में क्यों गूंजती है उलू ध्वनि? जानिए इसके पीछे की खास परंपरा
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नई दिल्ली: क्या आपने बंगाल में कभी दुर्गा पूजा के दौरान महिलाओं को अचानक एक तेज आवाज में चिल्लाते हुए सुना है? दुर्गा पूजा ही नहीं किसी भी शुभ अवसर पर महिलाएं एक अलग आवाज में एक साथ बोलती हैं जिसे उलू ध्वनि कहा जाता है।
यह ध्वनि अक्सर धार्मिक उत्सवों, शादियों और अन्य शुभ मौकों पर सुनाई देती है। यह आवाज एक तरह की 'उल्युलेशन' मानी जाती है और यह एक ऐसी मौखिक परंपरा है जो दुनिया भर की कई संस्कृतियों में पाई जाती है।
मुख्य रूप से बंगाली महिलाएं हर खुशी के मौके पर इस ध्वनि को निकलती हैं और मानो वह इस ध्वनि के माध्यम से शुभता को निमंत्रण देती हैं। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, इसे जीत, जश्न और नकारात्मकता को दूर करने से जोड़ा जाता है। आइए आपको बताते हैं इस अनोखी ध्वनि के कुछ रहस्यों और इसके महत्व के बारे में।
उलू ध्वनि शुभकामनाओं का प्रतीक
बंगाल में कोई भी शुभ काम हो तो महिलाएं उलू की ध्वनि के रूप में शुभकामनाएं देती हैं। इस ध्वनि को ही शुभ ध्वनि माना जाता है और इससे आस-पास की ऊर्जा भी सकारात्मक हो जाती है। उलू ध्वनि के कई फायदे होते हैं और इसको वातावरण के लिए सीधा सकारात्मक संदेश माना जाता है।
उलू ध्वनि से औरा पॉजिटिव होता है
बंगाली संस्कृति में ऐसा माना जाता है कि यह आवाज एक पॉजिटिव औरा बनाती है। बंगाल में इस ध्वनि के बिना कोई भी शुभ काम अधूरा माना जाता है।
इसके लिए महिलाएं किसी भी शुभ काम में सबसे पहले मंदिर जाकर यह ध्वनि निकालकर माता का आह्वाहन करती हैं और उसके बाद उस स्थान पर यह ध्वनि निकालती हैं जहां शुभ काम होता है। इस ध्वनि को गृह प्रवेश से पहले, शादी-विवाह जैसे अवसरों में और यहां तक कि दुर्गा पूजा में भी अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है।
बुरी नजर से बचाती है उलू ध्वनि
उलू ध्वनि को किसी भी तरह की बुरी नजर से बचाने का माध्यम माना जाता है। इसी वजह से किसी भी शुभ अवसर को बुरी नजर से बचाने के लिए उलू ध्वनि निकाली जाती है। इस ध्वनि के बिना किसी भी काम की पूर्णता नहीं मानी जाती है।
उलू ध्वनि के बिना अधूरे होते हैं शुभ काम
शादी में दूल्हा-दुल्हन के प्रवेश से लेकर दुर्गा पूजा की सभी रस्मों में उलू ध्वनि को विशेष माना जाता है। इसे सिर्फ एक ध्वनि नहीं माना जाता है बल्कि ये एक विशेष प्रकार से निकाली जाने वाली ऐसी आवाज होती है जो एक समुदाय का प्रतीक होती है।
इस ध्वनि को सबसे पहले समुदाय की सबसे बड़ी महिला आरंभ करती है फिर उसके बाद अन्य महिलाएं भी एक सुर में यह ध्वनि निकालती हैं। ऐसा लगता है मानो यह ध्वनि माता दुर्गा से घर और परिवार की कुशलता की कामना में निकाली जा रही हो।
दुर्गा पूजा के पंडाल पर निकाली जाने वाली यह उलू ध्वनि वास्तव में बहुत खास होती है जिसे शंखनाद के समान ही पवित्र माना जाता है।
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